पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट : 2025 में पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से लगातार झटके लग रहे हैं। हाल ही में दो अलग-अलग मामलों में कोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं – एक अवैध हिरासत का मामला और दूसरा स्थानीय निकाय चुनावों (जिला परिषद और ब्लॉक समिति) में कथित पक्षपात का। ये फैसले मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन गए हैं, क्योंकि ये प्रशासनिक निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता पर सवाल खड़े करते हैं।
स्थानीय निकाय चुनाव में पक्षपात के आरोप
पंजाब में 14 दिसंबर को हुए जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग (SEC) पर पक्षपात का आरोप लगाया। कोर्ट ने कहा कि पटियाला के एसएसपी वरुण शर्मा का एक ऑडियो क्लिप सामने आया, जिसमें वे कथित तौर पर जूनियर अफसरों को निर्देश देते सुनाई दे रहे हैं कि विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका जाए।

कोर्ट की बेंच (चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी) ने टिप्पणी की कि चुनाव आयोग को “तटस्थता बनाए रखने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए थे” और पक्षपात की धारणा को दूर करने के लिए ऑडियो-वीडियो साक्ष्यों की जांच किसी बाहरी न्यूट्रल एजेंसी से करानी चाहिए थी। कोर्ट ने एसएसपी वरुण शर्मा को चुनाव ड्यूटी से हटाने का भी आदेश दिया, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती।
यह मामला पंजाब स्थानीय निकाय चुनाव 2025 में सत्ताधारी पार्टी के कथित दुरुपयोग को उजागर करता है। कोर्ट की यह टिप्पणी AAP सरकार के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
अवैध हिरासत का मामला: राजनीतिक बदले की आशंका
दूसरे मामले में हाईकोर्ट (जस्टिस संजय वशिष्ठ) ने फिरोजपुर जिले के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की खिंचाई की। गैंगस्टर से नेता बने गुरप्रीत सिंह सेखों को जमानत मिलने के बावजूद 12 दिसंबर को जेल भेज दिया गया। कोर्ट ने कहा कि जमानत की औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद रिहाई में देरी “गंभीर और अस्वीकार्य” है।
- यह देरी कथित तौर पर राजनीतिक विवाद से जुड़ी थी – सेखों का एक सत्ताधारी पार्टी से जुड़े
- सरपंच से झगड़ा। कोर्ट ने डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस को व्यक्तिगत रूप से जमानत प्रक्रिया पूरी
- कराने का आदेश दिया और चेतावनी दी कि आगे देरी को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।
- यह अवैध हिरासत पंजाब मामला पुलिस के दुरुपयोग को दर्शाता है
- और सरकार पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के आरोपों को बल देता है।
पंजाब सरकार पर क्या असर?
- ये दोनों फैसले AAP सरकार के लिए संकट की घंटी हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्रशासनिक लापरवाही
- और पक्षपात की कोई भी धारणा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले नगर निगम और
- अन्य स्थानीय निकाय चुनावों में सरकार पर न्यायिक निगरानी बढ़ सकती है।
- विपक्षी दल जैसे कांग्रेस और अकाली दल इसे मुद्दा बना रहे हैं, जबकि AAP इसे साजिश बता रही है।
- भगवंत मान सरकार को अब निष्पक्षता साबित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे
- वरना राजनीतिक नुकसान हो सकता है। कोर्ट की ये टिप्पणियां लोकतंत्र की मजबूती दिखाती हैं
- जहां न्यायपालिका सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित कर रही है।
पंजाब में AAP सरकार कोर्ट झटका की ये घटनाएं 2025 की राजनीति को प्रभावित कर सकती हैं। चुनावी निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है।












