Nominal Account के पूरे Notes सरल भाषा में, उदाहरणों के साथ दिए जा रहे हैं — परीक्षा उपयोगी, शॉर्ट और क्लियर 👇
Nominal Account (नाममात्र खाता)
Nominal Accounts ऐसे खाते होते हैं जो खर्चों (Expenses), नुकसानों (Losses), आय (Incomes) और लाभ (Gains) को रिकॉर्ड करते हैं।
इनका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता और ये हर वित्तीय वर्ष के अंत में बंद (Close) हो जाते हैं।
Types of Nominal Accounts (नाममात्र खातों के प्रकार)
Nominal Account को 4 भागों में बाँटा जाता है:
- Expenses (खर्चे)
- Rent
- Salary
- Electricity Bill
- Stationery
- Losses (नुकसान)
- Loss by Fire
- Bad Debts
- Stock Loss
- Incomes (आय)
- Commission Received
- Rent Received
- Interest Received
- Gains (लाभ)
- Profit on Sale of Asset
- Discount Received
Golden Rule for Nominal Accounts
“Debit all Expenses & Losses, Credit all Incomes & Gains”
(सभी खर्चे और नुकसान को Debit करें,
सभी आय और लाभ को Credit करें)
Examples (उदाहरण)
1. Salary Paid (तनख्वाह दी गई) – Expense
Rule: Expense → Debit
Entry:
Salary A/c Dr.
To Cash A/c
2. Rent Received (किराया प्राप्त हुआ) – Income
Rule: Income → Credit
Entry:
Cash A/c Dr.
To Rent Received A/c
3. Bad Debts (खराब ऋण) – Loss
Bad Debts A/c Dr.
To Debtor’s A/c
4. Discount Received – Gain
Supplier A/c Dr.
To Discount Received A/c
Key Characteristics of Nominal Accounts
✔ इनका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता
✔ ये केवल आय, खर्च, लाभ और नुकसान से संबंधित होते हैं
✔ हर accounting year के अंत में Trading & Profit & Loss Account में ट्रांसफर हो जाते हैं
✔ साल के अंत में इनका balance Zero हो जाता है
✔ इन्हें लगातार अगले साल carry forward नहीं किया जाता
Summary (सारांश)
- Nominal Accounts = Expenses + Losses + Incomes + Gains
- Rule: Debit all Expenses & Losses, Credit all Incomes & Gains
- Examples: Salary, Rent Paid, Commission Received, Discount Received
- यह खाते वर्ष के अंत में बंद हो जाते हैं और P&L A/c में जाते हैं
Nominal Account को एक इंटरस्टिंग कहानी के माध्यम से समझाया गया है, जिसे याद रखना बहुत आसान हो जाएगा 👇
⭐ Nominal Account Story – “Rohan ki Shop ka Saal Bhar ka Hisab”
एक बार की बात है, Rohan नाम का एक लड़का अपनी छोटी-सी General Store चलाता था।
उसकी दुकान में रोज़ कुछ न कुछ खर्च, आय, नुकसान और लाभ होते थे।
लेकिन साल के आखिर में उसका अकाउंटेंट बोला:
“Rohan! जो चीज़ें साल भर होती हैं जैसे खर्चे, आय, नुकसान और लाभ — ये सब Nominal Account में जाते हैं।”
और बस कहानी शुरू…👇
1️⃣ Expenses (खर्चे) – Debit
रोज़ Rohan अपनी दुकान चलाने के लिए कई खर्च करता था:
- सुबह दुकान खोलते ही Electricity Bill भरता
- कर्मचारियों को Salary देता
- दुकान की Rent चुकाता
अकाउंटेंट बोला:
“जो भी खर्च होगा उसे Debit कर देंगे, क्योंकि पैसा जा रहा है।”
📌 Example scene:
Rohan ने Salary दी → Salary A/c Debit
2️⃣ Losses (नुकसान) – Debit
एक दिन बारिश में दुकान की छत टपकने लगी और कुछ सामान खराब हो गया।
Rohan घबरा गया:
“अरे! मेरा सामान खराब हो गया… ये कैसे लिखेंगे?”
अकाउंटेंट मुस्कुराया:
“चिंता मत कर, नुकसान भी Debit होते हैं।”
📌 Example scene:
सामान खराब → Loss by Damage A/c Debit
3️⃣ Incomes (आय) – Credit
कभी-कभी Rohan अपने स्टोर के ऊपर वाले कमरे को किराए पर देता था।
हर महीने उसे Rent Received होता था।
अकाउंटेंट ने कहा:
“जब भी पैसा आएगा या आय होगी, उसे Credit कर देंगे।”
📌 Example scene:
Rent Received → Rent Received A/c Credit
4️⃣ Gains (लाभ) – Credit
एक बार Rohan ने अपनी पुरानी अलमारी बेच दी।
सोचा था ₹2,000 मिलेगी लेकिन मिल गए ₹3,000!
यानी ₹1,000 का फायदा।
अकाउंटेंट बोला:
“लाभ भी आय की तरह Credit होते हैं।”
📌 Example scene:
Profit on Sale → Gain A/c Credit
⭐ अब Rohan ने Golden Rule सीख लिया
रात को Rohan बोला:
“तो Nominal Account में क्या होता है?”
अकाउंटेंट ने सरल सा नियम बताया:
**Golden Rule:
✔ Expenses & Losses → Debit
✔ Incomes & Gains → Credit**
Rohan हँसते हुए बोला:
“बस इतनी सी बात थी? यह तो आसान है!”
🎯 साल के आख़िर में क्या होता है?
अकाउंटेंट:
“ये सारे Nominal Accounts —
खर्च, नुकसान, आय, लाभ —
सब Profit & Loss Account में ट्रांसफर हो जाते हैं।”
यानी ये अगले साल Carry Forward नहीं होते।
नया साल = नए Nominal Accounts!
✔ Summary (कहानी से निकला सार)
- Rohan के स्टोर पर जो भी खर्च, आय, नुकसान और लाभ होते थे = Nominal Account
- खर्च और नुकसान → Debit
- आय और लाभ → Credit
- साल के अंत में सभी Nominal Accounts बंद हो जाते हैं






