पहलगाम आतंक हमला 2025 भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नया सबक बन गया है। 22 अप्रैल 2025 को पर्यटकों पर हुए इस घृणित हमले के बाद सुरक्षा बलों ने तीन पाकिस्तानी आतंकियों को ढेर कर दिया। अब NIA की जांच में उनके मोबाइल फोन से ऐसे सबूत मिले हैं जो पाकिस्तान की आतंक फैलाने वाली नीति को एक बार फिर बेनकाब कर रहे हैं। खास बात यह है कि दोनों फोन पाकिस्तानी बैंक से जुड़े पाए गए हैं, जिसका नाम पहले भी आतंक फंडिंग में आ चुका है।

पहलगाम हमले में बरामद हुए फोन
मुठभेड़ में मारे गए तीन आतंकियों — फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी — के पास से दो शाओमी फोन बरामद हुए थे। एक रेडमी 9T (ऑरेंज) और दूसरा रेडमी नोट 12 (ब्लैक)। जांच एजेंसियों ने पाया कि ये फोन पाकिस्तान में खरीदे गए थे।
- रेडमी 9T फोन जनवरी 2021 में चीन से पाकिस्तान पहुंचा था। पाकिस्तान
- की कंपनी टेक सिरत प्राइवेट लिमिटेड (कराची स्थित) ने इसे इंपोर्ट किया। डिलीवरी एड्रेस
- और फंडिंग फैसल बैंक (कराची) से जुड़ी हुई पाई गई। 2023 में ये फोन खरीदा गया
- लेकिन पूरे दो साल तक बंद रखा गया। हमले से ठीक पहले इन्हें एक्टिवेट किया गया।
दूसरा फोन भी लाहौर की एयर लिंक कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़ा था। ये फोन भी लंबे समय तक बंद रखे गए। आतंकी सामान्यतः लॉन्ग रेंज रेडियो का इस्तेमाल करते थे और फोन को आखिरी समय में सक्रिय किया। फोन में कुछ तस्वीरें, मैप और एक टेंट की फोटो भी मिली है।
फैसल बैंक का आतंक से पुराना रिश्ता
- फैसल बैंक का नाम नया नहीं है। 2007 में न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 9/11 हमले के बाद
- अमेरिकी अदालतों में पेश दस्तावेजों में इस बैंक के अकाउंट लश्कर-ए-तैयबा और लजनात अल दवा
- (अल-कायदा से जुड़ा) से लिंक पाए गए थे। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में भी यह बैंक
- कई प्रतिबंधित आतंकी संगठनों — जैसे जैश-ए-मोहम्मद, हरकत-उल-मुजाहिदीन आदि — के फंडिंग से जुड़ा बताया गया था।
- हालांकि बैंक ने पहले दावा किया था कि संदिग्ध अकाउंट फ्रीज कर दिए गए हैं
- लेकिन NIA जांच से साफ होता है कि पाकिस्तान में आतंकियों को फंडिंग
- और लॉजिस्टिक सपोर्ट अभी भी आसानी से उपलब्ध है।
आतंक की साजिश कितनी गहरी?
जांच एजेंसियों का मानना है कि फोन दो साल तक बंद रखने का मकसद इन्हें किसी बड़े हमले के लिए सुरक्षित रखना था। स्मगलिंग के जरिए ये फोन लश्कर-ए-तैयबा तक पहुंचे। ये रणनीति आतंकियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली आम तकनीक है — पुराने डिवाइस, कम ट्रैकिंग और आखिरी समय में इस्तेमाल।
पहलगाम हमला पर्यटकों को निशाना बनाने वाला था, जिसका मकसद घाटी में शांति और पर्यटन को नुकसान पहुंचाना था। NIA की चार्जशीट और जांच में पाकिस्तानी हैंडलर्स की भूमिका साफ दिख रही है।
पहलगाम आतंक हमला भारत के लिए सबक और चुनौतियां!
यह घटना भारत के लिए कई सबक लेकर आई है:
- तकनीकी निगरानी को और मजबूत करना होगा।
- चाइनीज डिवाइसेज की स्मगलिंग पर सख्त नजर रखनी होगी।
- पाकिस्तान से आने वाले फंडिंग रूट्स को ब्लॉक करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाना जरूरी है।
भारत सरकार पहले ही FATF और अन्य मंचों पर पाकिस्तान को आतंक का समर्थक बताती रही है। ऐसे सबूत इस दावे को और मजबूत करते हैं।
पहलगाम आतंक हमले के मोबाइल फोन ने पाकिस्तान की दोहरी नीति को फिर उजागर किया है। एक तरफ पाकिस्तान दुनिया से शांति का दावा करता है, दूसरी तरफ उसके बैंक, कंपनियां और सरकारी तंत्र आतंकियों को सपोर्ट देते हैं। NIA की जांच जारी है और उम्मीद है कि इसमें और बड़े खुलासे होंगे।







