लखनऊ विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश अब साल में दो बार UGC NET JRF को छूट, नॉन-JRF को भी फेलोशिप संभव

On: January 23, 2026 12:41 PM
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लखनऊ विश्वविद्यालय

लखनऊ विश्वविद्यालय : पीएचडी करने वाले छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी! लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) ने UGC की नई गाइडलाइंस को अपनाते हुए पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब विश्वविद्यालय में साल में दो बार पीएचडी एंट्रेंस परीक्षा होगी, जैसे IITs में होता है। इससे खाली सीटें भरना आसान होगा और छात्रों को ज्यादा मौके मिलेंगे। कुलपति प्रोफेसर जे.पी. सैनी ने कहा, “विवि का पूरा फोकस रिसर्च को बढ़ावा देने का है। इसके लिए जो भी जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता होगी, वह उठाए जाएंगे।”

यह बदलाव शोध अध्यादेश में जल्द लागू होगा। आइए जानते हैं पूरी डिटेल्स, छूट के नियम, फेलोशिप और 2026 के लिए क्या मतलब है।

पीएचडी एंट्रेंस परीक्षा कब और कितनी बार होगी?

  • साल में दो बार प्रवेश प्रक्रिया: पहला फेज अप्रैल में और दूसरा फेज नवंबर में।
  • उद्देश्य: साल भर खाली रहने वाली पीएचडी सीटों को भरना।
  • इससे छात्रों को साल में दो मौके मिलेंगे, जिससे इंतजार कम होगा और रिसर्च जल्दी शुरू हो सकेगी।
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UGC NET JRF पास उम्मीदवारों को छूट

UGC की नई नियमावली के अनुसार:

  • UGC NET JRF (या टीचर फेलोशिप) क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों को लिखित प्रवेश परीक्षा से छूट मिलेगी।
  • उन्हें सिर्फ इंटरव्यू देना होगा।
  • NET, JRF, GATE जैसे क्वालिफाइड उम्मीदवारों के लिए कुल सीटों का 60% हिस्सा विश्वविद्यालय एंट्रेंस या इंटरव्यू से भरा जाएगा, जबकि 40% अन्य तरीकों से।
  • इससे JRF वाले छात्रों को आसानी से एडमिशन मिलेगा और फेलोशिप भी जारी रहेगी।

नॉन-JRF उम्मीदवारों के लिए फेलोशिप संभव

  • LU नॉन-JRF (जिन्होंने JRF नहीं क्वालिफाई किया) छात्रों के लिए भी फेलोशिप शुरू करने की योजना बना रहा है।
  • रिसर्च को आसान बनाने के लिए:
    • संबद्ध कॉलेजों में रिसर्च सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
    • जरूरत के अनुसार लैब इक्विपमेंट उपलब्ध कराए जाएंगे।
    • पीएचडी स्कॉलर्स को यूनिवर्सिटी लैब और मशीनों का इस्तेमाल करने की अनुमति।
    • कॉलेजों में रिसर्च सुविधाओं की निगरानी के लिए कमिटी बनेगी।
    • पास के जिलों के साथ सुविधाएं शेयर की जाएंगी।
  • यह कदम उन छात्रों के लिए राहत है जो JRF नहीं पाते, लेकिन रिसर्च करना चाहते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण बदलाव

  • दिल्ली यूनिवर्सिटी के रिसर्च सुपरविजन मॉडल को अपनाया जाएगा, जिससे कॉलेज टीचर्स भी गाइड कर सकेंगे।
  • विशेष परिस्थितियों में फैकल्टी मेंबर के तहत पीएचडी सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
  • उत्कृष्ट छात्रों के लिए थीसिस सबमिशन की समयसीमा 2.5 साल तक कम की जा सकती है।
  • कुल मिलाकर, LU रिसर्च को प्रमोट करने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है।

पीएचडी aspirants के लिए 2026 में क्या करें?

  • अगर आप UGC NET JRF क्वालिफाई कर चुके हैं, तो लिखित एग्जाम से छूट मिलेगी – सिर्फ इंटरव्यू पर फोकस करें।
  • नॉन-JRF वाले छात्र भी अब फेलोशिप की उम्मीद कर सकते हैं।
  • अप्रैल और नवंबर के फेज में एप्लाई करने की तैयारी रखें।
  • LU की ऑफिशियल वेबसाइट (lkouniv.ac.in) पर PhD Notices 2026 चेक करें।
  • रिसर्च इंटरेस्ट, प्रपोजल और इंटरव्यू की तैयारी मजबूत रखें।

यह बदलाव पीएचडी को ज्यादा सुलभ और सपोर्टिव बनाएगा। लखनऊ यूनिवर्सिटी अब रिसर्च हब बनने की राह पर है। अगर आप पीएचडी करना चाहते हैं, तो यह सबसे अच्छा समय है!

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