थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद : थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। दिसंबर 2025 में भड़के इस संघर्ष में थाईलैंड की सेना ने विवादित क्षेत्र में हाल ही में बनी भगवान विष्णु की मूर्ति को तोड़ दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे हिंदू समुदाय में आक्रोश फैल गया। भारत सरकार ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे “अपमानजनक कृत्य” करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि ऐसे कार्य दुनिया भर के अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।
थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद विवाद की जड़ प्रीह विहार मंदिर क्षेत्र
यह विवाद मुख्य रूप से 11वीं शताब्दी के प्राचीन प्रीह विहार मंदिर (Preah Vihear Temple) को लेकर है, जो थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर स्थित है। यह मंदिर मूल रूप से हिंदू देवता शिव को समर्पित था, लेकिन बाद में बौद्ध प्रभाव से जुड़ गया। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने इसे कंबोडिया का हिस्सा घोषित किया, लेकिन आसपास का क्षेत्र अभी भी विवादित है। जुलाई 2025 में शुरू हुए सैन्य टकराव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर कराया था, लेकिन दिसंबर में फिर झड़पें हुईं। इसी दौरान विवादित इलाके में बनी विष्णु मूर्ति को थाई सेना ने ध्वस्त कर दिया।

भारत का स्पष्ट स्टैंड
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, “क्षेत्रीय दावों के बावजूद, ऐसे अपमानजनक कार्य दुनिया भर के अनुयायियों की भावनाओं को चोट पहुंचाते हैं और इन्हें नहीं होना चाहिए।” भारत ने दोनों देशों से संयम बरतने, बातचीत से विवाद सुलझाने और आगे जान-माल के नुकसान से बचने की अपील की। प्रवक्ता ने जोर दिया कि हिंदू और बौद्ध देवता दक्षिण-पूर्व एशिया की साझा सभ्यतागत विरासत का हिस्सा हैं, जिनकी पूजा पूरे क्षेत्र में की जाती है। यह मूर्ति हाल के समय में बनी थी, लेकिन इसका तोड़ा जाना सांस्कृतिक संवेदनशीलता की अनदेखी माना जा रहा है।
सांस्कृतिक विरासत पर खतरा
- दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू धर्म का गहरा प्रभाव है। अंगकोर वाट, प्रंबनन जैसे मंदिर विष्णु और शिव को समर्पित हैं।
- थाईलैंड में भी ब्रह्मा (फ्रा फ्रोम) की बड़ी मूर्तियां प्रसिद्ध हैं। ऐसे में किसी धार्मिक प्रतीक का विध्वंस न केवल
- स्थानीय विवाद बढ़ाता है, बल्कि पूरे क्षेत्र की साझा विरासत को नुकसान पहुंचाता है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा विवादों में धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना शांति प्रक्रिया को जटिल बनाता है।
- थाईलैंड और कंबोडिया से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन भारत की चिंता से दोनों
- देशों पर दबाव बढ़ेगा। उम्मीद है कि दोनों पक्ष बातचीत से समाधान निकालेंगे और सांस्कृतिक धरोहरों का सम्मान करेंगे।
- यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सीमा विवाद कितनी जल्दी धार्मिक भावनाओं से जुड़ जाते हैं।
- भारत जैसे देश, जो क्षेत्रीय शांति में रुचि रखते हैं, ऐसे मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
- यह विवाद साबित करता है कि साझा सभ्यता की विरासत को बचाने के लिए संवाद जरूरी है।
- हिंदू समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं, लेकिन शांति की अपील ही आगे का रास्ता है।












