CJI रिटायरमेंट बयान : भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) डॉ. धनंजय यादव चंद्रचूड़ ने नवंबर 2024 में अपने दो साल के सक्रिय और विवादास्पद कार्यकाल के बाद सुप्रीम कोर्ट से विदाई ली। इस खूबसूरती से संपन्न हुए कार्यकाल की शुरुआत से लेकर अंत तक न्यायिक सुधारों, संवैधानिक मामलों, और सामाजिक न्याय की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसलों के चलते चर्चा में रहा। विदाई के मौके पर उनके भावुक और चिंतनपूर्ण शब्दों ने यह दर्शाया कि जिम्मेदारी केवल एक पद तक सीमित नहीं थी, बल्कि न्यायपालिका के पूरे सिस्टम की अधूरी डगर पर उन्होंने गंभीर ध्यान दिया।
#CJI DY Chandrachud का कार्यकाल: बदलाव और चुनौतियां
डॉ. चंद्रचूड़ ने 9 नवंबर 2022 को CJI पद संभाला और 10 नवंबर 2024 तक इस उच्चतम न्यायालय की सेवा की। उनके कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐतिहासिक फैसले दिए, जैसे अयोध्या भूमि विवाद का फैसला, जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे का रद्दीकरण, समलैंगिक संबंधों का अपराधमुक्तिकरण, और मतदान में राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए चुनावी बांड योजना को रद्द करना। ऐसे फैसलों ने भारतीय न्यायपालिका की सामाजिक और संवैधानिक प्रतिबद्धता को नया आयाम दिया।

विदाई के वक्त की भावुकता और सिस्टम की अधूरी डगर
अपने आखिरी दिन, CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायपालिका केवल एक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि एक पूरे सिस्टम की अधूरी डगर में सुधार की ज़रूरत है। उन्होंने इसके लिए न्यायपालिका के पारदर्शिता, जवाबदेही, और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने यह स्वीकार किया कि न्यायपालिका को सुधार की निरंतर प्रक्रिया में रहना होगा ताकि जनहित की रक्षा हो सके। विदाई समारोह में उन्होंने कहा कि “कोर्ट का काम केवल न्याय देना नहीं, बल्कि सिस्टम में सुधार कर न्याय को सुगम बनाना भी है।”
न्यायपालिका में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार
DY Chandrachud ने अपने कार्यकाल के दौरान तकनीकी उन्नयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने ई-फाइलिंग सिस्टम, पेपरलेस कोर्ट, व्हाट्सएप नोटिफिकेशन के जरिए लंबित मामलों की सूचना देने जैसे प्रणालियों को लागू करके न्याय प्रक्रिया को तेजी से पारदर्शी और सुलभ बनाया। इसके अलावा, न्यायाचार्य नियुक्ति प्रक्रिया के सुधार में उनकी भूमिका भी उल्लेखनीय रही, क्योंकि उनके नेतृत्व में 33 सिटिंग जजों में से 17 की नियुक्ति हुई, जो न्यायपालिका की क्षमता बढ़ाने वाली पहल थी।
विवाद और आलोचना के बीच न्याय का संतुलन
चंद्रचूड़ के कार्यकाल में आलोचनाएं भी आईं, खासतौर पर सामजिक विवादों और राजनीतिक मामलों में उनके फैसलों को लेकर। परंतु उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान की रक्षा को सर्वोपरि रखा। अपने विदाई संबोधन में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाना और उसके सतत स्वतंत्रता की रक्षा करना हर न्यायाधीश की जिम्मेदारी है।
उनके जाने के बाद की चुनौतियां
CJI DY Chandrachud के बाद जस्टिस संजीव खन्ना आएंगे, जिन्हें आने वाले छह महीनों में शीर्ष न्यायाधीश के रूप में आचरण करना है। चंद्रचूड़ ने एक मजबूत सिस्टम का आधार रखा है, लेकिन न्यायपालिका को अभी भी लंबित मामलों की भारी मात्रा, न्याय तक पहुँच की समस्याएं, और न्यायिक सुधारों की निरंतरता बनाए रखने जैसी चुनौतियों का सामना करना है। उनकी विदाई सिस्टम की अधूरी डगर की तरह न्यायपालिका को नए सिरे से सोचने का अवसर भी है।
CJI DY Chandrachud का कार्यकाल भारत के न्यायपालिका इतिहास में एक संकल्पित सुधार, सामजिक न्याय, और संवैधानिक संरक्षण के लिए याद रखा जाएगा। उनकी विदाई सिर्फ एक पद छोड़ने की घटना नहीं, बल्कि न्यायपालिका के सिस्टम में सुधार की अधूरी यात्रा पर ध्यानाकर्षण था। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की जिम्मेदारी केवल मामलों के निर्णय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की मजबूती और बेहतरता के लिए सतत प्रयासों की जरूरत है।






