बर्फबारी हिमाचल 2025 : पश्चिमी विक्षोभ से उत्तर भारत में बारिश और बर्फबारी, दिल्ली-एनसीआर में शीतलहर। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड में तापमान माइनस 4-9°C। मौसम पूर्वानुमान, IMD अलर्ट और बचाव टिप्स हिंदी में। ठंड से सतर्क रहें!
दिसंबर 2025 की शुरुआत ही उत्तर भारत के लिए सर्दी का तूफान बन गई है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने मौसम का रंग पूरी तरह बदल दिया है, जिससे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश-शीतलहर का दौर चल पड़ा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों में तापमान शून्य से नीचे लुढ़क गया है, जबकि दिल्ली-एनसीआर में सर्द हवाओं ने जनजीवन को ठिठुरा दिया है। क्या है इस विक्षोभ का पूरा असर? अगले दिनों का पूर्वानुमान क्या कहता है? आइए, इस ब्लॉग में गहराई से जानते हैं – ताकि आप ठंड से बेहतर तरीके से निपट सकें।
पश्चिमी विक्षोभ क्या है और क्यों बढ़ा ठंड का सैलाब?

पश्चिमी विक्षोभ एक मौसमी घटना है, जो भूमध्य सागर से उठकर उत्तर-पश्चिम भारत पहुंचती है। यह चक्रवाती हवाओं का सिस्टम है, जो बादलों को लाता है और वर्षा या बर्फबारी का कारण बनता है। दिसंबर 2025 में एक ऐसा ही विक्षोभ उत्तर पंजाब के ऊपर 3.1-4.5 किमी ऊंचाई पर सक्रिय हो गया है, जिसने ठंड को मैदानी इलाकों तक पहुंचा दिया। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह सिस्टम चक्रवाती प्रसार के साथ जुड़ गया है, जिससे उत्तर भारत में शुष्क हवाओं की जगह ठंडी हवाओं ने ले ली। नतीजा? कई राज्यों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री नीचे। यह विक्षोभ न सिर्फ मौसम बदलता है, बल्कि कृषि, यात्रा और स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिसंबर-जनवरी में ऐसे विक्षोभ सामान्य हैं, लेकिन इस बार की तीव्रता ने सबको चौंका दिया।
प्रभावित क्षेत्र: कहां-कहां मचा हाहाकार?
यह पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले चुका है। दिल्ली-एनसीआर में सर्द हवाओं का डेरा डाल गया है न्यूनतम तापमान 6-7°C के आसपास घूम रहा है, जो सामान्य से काफी नीचे है। सुबह की कोहरे ने विजिबिलिटी कम कर दी, जिससे ट्रैफिक जाम और फ्लाइट डिले की शिकायतें बढ़ गईं। पंजाब और हरियाणा में शीतलहर ने किसानों को परेशान कर दिया – अमृतसर, लुधियाना जैसे शहरों में ठंड ने रातें काटने लायक बना दिया। उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिम हिस्सों, जैसे मेरठ और सहारनपुर, में चक्रवाती प्रभाव से हल्की बारिश हुई, जो फसलों के लिए खतरा बनी।
- पहाड़ी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मनाली में हल्की बर्फबारी शुरू हो गई है।
- ऊंचे इलाकों में सड़कें फिसलन भरी हो गईं, जिससे पर्यटन प्रभावित हुआ। उत्तराखंड के नैनीताल, मसूरी और
- ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी ने सैलानियों को घरों में कैद कर दिया। सबसे ज्यादा मार जम्मू-कश्मीर
- और लद्दाख पर पड़ी – श्रीनगर, पहलगाम, लेह जैसे इलाकों में बर्फ की चादर बिछ गई। इसके अलावा, पूर्वी राजस्थान और
- झारखंड में भी शीतलहर जारी है। कुल मिलाकर, यह विक्षोभ 10 से ज्यादा राज्यों को छू चुका है, जिससे लाखों लोग प्रभावित हैं।
तापमान में गिरावट: 0°C से नीचे का सन्नाटा
शीतलहर ने तापमान को बेइज्जत कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर का न्यूनतम तापमान माइनस 4.0°C, पहलगाम में माइनस 4.8°C, लेह में माइनस 9.0°C, कारगिल में माइनस 7.8°C और नुब्रा घाटी में माइनस 7.6°C दर्ज किया गया। हिमाचल प्रदेश में शिमला और धर्मशाला जैसे शहरों में तापमान 5°C से नीचे गिर गया, जबकि ऊंचे क्षेत्रों में फ्रीजिंग पॉइंट पार हो गया। उत्तराखंड में देहरादून का तापमान 8°C पर अटका, लेकिन पहाड़ों में माइनस 2-3°C। दिल्ली में अधिकतम 18°C और न्यूनतम 7°C रहने का अनुमान है, लेकिन हवाओं से महसूस होने वाली ठंड 4-5°C ज्यादा लग रही है। पंजाब-हरियाणा में चंडीगढ़ का तापमान 9°C, जबकि अमृतसर में 6°C। IMD के अनुसार, अगले 24 घंटों में कोई बड़ा बदलाव नहीं, लेकिन पूर्वी और मध्य भारत में 2 दिनों में और गिरावट संभव। यह गिरावट स्वास्थ्य के लिए खतरा है – कोल्ड वेव अलर्ट जारी।
मौसम पूर्वानुमान: अगले दिनों क्या होगा?
IMD के लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक, अगले 4 दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के तापमान में 3-4°C की मामूली वृद्धि हो सकती है। लेकिन 5-7 दिसंबर तक हिमाचल और उत्तराखंड के ऊपरी इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी जारी रहेगी। पंजाब, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान और झारखंड में शीतलहर बनी रहेगी। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में हल्की बर्फबारी की संभावना। दिल्ली-एनसीआर में 7-8 दिसंबर तक धुंध और ठंड बरकरार, लेकिन 9 दिसंबर से राहत मिल सकती है। एक नया विक्षोभ 8-9 दिसंबर को आ सकता है, जो फिर से बारिश ला सकता है। कुल मिलाकर, दिसंबर का पहला हफ्ता ठंडा रहेगा – सूरज की किरणें कमजोर, रातें लंबी। किसानों को फसलें बचाने की सलाह दी गई है।
यात्रा व्यवधान, स्वास्थ्य और कृषि पर असर: सावधानियां बरतें
- इस ठंड ने यात्रा को मुश्किल बना दिया – हिमाचल-उत्तराखंड में सड़कें बंद, दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट डिले। स्वास्थ्य
- के लिहाज से, सांस की बीमारियां, जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है। IMD ने ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े
- हाइड्रेशन और घर पर रहने की सलाह दी। कृषि क्षेत्र में गेहूं-सरसों की फसलें प्रभावित – पाला पड़ने का खतरा।
- कोई बड़ा अलर्ट नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी। विशेषज्ञ कहते हैं, “यह सामान्य है, लेकिन जलवायु परिवर्तन से विक्षोभ तीव्र हो रहे हैं।”
बचाव के टिप्स: ठंड से कैसे निपटें?
- गर्म कपड़े लेयर में पहनें, खासकर बच्चे-बुजुर्गों को।
- गर्म पानी, हल्दी दूध पिएं।
- घर में हीटर का ज्यादा इस्तेमाल न करें, वेंटिलेशन रखें।
- यात्रा से पहले मौसम चेक करें।
- किसान फसलों को ढकें।












