पूर्णिमा कब है? 2025 की सभी पूर्णिमा तिथियाँ और महत्व जानें

On: December 4, 2025 5:01 AM
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Purnima 2025

Purnima 2025 :पूर्णिमा कब है? यहाँ जानिए 2025 की सभी पूर्णिमा तिथियाँ, समय, पूजा का महत्व और ज्योतिषीय जाकारी। पूर्णिमा व्रत और पूजा करने वाले लोगों के लिए यह पूरी गाइड बेहद उपयोगी है।

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पूर्णिमा कब है? — 2025 में पूरी सूची, पुर्निमा व्रत तिथि, महत्व और पूजा विधि

कई लोग पूछते हैं — “पूर्णिमा कब है?” विशेष रूप से अगर वे व्रत, पूजा या स्नान-दान करना चाहते हैं। 2025 में हर महीने की पूर्णिमा तिथि एक-एक निर्धारित है। नीचे जानिए 2025 में कब-कब पूर्णिमा पड़ेगी, उनसे जुड़ा महत्व, और आप पूजन या व्रत कैसे कर सकते हैं।

2025 में पूर्णिमा तिथियाँ

2025 में हिन्दू पंचांग के अनुसार, निम्नलिखित तिथियों पर पूर्णिमा होगी —

माह / पूर्णिमातारीख (2025)
पौष पूर्णिमा13 जनवरी 2025
माघ पूर्णिमा12 फरवरी 2025
फाल्गुन पूर्णिमा14 मार्च 2025
चैत्र पूर्णिमा12 अप्रैल 2025
वैशाख पूर्णिमा12 मई 2025
ज्येष्ठ पूर्णिमा11 जून 2025
आषाढ़ पूर्णिमा10 जुलाई 2025
श्रावण पूर्णिमा09 अगस्त 2025
भाद्रपद पूर्णिमा07 सितंबर 2025
अश्विन / शरद पूर्णिमा07 अक्टूबर 2025
कार्तिक पूर्णिमा05 नवंबर 2025
मार्गशीर्ष / अगहन पूर्णिमा04 दिसंबर 2025

नोट: कुछ माहों में पंचांग (स्थान, समय अनुसार) के अनुसार तिथि बदल सकती है — इसलिए अपने स्थानीय मुहूर्त या पंचांग देखें।

पूर्णिमा का महत्व — क्यों करें पूजन / व्रत / दान

  • पूर्णिमा तिथि में चाँद पूर्ण रूप से दिखाई देता है — इसे शुद्ध और पवित्र माना जाता है।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार — इस दिन व्रत, दान, स्नान-दान, सत्यनारायण पूजा आदि करने से मन, शरीर व आत्मा को शांति मिलती है।
  • अगर किसी के चंद्र सम्बन्धी दोष हों — जैसे कि चन्द्रमा की दशा खराब हो — तो पूर्णिमा पर चंद्र पूजा और दान-दान करने से उन दोषों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
  • साथ ही, कई धार्मिक व मिथकीय कथाओं में पूर्णिमा की रात को चंद्र की किरणें शुभ और पवित्र मानी जाती हैं — जिस दिन को संयम, आत्म-चिंतन और पूजा के लिए सर्वोत्तम कहा गया है।

पूर्णिमा पर क्या करें — व्रत, पूजा, दान, स्नान

अगर आप पूर्णिमा पर व्रत/पूजा करना चाहें तो — ये बातें ध्यान रखें:

  • सुबह/शाम स्नान करें — नदी, तालाब या साफ पानी से।
  • चंद्र देव की पूजा करें — चांद की चांदनी में पूरी श्रद्धा व श्रद्धा भाव रखें।
  • दान करें — गाय, गाय के भोजन, अनाज, वस्त्र, किसी जरुरतमंद को दान करें।
  • कथा / सुहावनी व्रत कथा सुनें या सत्यनारायण पूजा करें।
  • मन को शांत रखें — चंद्रमा के प्रकाश व शांत वातावरण में ध्यान या साधना करें।

ऐसे व्रत, दान व पूजा से धार्मिक लाभ और मानसिक शांति दोनों मिलती हैं।

आपके लिए क्यों है उपयोगी ये ब्लॉग पोस्ट?

  • 2025 में पूरे साल की पूर्णिमा तिथियाँ जानने में मदद।
  • व्रत, पूजा, स्नान-दान आदि के लिए पहले से तैयारी।
  • धार्मिक कर्तव्यों और आस्था को समय पर निभाने का मार्गदर्शन।
  • पारिवारिक या सामाजिक आयोजन (दान, पूजा) की योजना बनाने में सुविधा।

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