स्विस होटल भारतीय नियम सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। आरपी-संजीव गोयनका ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने स्विट्जरलैंड के एक लग्जरी होटल के नियम शेयर किए हैं, जो खास तौर पर भारतीय मेहमानों के लिए बनाए गए थे। इन नियमों को पढ़कर कई लोगों का खून खौल गया, तो कुछ ने सिविक सेंस पर गंभीर बहस भी छेड़ दी।

हर्ष गोयनका का पोस्ट और विवाद
हर्ष गोयनका ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा कि उन्होंने स्विट्जरलैंड के ग्स्टाड स्थित
Hotel Arc-en-Ciel में खुद यह नोटिस देखा था। उन्होंने लिखा
मैं हैरान रह गया कि भारतीयों के लिए अलग से इतने नियम क्यों बनाने पड़े।”
उन्होंने आगे कहा कि आजकल रेस्त्रां में गरबा करने, एयरपोर्ट पर तेज आवाज में बात करने और प्लेन में पिकनिक मनाने जैसे वीडियो वायरल हो रहे हैं। दावोस में एक भारतीय बिजनेसमैन ने पंजाबी गाने इतने तेज बजाए कि पूरा इलाका सुन रहा था।
हर्ष गोयनका ने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर भारत वैश्विक महाशक्ति बनना चाहता है, तो हमें अपनी सिविक सेंस को अपग्रेड करना होगा।
स्विस होटल के भारतीयों के लिए नियम
होटल Arc-en-Ciel ने भारतीय मेहमानों के लिए अलग से गाइडलाइंस जारी की थीं। मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
- नाश्ते का बुफे: सुबह 7:30 से 10:30 बजे तक। बुफे का खाना केवल नाश्ते के समय ही खाएं।
- भोजन साथ में न ले जाएं। अगर लंच पैक चाहिए तो अलग से ऑर्डर करके पैसे देकर लें।
- कटलरी का इस्तेमाल: केवल होटल द्वारा दी गई कटलरी ही इस्तेमाल करें।
- शेयरिंग पर अतिरिक्त शुल्क: अगर 2 से ज्यादा लोग एक साथ खाना शेयर करना चाहें तो हर अतिरिक्त व्यक्ति के लिए प्लेट और सर्विस के CHF 5 और ड्रिंक के लिए CHF 1 अतिरिक्त चार्ज लगेंगे।
- शोर न करें: कॉरिडोर में शांत रहें। बालकनी में ऊंची आवाज में बात न करें। अन्य मेहमान भी शांति चाहते हैं।
- रेस्तरां टाइमिंग: रात का भोजन समय पर पूरा करें। रूम सर्विस रात 10 बजे तक ही उपलब्ध है।
ये नियम सिर्फ भारतीयों के लिए ही थे, जो कई लोगों को रेसिस्ट और अपमानजनक लगे।
स्विस होटल भारतीय नियम क्यों बने ये नियम?
- होटल मैनेजमेंट ने महसूस किया कि कुछ भारतीय पर्यटक बुफे से खाना बाहर ले जाते हैं
- शोर मचाते हैं और दूसरों की सुकून भरी छुट्टियों में दखल देते हैं। स्विट्जरलैंड जैसे
- देश जहां शांति, अनुशासन और सिविक सेंस बहुत महत्वपूर्ण है, वहां ऐसे व्यवहार पर सख्ती बरती जाती है।
- हर्ष गोयनका के पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं आईं।
- कुछ लोग बोले कि यह भारतीयों का अपमान है, जबकि कई ने माना कि हमें अपनी आदतों पर विचार करना चाहिए।
विदेश में भारतीय पर्यटकों का व्यवहार – सच्चाई क्या है?
भारतीय पर्यटक संख्या में तेजी से बढ़ रहे हैं। 2025-26 में लाखों भारतीय स्विट्जरलैंड, जापान, यूरोप घूमने गए। लेकिन कुछ घटनाओं ने पूरी कम्युनिटी की इमेज खराब की है:
- एयरपोर्ट और प्लेन में तेज आवाज में बात करना
- पब्लिक जगहों पर शोर-शराबा
- बुफे से खाना बाहर ले जाना
- दूसरों की प्राइवेसी का सम्मान न करना
दूसरी तरफ, जापान, सिंगापुर जैसे देशों में अनुशासन और शांति के कारण लोग सम्मान पाते हैं।
हमें क्या सीखना चाहिए?
- सिविक सेंस: सार्वजनिक स्थानों पर शांति बनाए रखें।
- अन्य संस्कृतियों का सम्मान: हर देश के अपने नियम और रिवाज होते हैं।
- जिम्मेदार पर्यटन: हम दुनिया भर में भारत का चेहरा होते हैं।
- अपनी छवि सुधारें: छोटी-छोटी आदतें बदलने से बड़ी तस्वीर बदल सकती है।
हर्ष गोयनका का यह पोस्ट सिर्फ एक होटल के नियम नहीं, बल्कि बड़े संदेश की याद दिलाता है। हमें गर्व के साथ व्यवहार करना चाहिए, ताकि दुनिया हमें सम्मान की नजर से देखे।
स्विस होटल का यह मामला हमें सोचने पर मजबूर करता है कि विदेश जाकर भी हम अपने देश की इज्जत कैसे बढ़ा सकते हैं। सिविक सेंस कोई छोटी बात नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति का आधार है।







