पुत्रदा एकादशी 2025 : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। हर महीने आने वाली एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख की कामना करने वाले दंपतियों के लिए वरदान स्वरूप माना जाता है। पुत्रदा एकादशी का नाम ही संकेत करता है कि यह व्रत पुत्र प्राप्ति और संतान की रक्षा के लिए फलदायी है। इस वर्ष पुत्रदा एकादशी 30 दिसंबर 2025 को मनाई जा रही है।
पुत्रदा एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी की तिथि 29 दिसंबर 2025 को सुबह लगभग 10:14 बजे शुरू होकर 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7:53 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के कारण यह व्रत 30 दिसंबर 2025, मंगलवार को रखा जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह सूर्योदय से लेकर 7:53 बजे तक विशेष रूप से फलदायी माना गया है। पारण (व्रत तोड़ने) का समय 31 दिसंबर को सुबह रहेगा।

पुत्रदा एकादशी का महत्व
शास्त्रों में पुत्रदा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। इस व्रत से जाने-अनजाने हुए पाप नष्ट हो जाते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। निसंतान दंपतियों को सुयोग्य संतान का वरदान मिलता है। जिनके संतान है, उनकी संतान की हर बाधा दूर होती है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है। नवविवाहित जोड़े इस व्रत को अवश्य रखें, क्योंकि यह संतान सुख का विशेष उपाय है।
पुत्रदा एकादशी पूजा विधि
पुत्रदा एकादशी की पूजा विधि सरल लेकिन श्रद्धापूर्ण है:
- सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। स्नान के पानी में गंगाजल और तिल मिलाना शुभ होता है।
- स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- शंख अभिषेक का विशेष विधान: भगवान विष्णु की पूजा में दक्षिणावर्ती शंख से पंचामृत या जल से अभिषेक करें। शंख बजाना भी अनिवार्य है।
- भगवान को पीले फूल, पीले फल, तुलसी दल, पंचामृत और मौसमी फल अर्पित करें।
- भगवान विष्णु के साथ बाल गोपाल (कृष्ण के बाल स्वरूप) की पूजा करें, ताकि कृष्ण जैसी सुयोग्य संतान प्राप्त हो।
- विष्णु सहस्रनाम या संतान गोपाल मंत्र का जाप करें।
- आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
- इस दिन तिल का सेवन और दान जरूर करें। जरूरतमंदों को तिल, गुड़ और गर्म कपड़े दान करने से विशेष पुण्य मिलता है।
पति-पत्नी दोनों मिलकर व्रत का संकल्प लें तो फल कई गुना बढ़ जाता है।
पुत्रदा एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में महिष्मति नगरी के राजा सुकेतुमान पुत्रहीन थे। संतान न होने से वे दुखी रहते थे। एक दिन वन में भटकते हुए वे ऋषियों के आश्रम पहुंचे। वहां पुत्रदा एकादशी का दिन था। ऋषियों ने राजा को इस व्रत की महिमा बताई और व्रत रखने की सलाह दी। राजा और रानी ने विधिपूर्वक व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। तब से पुत्रदा एकादशी का महत्व बढ़ गया। यह कथा सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
पुत्रदा एकादशी पर विशेष उपाय
- संतान प्राप्ति के लिए: भगवान विष्णु को तुलसी पत्र और पीले फल चढ़ाएं।
- संतान रक्षा के लिए: बाल गोपाल की पूजा करें।
- धन वृद्धि के लिए: तिल का दान करें।
- पाप नाश के लिए: विष्णु मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार जाप करें।
- पुत्रदा एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियम से करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- यह व्रत न केवल संतान सुख देता है बल्कि सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है।
- इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की कृपा सभी पर बनी रहे।












