प्रशांत किशोर रिएक्शन : भारतीय राजनीति में चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बना चुके प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में चुनाव आयोग की ओर से भेजे गए नोटिस पर उन्होंने तीखा रिएक्शन दिया है। प्रशांत किशोर ने कहा है कि अब इस नोटिस का कोई मतलब नहीं बचा है, क्योंकि जनता सब देख और समझ रही है। उनका यह बयान तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
चुनाव आयोग का नोटिस क्यों मिला!
सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने प्रशांत किशोर को उनके हाल के सार्वजनिक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर नोटिस भेजा है। आयोग का कहना था कि उनके कुछ बयानों में आचार संहिता के उल्लंघन की संभावना दिखी है। यह नोटिस आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में दिया गया है, जहां प्रशांत किशोर की सक्रियता और उनके संगठन ‘जनसुराज अभियान’ के कार्यों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

चुनाव आयोग ने उनसे लिखित जवाब मांगते हुए कहा था कि वे अपने बयानों पर सफाई दें और बताएं कि उन्होंने किस आधार पर यह बातें कही थीं। इसी नोटिस के जवाब में प्रशांत किशोर ने मीडिया के सामने खुलकर अपनी बात रखी।
प्रशांत किशोर का तीखा जवाब
- प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा — “चुनाव आयोग को जो करना है
- करे, जनता सबकुछ देख रही है। अब इस तरह के नोटिस का कोई मतलब नहीं बचा है।
- ” उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि देश
- की राजनीति में आज जनमत की महत्ता सबसे ऊपर है। अगर जनता बदलाव चाहती है
- तो कोई नोटिस या डर उस आवाज को नहीं दबा सकता।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को टारगेट करना नहीं, बल्कि जनता की सच्ची आवाज बनना है। जनसुराज अभियान के माध्यम से वे लोगों तक सच्ची जानकारी पहुंचा रहे हैं, ताकि लोकतंत्र और मजबूत बने।
जनसुराज अभियान और जनता से जुड़ाव
- प्रशांत किशोर का जनसुराज अभियान बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में काफी सक्रिय है।
- वे लगातार जनता के बीच जाकर संवाद कर रहे हैं और राज्य की समस्याओं को उठाते हैं।
- उनका मानना है कि सत्ता परिवर्तन से ज्यादा जरूरी है राजनीति में सोच और सिस्टम का परिवर्तन।
2025 के विधानसभा चुनावों से पहले जनसुराज अभियान को लेकर लोगों में उत्साह दिख रहा है। प्रशांत किशोर कहीं भी चुनाव लड़ने की बात से इनकार करते हैं, लेकिन राजनीति के मैदान में उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा
- प्रशांत किशोर का यह रिएक्शन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।
- ट्विटर (X) और फेसबुक पर लोग उनके समर्थन और आलोचना में लगातार अपनी राय दे रहे हैं।
- कई यूजर्स ने लिखा कि “प्रशांत किशोर की बातों में दम है, अब सिस्टम को बदलने का वक्त आ गया है।
- वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि उन्हें सरकारी नियमों का पालन करना चाहिए, क्योंकि आचार संहिता सभी के लिए समान है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
- प्रशांत किशोर के इस बयान पर अलग-अलग राजनीतिक दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है।
- सत्तारूढ़ पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा कि “कानून सबके लिए बराबर है
- चाहे वो प्रशांत किशोर हों या कोई और।” विपक्षी दलों ने कहा कि
- चुनाव आयोग को निष्पक्ष रहकर काम करना चाहिए
- लेकिन लोगों की आवाज को दबाने का प्रयास नहीं होना चाहिए।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या चुनाव प्रक्रिया के दौरान नेताओं और नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगानी ठीक है या नहीं।
लोकतंत्र में जनता की भूमिका
- प्रशांत किशोर का बयान इस बात को स्पष्ट करता है कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी शक्ति है।
- उनका कहना है कि “अगर जनता जागरूक होगी, तो कोई ताकत उसे गुमराह नहीं कर सकती।
- उनकी यह लाइन लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है
- कि आखिर लोकतंत्र में असली जिम्मेदारी किसकी है — नेताओं की या जनता की?
- चुनाव आयोग के नोटिस पर प्रशांत किशोर का तीखा जवाब आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
- उन्होंने एक बार फिर यह साबित किया है कि वे सिर्फ रणनीतिकार नहीं, बल्कि जनभावनाओं की सच्ची आवाज हैं।
- अगला चुनावी दौर उनके लिए और भी चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन उनके समर्थन में बढ़ती जनता की लहर यह संकेत दे
- रही है कि उनका जनसुराज अभियान आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है।












