मुरशिदाबाद बाबरी मस्जिद विवाद : पश्चिम बंगाल का मुरशिदाबाद जिला आज हाई अलर्ट पर है, जहां सस्पेंडेड तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं बरसी पर बाबरी मस्जिद शैली की नई मस्जिद की नींव रखने पर अड़ा हुआ है। यह आयोजन बेलडांगा क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग 12 (NH-12) के पास हो रहा है, जहां कबीर ने दावा किया है कि 3 लाख लोग इकट्ठा होंगे। TMC ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया है, लेकिन कबीर अपनी योजना से पीछे हटने को तैयार नहीं। प्रशासन ने भारी सुरक्षा बल तैनात किया है, RAF टीमें पहुंची हैं और कलकत्ता हाईकोर्ट ने सार्वजनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य पर डाल दी है। यह मुरशिदाबाद बाबरी मस्जिद विवाद न सिर्फ स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ा रहा है, बल्कि पूरे बंगाल की सांप्रदायिक सद्भाव पर सवाल खड़े कर रहा है। आइए, इस संवेदनशील घटना की पूरी डिटेल जानते हैं।
हुमायूं कबीर का बैकग्राउंड विद्रोही विधायक की राजनीतिक यात्रा
हुमायूं कबीर भरतपुर विधानसभा सीट से 2021 में TMC के टिकट पर विधायक बने थे। पहले वे कांग्रेस और BJP में रह चुके हैं, लेकिन TMC में शामिल होने के बाद लगातार पार्टी लाइन से बगावत करते रहे। जुलाई 2025 में निलंबन के बाद गुरुवार को उन्हें पूरी तरह सस्पेंड कर दिया गया। कारण? ‘सांप्रदायिक राजनीति’ को बढ़ावा देने वाले बयान। कबीर ने विधायक पद छोड़कर अपना अलग दल बनाने की घोषणा की है।

अब, 6 दिसंबर को वे ‘बाबरी मस्जिद मॉडल’ वाली नई मस्जिद का शिलान्यास कर रहे हैं। उनका कहना है, “यह अयोध्या की बाबरी मस्जिद की याद में बनेगी। तीन लाख लोग इकट्ठा होंगे। जो रोक सके, रोक ले।” यह दावा न सिर्फ राजनीतिक स्टंट लगता है, बल्कि 1992 के बाबरी विध्वंस की संवेदनशील तारीख पर उकसावे का प्रयास भी। कबीर ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर कहा, “मैं अयोध्या गया था, रामलला दर्शन किए। अब बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करूंगा।”
आयोजन का शेड्यूल: सुबह से शाम तक का प्लान
आयोजन सुबह 10 बजे कुरान तिलावत से शुरू होगा। दोपहर में नींव रखी जाएगी, उसके बाद सामुदायिक भोजन (शाही बिरयानी) वितरित होगा। शाम 4 बजे तक लोग छटेंगे। वेन्यू paddy fields पर NH-12 से थोड़ा दूर है – 150 फीट लंबा और 80 फीट चौड़ा मंच, 400 मेहमानों के लिए सीटिंग। सऊदी अरब से दो क्लेरिक स्पेशल कन्वॉय में कोलकाता एयरपोर्ट से पहुंचे हैं। कैटरिंग में 7 लोकल एजेंसियां लगी हैं – 40,000 पैकेट मेहमानों के लिए और 20,000 स्थानीय निवासियों के लिए। कुल खर्च: 70 लाख रुपये, जिसमें भोजन पर ही 30 लाख। 3,000 स्वयंसेवक (2,000 शुक्रवार से ही काम पर) पहुंच मार्ग नियंत्रित कर रहे हैं।
प्रशासन की सख्ती: RAF, पुलिस ग्रिड और कोर्ट का फैसला
- प्रशासन ने बेलडांगा, रानीनगर और NH-12 के सभी रास्तों पर सुरक्षा ग्रिड बिछा दिया है।
- 5 दिसंबर को RAF टीमें रेजीनगर पहुंचीं और लोकल स्कूल में कैंप कर रही हैं। करीब 3,000 पुलिसकर्मी तैनात हैं
- ट्रैफिक डायवर्शन प्लान तैयार। कलकत्ता हाईकोर्ट ने आयोजन रोकने की याचिका खारिज कर दी
- लेकिन राज्य सरकार को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का आदेश दिया। रात में बैकचैनल बातचीत हुई
- लेकिन कबीर ने मंच और भोजन का निरीक्षण जारी रखा।
राज्य सरकार ने 6 दिसंबर को छुट्टी घोषित की है। TMC ‘सम्हति दिवस’ (एकता दिवस) के रूप में रैलियां कर रही है, जबकि वाम मोर्चा इसे ‘ब्लैक डे’ मना रहा है। राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने अपील की, “नागरिक उत्तेजक बयानों और अफवाहों से दूर रहें। राज्य सरकार सुनिश्चित करे कि कहीं कोई व्यवधान न हो।”
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: TMC से दूरी, BJP का तुष्टीकरण आरोप
- TMC: कबीर को ‘सांप्रदायिक राजनीति’ के लिए सस्पेंड किया। प्रवक्ता ने कहा, “यह उनका निजी स्टंट है। बंगाल में सद्भाव बरकरार रखेंगे।”
- BJP: इसे ‘वोट बैंक सियासत’ बताया। दिलीप घोष बोले, “तुष्टीकरण की हद हो गई। 6 दिसंबर का दिन जानबूझकर चुना गया।”
- वाम मोर्चा और कांग्रेस: ‘खतरनाक खेल’ करार दिया, ममता सरकार से सख्ती की मांग।
- CPI(M): बाबरी विध्वंस की याद में विरोध मार्च निकालेगा।
यह विवाद बंगाल की सियासत में फॉल्टलाइन उजागर कर रहा है, जहां प्रतीकवाद और भीड़ जुटाना चुनावी गणना का हिस्सा बन जाता है।
निहितार्थ: सांप्रदायिक सद्भाव पर खतरा या नियंत्रित प्रदर्शन?
- मुरशिदाबाद पहले से संवेदनशील जिला है, जहां 2023-24 में छोटे तनाव देखे गए। यह आयोजन अवज्ञा
- विश्वास और राजनीति का मिश्रण है। विशेषज्ञ कहते हैं, अगर 3 लाख लोग इकट्ठा हुए
- तो सुरक्षा की बैंडविड्थ टेस्ट होगी। TMC के लिए जोखिम – एक तरफ मुस्लिम वोट बैंक, दूसरी
- तरफ हिंदू भावनाएं। साइबर सेल भड़काऊ पोस्ट ट्रैक कर रही है।
- कुल मिलाकर, यह घटना बंगाल को 1992 जैसे दाग से बचाने की परीक्षा है।
शांति ही जीतेगी, लेकिन सतर्कता जरूरी
- हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद प्लान बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
- फिलहाल, प्रशासन की सख्ती से स्थिति काबू में है, लेकिन एक चिंगारी पूरे राज्य में आग लगा सकती है।
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