फलता में वोटिंग की धूम पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर 21 मई 2026 को दोबारा मतदान हो रहा है। मतदाताओं में भारी उत्साह दिख रहा है और लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा TMC के मजबूत नेता जहांगीर खान की गैरमौजूदगी को लेकर हो रही है। सुबह से ही उनका कहीं अता-पता नहीं है और उनके घर पर ताला लगा हुआ है।
#फलता सीट पर पहले चरण का मतदान 29 मई को हुआ था, लेकिन कुछ अनियमितताओं के चलते चुनाव आयोग ने दोबारा वोटिंग का फैसला लिया। इस बार कुल 2 लाख 36 हजार से ज्यादा मतदाता अपने वोट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें करीब 1.15 लाख महिला मतदाता शामिल हैं। पूरे क्षेत्र में 285 वोटिंग बूथ बनाए गए हैं।

#फलता में वोटिंग की धूम फलता में क्या हो रहा है?
स्थानीय लोग बता रहे हैं कि पिछले 15 सालों से जहांगीर खान के नाम का डर उनके ऊपर छाया रहा। कई मतदाताओं ने दावा किया कि पहले वे डर के मारे वोट नहीं डाल पाते थे। लेकिन इस बार माहौल पूरी तरह बदला नजर आ रहा है। मतदाता उत्सव जैसा माहौल बता रहे हैं।
TMC के बाहुबली जहांगीर खान की अनुपस्थिति
- जहांगीर खान फलता क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस के मजबूत चेहरे माने जाते थे।
- पहले उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भी किया था, लेकिन मतदान से महज दो दिन
- पहले अपना नाम वापस ले लिया। अब TMC इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतार पाई है।
न्यूज रिपोर्ट्स के अनुसार, जहांगीर खान सुबह से ही नदारद हैं। उनके घर पर ताला लगा हुआ है। इस गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। TMC की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
अब मुख्य मुकाबला BJP vs CPM
जहांगीर खान के नाम वापस लेने के बाद फलता सीट पर मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और सीपीएम (Left) के बीच हो गया है:
- बीजेपी उम्मीदवार: देबांशू पंडा
- सीपीएम उम्मीदवार: शंभूनाथ कुड़मी
- कांग्रेस उम्मीदवार: अब्दुल रज्जाक
बीजेपी उम्मीदवार देबांशू पंडा ने कहा, “माहौल बिल्कुल शानदार है। लोग खुशी-खुशी वोट डाल रहे हैं। यहां कोई समस्या नहीं है। बीजेपी डेढ़ लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज करेगी।”
15 साल के डर का अंत?
- स्थानीय मतदाताओं का कहना है कि जहांगीर खान के प्रभाव वाले इलाके में पहले वोटिंग कम होती थी।
- इस बार दोबारा मतदान के मौके पर लोग बड़ी संख्या में निकलकर आ रहे हैं।
- श्रीरामपुर पश्चिम दुर्गापुर स्कूल जैसे बूथों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
- यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत दे रही है।
- जहां एक तरफ TMC के स्थानीय बाहुबली गायब हैं, वहीं विपक्षी पार्टियां इसे अपने पक्ष में मौका मान रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषण
- फलता TMC का गढ़ माना जाता था, लेकिन उम्मीदवार न होने की वजह से पार्टी इस सीट
- पर सीधे मुकाबले से दूर नजर आ रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है
- कि अगर बीजेपी या लेफ्ट यहां अच्छा प्रदर्शन करती है तो यह 2026 बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए बड़े संकेत हो सकते हैं।
- सुवेंदु अधिकारी और अभिषेक बनर्जी जैसे नेताओं के नाम अक्सर बंगाल की खबरों में आते रहते हैं
- लेकिन इस बार फलता की खबर में जहांगीर खान की गैरमौजूदगी सबसे ज्यादा सुर्खियों में है।
क्या कहते हैं मतदाता?
- “15 साल बाद आज आजादी से वोट डाल रहे हैं।
- “डर का माहौल खत्म हो गया है।”
- “अब असली लोकतंत्र दिख रहा है।”
फलता विधानसभा सीट पर दोबारा मतदान न सिर्फ चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता का उदाहरण है, बल्कि बंगाल की ग्रामीण राजनीति में हो रहे बदलाव को भी दर्शाता है। TMC के मजबूत नेता की अनुपस्थिति और भारी मतदान प्रतिशत इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि लोग अब बदलाव चाहते हैं।
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