सिद्धारमैया vs शिवकुमार: कर्नाटक कांग्रेस में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद की तीव्र जंग ने पार्टी के सबसे मजबूत गढ़ को हिला दिया है। हाईकमान 29 नवंबर को फैसला लेने की तैयारी में, जबकि बीजेपी इस फूट का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है
सिद्धारमैया vs शिवकुमार: CM कुर्सी पर खींचतान चरम पर!
कर्नाटक में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच CM पद की खींचतान चरम पर पहुंच गई है। सिद्धारमैया का ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद शिवकुमार गुट हाईकमान पर दबाव बना रहा है। ओबीसी समर्थन वाले सिद्धारमैया कुर्सी नहीं छोड़ने को तैयार, जबकि वोकालिगा नेता शिवकुमार लॉबिंग तेज कर रहे हैं। कांग्रेस हाईकमान 29 नवंबर को फैसला लेगा, लेकिन अंदरूनी कलह से पार्टी कमजोर हो रही है। बीजेपी इस फूट का फायदा उठाने की तैयारी में, कर्नाटक गढ़ पर नजर।

ढाई साल फॉर्मूला विवाद: कांग्रेस में गहराता अड्डा
कर्नाटक कांग्रेस ने 2023 में चुनाव जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के पावर शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमति जताई थी। पर अब यह फॉर्मूला विवाद का केंद्र बन चुका है। शिवकुमार समर्थक हाईकमान से अपना वादा निभाने की मांग तेज कर रहे हैं,
सिद्धारमैया का पांच साल तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड तोड़ने का लक्ष्य
सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया है कि वे अपने पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए बने रहेंगे। उन्होंने 2026 का बजट भी पेश करने का संकेत दिया है, जिससे उनकी पकड़ और मजबूत होती दिख रही है।
डीके शिवकुमार की दिल्ली में विधायकों के साथ तगड़ी लॉबिंग
शिवकुमार के समर्थक लगभग 15 विधायक और विधायक मंडल दिल्ली में हाईकमान के समक्ष अपनी ताकत का प्रदर्शन कर चुके हैं। वे गुप्त डील के तहत हुए पावर शेयरिंग समझौते के कार्यान्वयन की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, वोकालिगा समुदाय और मायसूर क्षेत्र के मठों का समर्थन उनकी दावेदारी को मजबूती प्रदान करता है।
कांग्रेस हाईकमान का अंतर्द्वंद्व सुलझाने के लिए 29 नवंबर की बैठक
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 29 नवंबर को दोनों पक्षों के नेताओं की भागीदारी से एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मौजूदगी भी हो सकती है।
जातिगत समीकरणों की राजनीति: ओबीसी और वोकालिगा समुदाय के मतभेद
कांग्रेस के राजनीतिक संकट के पीछे जातिगत समीकरण भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। सिद्धारमैया के पास ओबीसी और दलित वोटर आधार मजबूत है,
बीजेपी की सियासी चाल: कांग्रेस की अंदरूनी फूट का खुलेआम फायदा
बीजेपी ने इस सत्ता संघर्ष को कांग्रेस की सबसे बड़ी
कमजोरी के रूप में भुनाने की रणनीति बनाई है।
वह कर्नाटक को कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ होने के
बावजूद इस विवाद को राजनीतिक अवसर समझती है।
सिद्धारमैया गुट की गुप्त रणनीतियाँ और बंद कमरे की बैठकों का प्रभाव
सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में अपने समर्थकों के साथ कई गुप्त बैठकें की हैं।
उन्होंने मीडिया में फैली ‘नवंबर क्रांति’ जैसी अफवाहों को सिरे से
खारिज करते हुए हाईकमान पर पूरे कार्यकाल पूरा करने का दबाव बनाया है।
डीके शिवकुमार का परिपक्व राजनीतिक रुख और हाईकमान के प्रति निष्ठा
शिवकुमार ने साफ कहा है कि वे हाईकमान के निर्णयों को अपनाएंगे
और पार्टी के खिलाफ कोई अलग रुख नहीं अपनाएंगे।
उन्होंने गांधी परिवार के समर्थन का स्वागत किया है
कर्नाटक कांग्रेस सरकार पर संकट और आगामी चुनावों में खतरा
अंदरूनी लड़ाई के कारण कर्नाटक में कांग्रेस सरकार अस्थिर हो चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह विवाद 2028 के
विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।
राष्ट्रीय राजनीतिक प्रभाव: राहुल गांधी का नेतृत्व परीक्षण
कर्नाटक संकट राहुल गांधी के नेतृत्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है।
यह राज्य कांग्रेस की सबसे मजबूत इकाई रहा है,
जहां भाजपा लगातार कमजोर पड़ती जा रही थी।
निष्कर्ष
कर्नाटक में सिद्धारमैया-शिवकुमार की CM कुर्सी पर खींचतान ने कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ को गंभीर संकट में डाल दिया है। हाईकमान की 29 नवंबर की बैठक राहुल गांधी के नेतृत्व की अग्निपरीक्षा साबित होगी, जहां ढाई साल फॉर्मूला निर्णायक बनेगा। बीजेपी इस फूट का फायदा उठाने को बेताब है, जबकि जातिगत समीकरण बिगड़ने से 2028 चुनावों पर काला बादल मंडरा रहा है। अंदरूनी कलह से सरकार अस्थिर हो चुकी है और पार्टी एकता टूटने का खतरा बढ़ गया है। कांग्रेस को तत्काल समाधान निकालना होगा वरना दक्षिण भारत का यह किला ढह सकता है।












