संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त आज गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का सही समय

On: March 17, 2026 9:09 AM
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संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त

संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त आज गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर पूजा अर्चना का शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का सही समय जानें। इस दिन व्रत की विधि, पूजा करने के सही समय, और विजयनगरी मुहूर्त की जानकारी आपके लिए यहां उपलब्ध है। भगवान गणेश की पूजा से समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का महत्व

व्रत भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत शुभ तिथि है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। विशेष रूप से अगहन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है।

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी क्या है?

संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त
#संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त

#गणाधिप संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष व्रत है। यह चतुर्थी कृष्ण पक्ष की होती है, जब भक्त गणेश जी की पूजा अर्चना कर मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। इस दिन व्रत रखने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का महत्व और इतिहास

इस पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। पुराणों के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश ने असुरों का विनाश कर देवताओं की सहायता की थी। इस कारण भक्तगण आज भी इस दिन विशेष रूप से गणेश पूजा करते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

आज का शुभ मुहूर्त सुबह से लेकर शाम तक रहेगा, विशेष रूप से चंद्रमा के उदय के बाद पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। पूजा में गणेश जी की मूर्ति या चित्र की विधिपूर्वक सेवा करें, दीपक जलाएं, फल और मिठाई अर्पित करें।

चंद्रमा निकलने का समय और पूजा का संबंध

चंद्रमा निकलने का समय पूजा और व्रत के लिए महत्वपूर्ण होता है।

इस दिन चंद्रमा उदय के तुरंत बाद संकष्टी व्रत की पूजा प्रारंभ करनी चाहिए।

चंद्र दर्शन के बाद विशेष गणेश स्तुति का पाठ किया जाता है।

गणेश पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री और भोग

पूजा में लाल फूल, दूर्वा का पत्ता, हल्दी, कुमकुम, मोदक और नैवेद्य के

रूप में मीठा फल मुख्य है। भोग लगाना भगवान गणेश को विशेष

रूप से प्रिय होता है और इससे व्रत की सफलता सुनिश्चित होती है।

संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा और मंत्र

इस दिन संकष्टी व्रत की कथा सुनना और गणेश के मंत्र का जाप करना

विशेष लाभदायक होता है। यह योग मानसिक शांति लाता है

और जीवन की सभी बाधाएं दूर करता है। मंत्र जप के दौरान मन में पूरी श्रद्धा और आस्था रखें।

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर विशेष उपाय और शुभ कार्य

इस दिन दान-पुण्य और जरूरतमंदों की मदद करना फलदायक माना जाता है।

साथ ही सकारात्मक सोच के साथ व्रत करें। संकष्टी चतुर्थी पर किए गए

उपाय पूरे महीने प्रभावी रहते हैं और जीवन में खुशहाली लाते हैं।

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