मचान विधि से लौकी की खेती: गोंडा की महिला किसान की सफलता की कहानी

On: April 23, 2026 11:30 AM
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मचान विधि से लौकी की खेती करते हुए महिला किसान, कम लागत में अधिक उत्पादन

मचान विधि से लौकी की खेती आज किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली आधुनिक तकनीक बन चुकी है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की एक महिला किसान ने यह साबित कर दिया है कि सही तकनीक अपनाकर खेती में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। गिरिजा देवी ने पारंपरिक खेती छोड़कर मचान विधि अपनाई और आज वे कम लागत में अधिक आय अर्जित कर रही हैं।

मचान विधि से लौकी की खेती करते हुए महिला किसान, कम लागत में अधिक उत्पादन
मचान विधि से लौकी की खेती: कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने का आसान तरीका

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की एक महिला किसान ने यह साबित कर दिया है कि सही तकनीक अपनाकर खेती में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। गिरिजा देवी ने पारंपरिक खेती छोड़कर मचान विधि अपनाई और आज वे कम लागत में अधिक आय अर्जित कर रही हैं।

मचान विधि से लौकी की खेती में सफलता की कहानी

गोंडा के झंझरी ब्लॉक के मधईपुर गांव की रहने वाली गिरिजा देवी सिर्फ आठवीं पास हैं, लेकिन उनकी सोच और मेहनत ने उन्हें एक सफल किसान बना दिया है। शादी के बाद उन्होंने घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए खेती शुरू की। शुरुआत में वे जमीन पर पारंपरिक तरीके से लौकी उगाती थीं, जिसमें उन्हें नुकसान उठाना पड़ता था।

बाद में उन्होंने “मचान विधि” के बारे में सीखा और इसे अपने खेत में अपनाया। आज वे लगभग एक बीघे में इस तकनीक से खेती कर रही हैं और अच्छी कमाई कर रही हैं।

मचान विधि क्या है और कैसे काम करती है

#मचान विधि में बांस या लकड़ी की सहायता से एक ऊंचा ढांचा बनाया जाता है। इस पर जाली बिछाई जाती है, जिस पर बेल वाली फसलें चढ़ती हैं। लौकी के फल नीचे की ओर लटकते हैं, जिससे उन्हें पर्याप्त हवा और धूप मिलती है।

मचान विधि के मुख्य फायदे

#मचान विधि अपनाने से फसल की गुणवत्ता में काफी सुधार होता है। जमीन पर उगाई गई फसल में कीड़े लगने की संभावना अधिक होती है, जबकि मचान पर फसल सुरक्षित रहती है।

इस तकनीक से फसल जल्दी तैयार होती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है। साथ ही, फल साफ और बाजार में बेहतर कीमत पर बिकते हैं।

कम लागत में ज्यादा मुनाफा

गिरिजा देवी की सफलता का सबसे बड़ा कारण कम लागत में अधिक लाभ है। उन्होंने बताया कि एक बीघे में मचान तैयार करने और बीज लगाने में लगभग 1000 रुपये का खर्च आता है।

वहीं, इस तकनीक से वे एक सीजन में 30,000 से 40,000 रुपये तक की कमाई कर लेती हैं।

यह किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

जैविक खेती पर जोर

  • गिरिजा देवी अपनी फसल में रासायनिक खाद का बहुत कम उपयोग करती हैं।
  • वे गोबर और जैविक खाद का इस्तेमाल करती हैं,
  • जिससे फसल की गुणवत्ता बनी रहती है।
  • जैविक खेती से न केवल उत्पादन अच्छा होता है,
  • बल्कि बाजार में भी बेहतर कीमत मिलती है।

अन्य किसानों और महिलाओं के लिए संदेश

  • गिरिजा देवी चाहती हैं कि अन्य किसान भी इस तकनीक को अपनाएं।
  • खासकर महिलाओं को वे प्रेरित करती हैं कि वे खेती में
  • नई तकनीकों का इस्तेमाल करें और आत्मनिर्भर बनें।
  • वे बताती हैं कि मचान विधि से लौकी, करेला,
  • तरोई जैसी लता वाली फसलों की खेती आसानी से की जा सकती है
  • और इससे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

निष्कर्ष

गिरिजा देवी की कहानी यह दिखाती है कि खेती में थोड़ी समझदारी और नई तकनीक का इस्तेमाल करके

कम लागत में भी बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। मचान विधि न केवल उत्पादन बढ़ाती है,

बल्कि किसानों की आय भी बढ़ाने में मदद करती है।

यह कहानी उन सभी किसानों और खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा है,

जो खेती में कुछ नया करना चाहते हैं और आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं।

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