फलता उपचुनाव परिणाम 2026 फलता विधानसभा सीट पर हुए रिपोल में बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की है। बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने माकपा के शंभु नाथ कुर्मी को 1,09,021 वोटों से हराकर बड़ी जीत हासिल की। कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मुल्ला तीसरे स्थान पर रहे जबकि टीएमसी के जहांगीर खान चौथे स्थान पर सिमट गए। यह जीत पश्चिम बंगाल की राजनीति में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।

#फलता चुनाव: पृष्ठभूमि और रिपोलिंग की जरूरत
फलता सीट पर 29 अप्रैल को हुए मतदान में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगे थे। कई बूथों पर ईवीएम पर इत्र छिड़कने, चुनाव चिह्न ढकने और बूथ कैप्चरिंग के मामले सामने आए। इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने पूरे 285 बूथों पर रीपोलिंग का आदेश दिया।
21 मई को हुई रिपोलिंग शांतिपूर्ण रही। शाम 5 बजे तक 86% मतदान दर्ज किया गया। रिपोलिंग के बाद 25 मई को घोषित परिणामों ने सबको चौंका दिया। बीजेपी ने भारी अंतर से जीत हासिल की, जो टीएमसी के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
फलता उपचुनाव परिणाम 2026 अभिषेक बनर्जी का तीखा हमला
परिणाम घोषित होने के बाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गिनती की प्रक्रिया में कई विसंगतियां दिखाई दीं।
- पहले चुनाव में 3 बजे तक केवल 2-4 राउंड गिनती होती थी।
- इस बार 3 बजे तक 21 राउंड गिनती पूरी हो गई।
- अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि टीएमसी के 1000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को भगा दिया गया।
- पार्टी कार्यालयों पर हमले हुए और आचार संहिता का उल्लंघन किया गया।
- उन्होंने कहा कि बीजेपी को छोड़कर अन्य दलों के पोलिंग एजेंट्स को भी हटाया गया। यह निष्पक्ष चुनाव पर हमला है।
- टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव से पहले ही मैदान छोड़ दिया था, फिर भी उनका नाम ईवीएम पर दिख रहा था।
सीएम शुभेंदु अधिकारी का करारा जवाब
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अभिषेक बनर्जी के आरोपों का मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने कहा:
“15 साल बाद लोगों को वोट डालने की आजादी मिली है, इसलिए सारा सच सामने आ गया। टीएमसी माफिया कंपनी बन चुकी थी। राज्य की मशीनरी का दुरुपयोग करके जनता का पैसा लूटा गया।”
शुभेंदु अधिकारी ने डायमंड हार्बर मॉडल को टीएमसी की हार का मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि फलता की जीत लोकतंत्र की जीत है और डराने-धमकाने वाली राजनीति की हार।
फलता जीत का राजनीतिक महत्व
- बीजेपी के लिए यह जीत पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका है।
- टीएमसी के लिए यह बड़े स्तर पर असंतोष का संकेत है।
- राज्य की सत्ताधारी पार्टी पर भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के आरोप लगातार बढ़ रहे हैं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस जीत पर प्रतिक्रिया दी और इसे लोकतंत्र की जीत बताया।
यह परिणाम 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच नई लड़ाई की शुरुआत माना जा रहा है।
पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर
- पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में लगातार अपनी उपस्थिति बढ़ाई है।
- फलता जैसे क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे जैसे विकास, रोजगार और कानून व्यवस्था अब वोटरों
- की प्राथमिकता बन गए हैं। टीएमसी पर लंबे समय से हिंसा, भ्रष्टाचार और परिवारवाद के आरोप लगते रहे हैं।
- देबांग्शु पांडा की यह जीत स्थानीय स्तर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के समर्पण का नतीजा है।
- उन्होंने विकास और अच्छे शासन का वादा किया, जिसे जनता ने स्वीकार किया।
आगे क्या?
अब सवाल यह है कि टीएमसी इस हार से क्या सबक लेगी? क्या ममता बनर्जी अपनी रणनीति बदलेंगी? वहीं बीजेपी राज्य भर में इस जीत का फायदा उठाकर 2026 के चुनाव की तैयारी तेज करेगी।
फलता का परिणाम सिर्फ एक सीट की जीत नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल में बदलाव की बयार का संकेत है। जनता अब विकास चाहती है, न कि डर और गुंडागर्दी।
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