एनसीपी विलय पर हलचल : महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के विलय को लेकर जोरदार कयास लगाए जा रहे हैं। अजित पवार के असमय निधन (28 जनवरी 2026 को बारामती में प्लेन क्रैश में) के बाद दोनों गुटों – शरद पवार गुट (NCP-SP) और अजित पवार गुट – के बीच एकीकरण की चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब शरद पवार के पोते और करीबी रोहित पवार ने बड़ा दावा किया है कि सुनेत्रा पवार (अजित पवार की पत्नी और वर्तमान डिप्टी सीएम) 9 फरवरी 2026 के बाद विलय के मुद्दे पर बात करेंगी। रोहित ने कहा, “परिवार में अभी तक इस पर कोई बात नहीं हुई है। हम 13 दिनों की शोक अवधि के बाद इस पर चर्चा करेंगे। सुनेत्रा काकी ने डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी संभाली है, वे 9 फरवरी के बाद विलय पर बोलेंगी।”
रोहित पवार का पूरा बयान और संदर्भ
बारामती में पत्रकारों से बातचीत में रोहित पवार (करजत जामखेड़ विधायक) ने स्पष्ट किया कि अजित पवार के निधन के बाद भावनात्मक रूप से राजनीतिक फैसले लेना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “यह समय शोक का है। 9 फरवरी के बाद हम आजाद मन से सभी पहलुओं पर बात कर सकेंगे। अजित दादा की इच्छाओं को लोगों तक पहुंचाना जरूरी है।” रोहित ने यह भी कहा कि सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनने के बाद सभी एनसीपी विधायकों का समर्थन है, इसलिए विलय पर उनका बयान महत्वपूर्ण होगा।

एनसीपी विलय की पृष्ठभूमि
अजित पवार का निधन: 28 जनवरी 2026 को बारामती में चार्टर्ड प्लेन क्रैश में अजित पवार की मौत हो गई। इससे पहले कुछ दिनों में दोनों गुटों के बीच विलय की बातचीत चल रही थी। शरद पवार ने कहा था कि अजित पवार और जयंत पाटिल के बीच चर्चा हो रही थी, और 12 फरवरी को घोषणा होनी थी।
- सुनेत्रा पवार की भूमिका: निधन के तीन दिन बाद (31 जनवरी 2026) सुनेत्रा पवार
- ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। एनसीपी में उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष
- बनाने की भी चर्चा है। परिवार ने उनका समर्थन किया है।
परिवार की बैठकें: शरद पवार ने सुनेत्रा के घर जाकर श्रद्धांजलि दी। विद्या प्रतिष्ठान कार्यालय में बंद कमरे में बैठक हुई, जिसमें जय पवार, पार्थ पवार (अजित के बेटे), प्रतिभा पवार (शरद की पत्नी), श्रीनिवास पवार, राजेंद्र पवार और रोहित पवार शामिल थे। बैठक में बारामती में अजित पवार का स्मारक बनाने पर भी मंथन हुआ।
भाजपा का रुख: भाजपा ने कहा कि विलय का फैसला सुनेत्रा पवार को ही लेना होगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विलय की अफवाहों का खंडन किया, लेकिन शरद पवार ने कहा कि फडणवीस को कोई अधिकार नहीं क्योंकि वे चर्चा का हिस्सा नहीं थे।
विलय के फायदे और चुनौतियां!
- फायदे: दोनों गुटों का एकीकरण एनसीपी को मजबूत बनाएगा। महाराष्ट्र में शरद पावर
- परिवार की एकता बढ़ेगी, और जिला परिषद चुनावों में फायदा हो सकता है।
- चुनौतियां: कुछ एनसीपी नेता (जैसे सुनील तटकरे) ने कहा कि पार्टी NDA में बनी रहेगी
- विलय नहीं होगा। शरद पवार गुट और अजित गुट के बीच पुरानी रंजिशें भी हैं।
- रोहित पवार का उत्साह: रोहित विलय को लेकर सकारात्मक दिख रहे हैं, जो परिवार में एकता का संकेत है।
महाराष्ट्र राजनीति पर असर
- अजित पवार के निधन ने राज्य की सियासत को हिला दिया है। सुनेत्रा पवार की
- डिप्टी सीएम बनने से महिला सशक्तिकरण का संदेश गया है। अगर विलय होता है
- तो एनसीपी महाराष्ट्र में फिर से मजबूत ताकत बन सकती है।
- फिलहाल 9 फरवरी के बाद सुनेत्रा पवार का बयान निर्णायक होगा।
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