मुरशिदाबाद हाई अलर्ट : पश्चिम बंगाल का मुरशिदाबाद जिला इन दिनों तनाव की चपेट में है। बर्खास्त तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद शिलान्यास करने का ऐलान कर रखा है, जिसके बाद पूरा इलाका हाई अलर्ट पर है। प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी है, भारी पुलिस बल तैनात है, ड्रोन से निगरानी हो रही है और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) भी मौजूद है। तृणमूल कांग्रेस ने पहले ही हुमायूं कबीर को पार्टी से निकाल दिया है, लेकिन वो अपनी योजना से पीछे हटने को तैयार नहीं। इस विवाद ने पूरे राज्य में सांप्रदायिक तनाव की आशंका पैदा कर दी है। आइए, इस मुरशिदाबाद बाबरी मस्जिद विवाद की पूरी कहानी समझते हैं।
हुमायूं कबीर कौन हैं और क्यों कर रहे हैं यह दांव?
हुमायूं कबीर मुरशिदाबाद की भरतपुर विधानसभा सीट से 2021 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे। लेकिन पार्टी लाइन से बार-बार बगावत करने के कारण जुलाई 2025 में उन्हें निलंबित कर दिया गया और फिर बर्खास्त भी कर दिया गया। इसके बाद वो लगातार सुर्खियों में हैं। 26 नवंबर को अयोध्या में राम मंदिर दर्शन करने गए, फिर 6 दिसंबर को मुरशिदाबाद के रेजिनगर में “बाबरी मस्जिद” की नींव रखने का ऐलान किया। उनका दावा है कि यह मस्जिद अयोध्या की बाबरी मस्जिद की याद में बनाई जाएगी और इसका नाम भी “बाबरी मस्जिद” ही होगा।

हुमायूं कबीर ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर कहा, “मैं अयोध्या गया था, रामलला के दर्शन किए। अब 6 दिसंबर को मैं बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करूंगा। जो रोक सके, रोक ले।” इस बयान के बाद बंगाल की सियासत में भूचाल आ गया।
प्रशासन की सख्ती: धारा 144, ड्रोन, RAF तैनात
मुरशिदाबाद जिला प्रशासन कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है। रेजिनगर, बेलडांगा, हरिहरपारा इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। 5 या उससे ज्यादा लोगों के एकत्र होने पर पूरी तरह पाबंदी है। भारी पुलिस बल के साथ-स RAF की टुकड़ियां भी तैनात हैं। ड्रोन से लगातार निगरानी की जा रही है। SP मुरशिदाबाद ने साफ कहा, “कानून-व्यवस्था किसी भी कीमत पर बनी रहेगी। कोई उकसावे की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
राजनीतिक पार्टियों का स्टैंड
- तृणमूल कांग्रेस: पार्टी ने हुमायूं कबीर से पूरी तरह किनारा कर लिया है। TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, “यह उनका निजी स्टंट है। बंगाल में सांप्रदायिक सद्भाव किसी को खराब करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”
- BJP: पश्चिम बंगाल BJP ने इसे “वोट बैंक की सियासत” करार दिया है। दिलीप घोष ने कहा, “तुष्टीकरण की हद हो गई। 6 दिसंबर का दिन जानबूझकर चुना गया है ताकि भावनाएं भड़कें।”
- CPI(M) और कांग्रेस: दोनों ने इसे “खतरनाक खेल” बताया है और ममता सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
6 दिसंबर का ऐतिहासिक महत्व और संवेदनशीलता
- 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी। यह दिन देश के लिए बेहद संवेदनशील है।
- ठीक उसी तारीख को मुरशिदाबाद में “बाबरी मस्जिद” का शिलान्यास करने की जिद साफ तौर पर उकसावे
- की कार्रवाई मानी जा रही है। कई कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ नाम रखने से भी धारा 153A
- (धर्म के आधार पर दुश्मनी फैलाना) के तहत कार्रवाई हो सकती है।
क्या वाकई शिलान्यास होगा?
ताजा अपडेट्स के अनुसार हुमायूं कबीर अपने घर में ही “प्रतीकात्मक शिलान्यास” करने की बात कह रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास निजी जमीन है और वो सिर्फ एक पत्थर रखेंगे। लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बिना अनुमति कोई भी कार्यक्रम नहीं होगा। उनकी गाड़ी को पहले ही रोक दिया गया है और घर के बाहर भारी पुलिस बल मौजूद है।
बंगाल में सांप्रदायिक सद्भाव पर खतरा?
- मुरशिदाबाद पहले से ही सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जिला माना जाता है।
- 2023-24 में भी यहां छोटे-मोटे तनाव देखे गए थे। विशेषज्ञों का कहना है
- कि इस तरह का स्टंट पूरे राज्य में चिंगारी भड़का सकता है।
- सोशल मीडिया पर भी दोनों तरफ से भड़काऊ पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिसे साइबर सेल ट्रैक कर रहा है।
बंगाल को फिर से सांप्रदायिक आग में न झोंचने की कोशिश?
- हुमायूं कबीर की यह जिद चाहे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा हो या सियासी स्टंट, इसका नतीजा पूरे
- बंगाल को भुगतना पड़ सकता है। प्रशासन की सख्ती से फिलहाल स्थिति काबू में दिख रही है
- लेकिन एक गलत कदम पूरे राज्य को अशांति की आग में धकेल सकता है।
- बंगाल की जनता यही उम्मीद कर रही है कि 6 दिसंबर 2025 शांति से गुजर जाए
- और “ममता की बंगाल” में फिर से 1992 जैसे दाग न लगें।












