पतंजलि विज्ञापन रोक: बाबा रामदेव की पतंजलि को बड़ा झटका 3 दिन में रोकें विज्ञापन, धोखे का था बवाल

On: November 11, 2025 11:20 AM
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पतंजलि विज्ञापन रोक

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पतंजलि विज्ञापन रोक दिल्ली हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के च्यवनप्राश विज्ञापन पर तीन दिन में रोक लगाई है, जिसमें अन्य ब्रांडों को ‘धोखा’ बताने का आरोप था। अदालत ने इसे व्यावसायिक बदनामी माना और 72 घंटे में सभी माध्यमों से विज्ञापन हटाने का आदेश दिया है।

पतंजलि विज्ञापन रोक डाबर की याचिका पर न्यायालय का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर इंडिया लिमिटेड की याचिका पर बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद के च्यवनप्राश विज्ञापन को तीन दिन के भीतर सभी माध्यमों से हटाने का आदेश दिया है। डाबर ने इस विज्ञापन को अपमानजनक और अनुचित बताते हुए आरोप लगाया कि इसमें अन्य सभी च्यवनप्राश ब्रांडों को ‘धोखा’ कहा गया, जिससे पूरे उद्योग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पतंजलि का यह विज्ञापन उपभोक्ताओं को भ्रमित करता है और प्रतिस्पर्धी ब्रांडों को नुकसान पहुंचाता है।

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला पतंजलि के खिलाफ

पतंजलि विज्ञापन रोक
#पतंजलि विज्ञापन रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के च्यवनप्राश विज्ञापन पर तीन दिन के भीतर प्रसारण बंद करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि विज्ञापन में अन्य सभी च्यवनप्राश ब्रांडों को ‘धोखा’ बताना व्यावसायिक बदनामी और अपमान है। कोर्ट ने सोशल मीडिया, ओटीटी, टीवी समेत सभी माध्यमों पर विज्ञापन हटाने का निर्देश दिया है।​

डाबर इंडिया की याचिका और उसके आरोप

डाबर इंडिया ने इस याचिका में कहा कि पतंजलि का विज्ञापन पूरे च्यवनप्राश उद्योग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है। विज्ञापन में बाबा रामदेव ने लोगों को चेतावनी दी कि च्यवनप्राश के नाम पर वे ठगे जा रहे हैं, जो कि पूरे उद्योग को बदनाम करने वाला संदेश है। डाबर ने इसे अनुचित और भ्रामक बताया।​

पतंजलि का जवाब और कोर्ट की प्रतिक्रिया

पतंजलि ने कहा कि ‘धोखा’ शब्द रचनात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा है और उनके विज्ञापन को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण मिला हुआ है। लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा विज्ञापन उपभोक्ताओं को भ्रमित करता है और प्रतिस्पर्धी ब्रांडों को नुकसान पहुंचाता है। कोर्ट ने भविष्य में ऐसे विज्ञापन न करने का कड़ा आदेश दिया।​

तीन दिन में विज्ञापन हटाने का आदेश और इसका प्रभाव

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पतंजलि को 72 घंटे के भीतर विज्ञापन सभी राष्ट्रीय टीवी चैनल, ओटीटी प्लेटफॉर्म,

सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया से हटाना या ब्लॉक करना होगा।

इसका उल्लंघन करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।

यह फैसला विज्ञापन उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मक व्यावसायिक

आचार संहिता के लिए अहम माना जा रहा है।​

विज्ञापन विवाद में सामाजिक और कानूनी पहलू

यह विवाद दिखाता है कि कैसे कंपनियां अपने उत्पादों को प्रमोट करते हुए

प्रतिस्पर्धी ब्रांडों को नुकसान नहीं पहुंचा सकतीं। कोर्ट ने इसे वाणिज्यिक

भाषण के अधिकार से परे एक अनुचित और अपमानजनक कदम माना।

इस प्रकार के विवाद उपभोक्ताओं के हित में फैसले और नीतियों को मजबूती देते हैं।​

बाबा रामदेव और पतंजलि का ब्रांड प्रभाव

बाबा रामदेव और पतंजलि ने भारतीय आयुर्वेदिक उद्योग में नई ऊंचाइयां छुई हैं,

लेकिन इस विवाद से उनके ब्रांड की छवि प्रभावित हो सकती है।

कंपनी को भविष्य में विज्ञापन सामग्री पर अधिक सावधानी बरतनी होगी,

जिससे विवाद और कानूनी बाधाएं न आएं।​

उपभोक्ता विश्वास और भविष्य की रणनीतियाँ

इस फैसले का मकसद उपभोक्ताओं में भ्रम और गलतफहमी को कम करना है।

प्रतिस्पर्धात्मक और नैतिक विज्ञापन प्रथाओं को बढ़ावा देकर भारतीय

बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बल मिलेगा। पतंजलि सहित सभी

कंपनियों को अपने संदेशों को सकारात्मक और तथ्यपरक बनाए रखना होगा।​

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