नई दिल्ली 18 दिसंबर : 2025 संसद के शीतकालीन सत्र में आज एक बार फिर हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने VB-G RAM G बिल के खिलाफ संसद परिसर में विरोध मार्च निकाला और सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारी सांसदों ने महात्मा गांधी की तस्वीरें उठाईं और ‘महात्मा गांधी NREGA’ लिखे बैनर के साथ नारे लगाए। यह विरोध महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को बदलने वाले नए बिल के खिलाफ था, जिसे विपक्ष गांधी जी का अपमान और MGNREGA के प्रावधानों को कमजोर करने वाला बता रहा है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना संसद में बहस के दौरान हुई, जहां विपक्ष ने सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया।
नई दिल्ली 18 दिसंबर विरोध मार्च की मुख्य घटनाएं!
विपक्षी सांसदों का मार्च प्रेरणा स्थल पर स्थित गांधी प्रतिमा से शुरू हुआ और मकर द्वार तक पहुंचा। सांसदों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और बिल को तुरंत वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK, IUML, शिवसेना (UBT) और RSP जैसे दलों के सांसद शामिल थे। मार्च के दौरान सांसदों ने MGNREGA को गांधी जी की विरासत बताया और कहा कि बिल से इसका नाम हटाना राष्ट्रपिता का अपमान है। संसद परिसर में यह विरोध शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इससे सत्र की कार्यवाही प्रभावित हुई।

प्रमुख नेता और उनकी भूमिका
इस विरोध में कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हुए:
- प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस सांसद): उन्होंने मार्च की अगुवाई की और MGNREGA को ग्रामीण भारत की जीवनरेखा बताया।
- अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी सांसद): उन्होंने बिल को ग्रामीण रोजगार पर हमला करार दिया।
- टी.आर. बालू (DMK सांसद): दक्षिण भारत के ग्रामीण मुद्दों पर जोर दिया।
- मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस अध्यक्ष): संसद में बहस के दौरान बिल की आलोचना की।
- के.सी. वेणुगोपाल (AICC महासचिव): उन्होंने कहा, “आज संसद में लोकतंत्र की हत्या हो रही है। महात्मा गांधी का नाम NREGA से हटाकर सरकार राष्ट्रपिता की विचारधारा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मारने की कोशिश कर रही है।”
- अन्य नेता: DMK की के. कनिमोझी, टी.आर. बालू, ए. राजा; IUML के ई.टी. मोहम्मद बशीर; शिवसेना (UBT) के अरविंद सावंत; RSP के एन.के. प्रेमचंद्रन।
- वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी भी मकर द्वार पर प्रदर्शन में शामिल हुईं।
यह विरोध INDIA गठबंधन की एकजुटता दिखाता है, जहां विभिन्न दलों ने एक मंच पर आकर सरकार को घेरा।
VB-G RAM G बिल क्या है और क्यों विवाद?
- VB-G RAM G बिल का पूरा नाम विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड अजीविका मिशन
- (ग्रामीण) है। यह केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया बिल है, जो UPA सरकार के
- दौर के MGNREGA को रिप्लेस करने का प्रयास है। बिल के मुख्य प्रावधान:
- ग्रामीण परिवारों को सालाना 125 दिनों की मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी।
- असकुशल मैनुअल काम करने वाले वयस्क सदस्यों को लाभ।
- बिल लागू होने के छह महीने के अंदर राज्य सरकारों को नए कानून के अनुरूप स्कीम बनानी होगी।
विपक्ष का आरोप है कि यह बिल MGNREGA के मूल प्रावधानों को कमजोर करता है और महात्मा गांधी का नाम हटाकर उनकी विरासत का अपमान है। MGNREGA 2005 में लागू हुआ था, जो ग्रामीण भारत में रोजगार और विकास का बड़ा स्रोत बना। विपक्ष का कहना है कि नया बिल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा और गरीबों के अधिकारों को छीनेगा। सरकार का दावा है कि यह बिल विकास को बढ़ावा देगा, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक चाल बता रहा है।
राजनीतिक संदर्भ और प्रभाव
यह विरोध संसद के शीतकालीन सत्र में हो रहा है, जहां पहले से ही कई मुद्दों पर हंगामा चल रहा है। विपक्ष ने बिल को लोकसभा में पेश होने पर भी विरोध किया था। इससे सत्र की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा 2024 लोकसभा चुनावों के बाद की राजनीति को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि MGNREGA ग्रामीण वोट बैंक से जुड़ा है। विपक्ष इसे गांधी जी की विचारधारा पर हमला बता कर भावनात्मक अपील कर रहा है।
- यह घटना भारतीय राजनीति में विपक्ष की एकजुटता और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाती है।
- यदि बिल पास होता है, तो ग्रामीण रोजगार नीति में बड़ा बदलाव आएगा।
- विपक्ष ने आगे भी विरोध जारी रखने का ऐलान किया है।
द हिंदू की इस रिपोर्ट से साफ है कि VB-G RAM G बिल राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। ग्रामीण भारत के लिए यह महत्वपूर्ण मुद्दा है, जहां रोजगार गारंटी लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़ी है। संसद में ऐसे विरोध लोकतंत्र की जीवंतता दिखाते हैं।












