20 नवंबर 2025 का पंचांग : 20 नवंबर 2025, गुरुवार का दिन मार्गशीर्ष अमावस्या के रूप में मनाया जा रहा है। इस दिन का पंचांग हिन्दू धर्मानुसार महत्वपूर्ण होता है, जिसमें तिथि, नक्षत्र, योग, करण के साथ-साथ शुभ-अशुभ मुहूर्त निर्धारित होते हैं। इस ब्लॉग में 20 नवंबर 2025 के पंचांग के मुख्य अंगों की जानकारी, राहु काल का समय और दिन को सफल बनाने के कुछ विशेष टिप्स साझा किए गए हैं।
आज की तिथि और वार
20 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि है, जो दोपहर 12:16 बजे तक रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। यह गुरुवार का दिन है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा पाठ करने और शुभ कार्यों की शुरुआत करने का शुभ अवसर माना जाता है।

नक्षत्र, योग और करण
आज का नक्षत्र विशाखा है, जो सुबह 10:51 बजे तक रहेगा, इसके बाद अनुराधा नक्षत्र प्रारंभ होगा। दिन का योग शोभन है, जो सुबह 9:50 बजे तक रहेगा। इसके बाद अतिगण्ड योग रहेगा। करण की बात करें तो नाग करण दोपहर 12:16 बजे तक है, इसके बाद किंस्तुघ्न और बाद में बव क्रमशः रहेगा। ये पंचांग के पांच अंग होते हैं, जो आचरण और धार्मिक क्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
20 नवंबर को सूर्योदय सुबह 6:47 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5:25 बजे होगा। इसके अलावा चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा। चंद्रास्त समय शाम 5:31 बजे है। ये समय आध्यात्मिक और धार्मिक क्रियाओं के लिए अहम होते हैं।
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:53 से 5:45 तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:53 से 2:35 तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:26 से 5:52 तक
- अमृत काल: रात 2:15 से 4:03 तक (21 नवंबर)
इन मुहूर्तों में किए गए कार्य विशेष फलदायक होते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में जागरण या साधना करने से दैहिक और मानसिक शांति मिलती है। विजय मुहूर्त में नया काम शुरू करना लाभकारी होता है।
राहु काल का समय
राहु काल 1:26 बजे से 2:46 बजे तक रहेगा। हिन्दू ज्योतिष में राहु काल को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस समय में कोई महत्वपूर्ण कार्य या निर्णय करने से बचना चाहिए। यदि राहु काल में यात्रा या पूजा करनी पड़े, तो विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
अशुभ समय
- यमगण्ड: सुबह 6:51 से 8:10 तक
- गुलिक काल: 9:29 से 10:47 तक
- राहु काल: दोपहर 1:26 से 2:46 तक
- इन समयों में नए कार्यों की शुरुआत करना वर्जित समझा जाता है।
- यदि इन घड़ी में पूजा या अनुष्ठान हो रहे हैं तो विशेष मंत्रों द्वारा अशुभ प्रभाव कम किया जा सकता है।
खास टिप्स और सुझाव
- आज मार्गशीर्ष अमावस्या होने के कारण पितरों की तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करना शुभ होता है। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
- गुरुवार होने के कारण भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें। तुलसी, पीला चंदन, हल्दी, पंचामृत, अक्षत, और पीले फूल अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम और चालीसा पढ़ना लाभदायक रहेगा।
- गुड़, चने की दाल, पीले वस्त्र, बेसन आदि दान करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और सफल कार्यों की प्राप्ति होती है।
- अमृत काल और विजय मुहूर्त में कोई भी शुभ कार्य अवश्य करवाएं।
- राहु काल में सावधानी रखें और आवश्यक काम के अलावा अन्य कार्य टालें।
पंचांग के महत्व पर सारांश
- पंचांग हिन्दू धर्म में समय की गणना एवं शुभ-अशुभ योगों को जानने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
- यह हमारे जीवन में उचित समय पर कार्य करने की सुविधा देता है जिससे सफलता और समृद्धि बढ़ती है।
- आज का पंचांग भी हमें सही दिशा दिखाता है कि कब और कैसे कर्म करना चाहिए।












