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गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर स्वर्ण मंदिर में नहीं होगी आतिशबाजी SGPC का सम्मानजनक फैसला छोटे साहिबजादों की शहादत को याद रखते हुए!

On: December 27, 2025 11:27 AM
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गुरु गोबिंद सिंह

गुरु गोबिंद सिंह : सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व 27 दिसंबर 2025 को पूरे विश्व में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हालांकि, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर (श्री हरमंदिर साहिब) में इस बार आतिशबाजी नहीं की जाएगी। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने यह फैसला छोटे साहिबजादों की शहादत की याद में लिया है। यह निर्णय सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करता है और गुरु साहिब की शिक्षाओं – त्याग, वीरता और संयम – को दर्शाता है। आइए जानते हैं इस खबर की पूरी डिटेल्स और इसके पीछे का कारण।

स्वर्ण मंदिर के मुख्य प्रबंधक भगवंत सिंह धंगेरा ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर आतिशबाजी न करने का निर्णय छोटे साहिबजादों (बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह) की शहादत की स्मृति में लिया गया है। छोटे साहिबजादों की शहादत का दिवस हाल ही में मनाया गया, और इस संवेदनशील समय में आतिशबाजी से परहेज करना उचित समझा गया।

गुरु गोबिंद सिंह
गुरु गोबिंद सिंह

हालांकि, प्रकाश पर्व की रौनक कम नहीं होगी। स्वर्ण मंदिर में अखंड पाठ का आयोजन होगा, जलाऊ (शानदार प्रदर्शन और सजावट) की जाएगी, और परंपरा के अनुसार पूरे गुरुद्वारा परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा। संगत गुरबानी कीर्तन, अरदास और लंगर में भाग लेकर गुरु साहिब की शिक्षाओं को याद करेगी।

  • गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व इस बार कैलेंडर विवाद के कारण चर्चा में रहा।
  • 2010 में नानकशाही कैलेंडर में संशोधन के बाद कई गुरपर्व दो बार मनाए जाने लगे
  • जिससे सिख पंथ में भ्रम और बहस पैदा हुई। पहले मूल नानकशाही कैलेंडर में सभी गुरपर्व
  • की तिथियां फिक्स थीं, और गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व हर साल जनवरी में मनाया जाता था।

हाल ही में पांच सिंह साहिबानों (सिख उच्च पुजारी) ने फैसला लिया कि प्रकाश पर्व निर्धारित तिथि पर ही मनाया जाएगा, लेकिन श्रद्धालु अपनी भावनाओं के अनुसार एक दिन पहले या बाद में भी मना सकते हैं। इस फैसले से सिख संगत को राहत मिली है। 2025 में यह पर्व 27 दिसंबर को मनाया जा रहा है, जो कुछ कैलेंडरों में अलग तिथि दिखने के कारण भी सुर्खियों में रहा।

श्री गुरु गोबिंद सिंह जी सिख धर्म के दसवें और अंतिम मानव गुरु थे। उनका जन्म 1666 में पटना (बिहार) में हुआ था। वे न केवल आध्यात्मिक नेता थे, बल्कि महान योद्धा, कवि और समाज सुधारक भी थे। गुरु साहिब ने खालसा पंथ की स्थापना की, जो सिखों को संत-सिपाही बनने की प्रेरणा देती है। उनकी प्रसिद्ध पंक्तियां – “सवा लाख से एक लड़ाऊं” – आज भी वीरता और धर्म रक्षा का प्रतीक हैं।

  • गुरु जी ने अपने चारों साहिबजादों और परिवार का बलिदान दिया, लेकिन धर्म पर अडिग रहे।
  • छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवार में चिनवा दिया गया, फिर भी उन्होंने इस्लाम कबूल नहीं किया।
  • यह त्याग की अनुपम मिसाल है। प्रकाश पर्व पर सिख संगत इन शिक्षाओं को याद करती है
  • समानता, न्याय, निर्भीकता और मानवता की सेवा।

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में प्रकाश पर्व की पूर्व संध्या पर नगर कीर्तन निकाला गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को स्वर्ण पालकी में विराजमान कर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। गुरुद्वारा परिसर को फूलों और लाइट्स से सजाया गया है। दुनिया भर के गुरुद्वारों में कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन हो रहा है।

  • यह फैसला दिखाता है कि सिख धर्म में उत्सव के साथ-साथ शहादत
  • और संयम का भी कितना महत्व है। आतिशबाजी न होने से पर्यावरण को भी फायदा होगा
  • जो गुरु साहिब की प्रकृति प्रेम की शिक्षाओं से मेल खाता है।

गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व 2025 सिख समुदाय के लिए श्रद्धा और प्रेरणा का पर्व है। SGPC का आतिशबाजी न करने का फैसला छोटे साहिबजादों की शहादत के प्रति सम्मान दर्शाता है। यह हमें सिखाता है कि खुशी मनाते हुए भी त्याग और बलिदान को नहीं भूलना चाहिए। गुरु साहिब की जयंती पर सभी को लख-लख वधाइयां! उनकी शिक्षाएं – धर्म की रक्षा, समानता और वीरता – आज के समय में भी मार्गदर्शन करती हैं।

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