रोहित आर्य बंधक ड्रामा : मुंबई के पॉवई इलाके में 17 बच्चों सहित 19 लोगों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्या की मांगों और मुंबई पुलिस के मुठभेड़ में उसकी मौत से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आई है। इस चीखती कहानी ने पूरे महाराष्ट्र को हिला कर रख दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि रोहित की क्या मांगें थीं, वह किस वजह से ऐसा कदम उठा पाया, और कैसे पुलिस ने इस मामले को अंजाम तक पहुंचाया।
रोहित आर्या की मांगें और योजना
#रोहित आर्या ने अपने द्वारा बंधक बनाए गए बच्चों और अन्य लोगों के नाम पर एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उसने साफ कहा कि वह कोई आतंकवादी नहीं है और न ही उसकी कोई आर्थिक मांग है। उसकी मांगें अधिकतर नैतिक और साधारण थीं, जिनका जवाब उसे चाहिए था। उसने दावा किया कि वह कुछ खास लोगों से सीधे बातचीत करना चाहता है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रोहित का बैकग्राउंड एक स्कूल स्वच्छता परियोजना से जुड़ा हुआ था, जिसके लिए उसे सरकार से करीब 2.4 करोड़ रुपये बकाया थे। उसने पूर्व शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर से बात करना चाहते थे, जिनके खिलाफ वह भूख हड़ताल भी कर चुका था। रोहित का कहना था कि उसकी कंपनी ने स्वच्छता अभियान के लिए काम किया था, लेकिन उसे उसकी मेहनताना नहीं मिली थी। इसी वजह से वह नाराज था और इस घटना को अंजाम दिया.
बंधक बनाने की घटना और सुरक्षा व्यवस्था
- रोहित ने मुंबई के पॉवई स्थित आरए स्टूडियो में 17 बच्चों को बंधक बनाया था। उसने वहां जगह-जगह
- मोशन डिटेक्टर, सीसीटीवी कैमरे और सेंटर शटर लॉक लगाए थे ताकि कोई उसकी अनुमति के बिना अंदर न आए।
- वह एयर गन, इलेक्ट्रो शॉक वेपन और सेल्फ डिफेंस स्टिक लेकर तैयार था, जिससे पता चलता है
- कि उसने ठोस तैयारी के साथ यह कांड किया था। बच्चे और बीवी व्यक्ति दो घंटे तक बंधक बनाए गए थे
- इस दौरान पुलिस ने बातचीत की कोशिश की लेकिन वह सहयोग नहीं कर पाया। पुलिस ने
- बाथरूम के रास्ते से अंदर घुसकर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला.
पुलिस मुठभेड़ और रोहित की मौत
पुलिस ने पूरी सावधानी से वारदात को खत्म करने का प्रयास किया। जब रोहित ने फायरिंग शुरू की, तब पुलिस ने जवाबी गोलीबारी की। इस मुठभेड़ में रोहित घायल हो गया, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता थी और उनकी कार्रवाई पूरी सावधानी के साथ हुई। इस हादसे के बाद कानूनी विशेषज्ञों ने मजिस्ट्रेट जांच की मांग की है ताकि पूरी घटना की निष्पक्ष जांच हो सके
रोहित की मानसिक स्थिति और वीडियो संदेश
- पुलिस की जांच और परिवार के अनुसार रोहित का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था। वीडियो में उसने बताया
- कि वह आत्महत्या के बजाय यह कदम उठा रहा है ताकि सरकार और संबंधित अधिकारियों से बात कर सके।
- उसका मकसद अपने पैसे और न्याय की मांग करना था, न कि लोगों को डराना या नुकसान पहुंचाना।
- उसने कहा कि अगर उसे उचित जवाब नहीं मिला तो वह इस
- प्रकार का कदम उठाएगा, लेकिन बच्चों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता था.
घटना के बाद की कार्रवाई
- इस वारदात के बाद सभी बच्चे सुरक्षित बनाए गए और उन्हें मेडिकल चेकअप के बाद काउंसलिंग दी गई।
- पुलिस, स्पेशल टास्क फोर्स और फॉरेंसिक टीम जांच में लगी हुई है कि रोहित ने यह कदम अकेले क्यों
- और कैसे उठाया। आरोप है कि वह अकेला नहीं था, बल्कि उसके इशारे पर कई लोग थे
- इस दिशा में भी जांच जारी है। यह वारदात पूरे मुंबई और महाराष्ट्र
- में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है.
- मुंबई के पॉवई इलाके में रोहित आर्या द्वारा 17 बच्चों को बंधक बनाकर सरकार और अधिकारियों से न्याय की मांग करना
- एक संवेदनशील और गंभीर मामला था। उसकी मांगें आर्थिक नहीं बल्कि नैतिक थीं और आरोपी मानसिक
- रूप से परेशान था। पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन कर वारदात को खत्म किया,
- जिसमें रोहित की गोलीबारी के बाद मृ्त्यु हो गई। इस घटना ने प्रशासन और समाज दोनों को सतर्क किया है
- कि ऐसे मामलों में सावधानी और तत्परता कितनी जरूरी है। जांच जारी है और पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाएगी।












