बिहार चुनाव सुरक्षा : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान करीब है, जो 11 नवंबर को होगा। इस महत्वपूर्ण चरण के मतदान से पहले सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है। खासकर भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में जहां से नक्सली गतिविधियों और किसी भी अवैध हस्तक्षेप की आशंका बनी रहती है, वहां सुरक्षा के उच्च स्तर के इंतजाम किए गए हैं। इसी संदर्भ में चंपारण से किशनगंज तक भारत-नेपाल सीमा को मतदान से 48 घंटे पहले पूरी तरह सील कर दिया गया है।
700 किलोमीटर से ज्यादा सीमा सील
मतदान से ठीक पहले 700 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान सीमा पार से किसी भी तरह की आवागमन को रोक दिया गया है, ताकि चुनावी प्रक्रिया को सभी दृष्टिकोण से शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाया जा सके। बिहार के बथनाहा, रक्सौल, मधुबनी, सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण और पूर्वी चंपारण जिलों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। इन जिलों की भारत-नेपाल सीमाओं पर एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

केंद्रीय बलों की तैनाती
संपूर्ण सीमा क्षेत्र में सुरक्षा के लिए 1500 से अधिक केंद्रीय बल की कंपनियां तैनात की गई हैं। इसके साथ ही राज्य पुलिस बल की अतिरिक्त टुकड़ियां प्रत्येक जिले में भेजी गई हैं ताकि हर मतदान केंद्र पर शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित हो सके। बीएसएफ और पुलिस मिलकर गश्ती और जांच अभियान चला रही हैं, जो सीमा क्षेत्र में लगातार सतर्कता बनाए रखती हैं। सीमाई इलाकों में कुल मिलाकर लगभग 450 चौकियां बनाई गई हैं, जहां पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
मतदान का परिदृश्य और सुरक्षा चुनौतियां
- बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा।
- इस चरण के अंतर्गत कुल 3 करोड़ 70 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
- मतदान के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
- इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए सभी सरकारी एजेंसियां और केंद्र व राज्य की सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।
सीमा क्षेत्र में निर्णयों के प्रभाव
- भारत-नेपाल सीमा सील करने से सीमावर्ती बाजारों में सन्नाटा पसर गया है। कुछ भारतीय और
- नेपाली नागरिक सीमा सील होने के कारण फंसे हुए हैं, जिन्हें मतदान के समय आधार कार्ड और
- मतदाता पहचान पत्र दिखाने पर सीमा पार करने की अनुमति दी जाएगी।
- एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को इस दौरान छूट दी गई है।
सुरक्षा के उद्देश्य और प्रशासनिक कदम
- सीमा सील करने का कदम चुनावी शांति और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है
- ताकि बाहरी दखलंदाजी या अवैध गतिविधि को रोका जा सके। इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों से
- भी अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी
- भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय अधिकारियों को दें।
- जिला प्रशासन, पुलिस, एसएसबी और बीएसएफ की संयुक्त टीमें लगातार सीमा क्षेत्र में गश्त पर हैं
- और चुनावी व्यवस्था को लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। इस दौरान विशेष ध्यान नाकेबंदी
- और जांच पर लगाया गया है, जिससे किसी भी तरह की संदिग्ध हालात को तुरंत रोका जा सके।
इस तरह के कड़े सुरक्षा उपाय बिहार चुनाव की निष्पक्षता और लोकतंत्र के सशक्त होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चुनाव के दौरान केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों का समन्वय शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।










