Meta IRS international tax dispute : अमेरिकी टैक्स अथॉरिटी आईआरएस (Internal Revenue Service) ने मेटा प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी) पर बड़ा हमला बोला है। आईआरएस ने 2010 में मेटा द्वारा आयरलैंड में किए गए इंटरनेशनल टैक्स अरेंजमेंट को चुनौती देते हुए 16 बिलियन डॉलर (लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये) का बैक टैक्स क्लेम किया है। यह विवाद दस साल पुराना है, लेकिन आईआरएस ने अब एक नई कानूनी रणनीति अपनाई है, जिससे मेटा को बड़ा झटका लग सकता है।
Meta IRS international tax dispute विवाद की शुरुआत और पुरानी व्यवस्था
2010 में मेटा (तब फेसबुक) ने अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) जैसे पेटेंट्स और ब्रांड वैल्यू को आयरलैंड की सब्सिडियरी में ट्रांसफर किया था। इस डील से कंपनी ने यूएस के बाहर के प्रॉफिट को कम टैक्स वाले आयरलैंड में शिफ्ट कर दिया। 2017 से पहले यूएस में कॉर्पोरेट टैक्स रेट 35% था, जबकि आयरलैंड में सिर्फ 12.5% या उससे कम। इससे मेटा ने तनहा अरबों डॉलर का टैक्स बचाया।

2020 में मेटा ने यह आयरिश अरेंजमेंट खत्म कर दिया, लेकिन 2017-2019 के सालों के लिए आईआरएस ने अब पीरियोडिक एडजस्टमेंट्स की नई थ्योरी अपनाई है। यह 1986 के टैक्स कोड की एक धारा पर आधारित है, जो कहती है कि इंटेन्जिबल ट्रांसफर से होने वाली कमाई “कमेनसुरेट विद इनकम” होनी चाहिए। मतलब, 2010 के बाद मेटा की ग्रोथ को देखते हुए प्रॉफिट को रिव्यू किया जाए।
आईआरएस की नई रणनीति और मेटा की प्रतिक्रिया
आईआरएस ने पहले ट्रांसफर को “मोमेंट-इन-टाइम” बेसिस पर देखा था, लेकिन अब पोस्ट-2010 परफॉर्मेंस को बैकडेट करके टैक्स क्लेम कर रहा है। यह रणनीति पहली बार मेटा पर टेस्ट की जा रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आईआरएस जीत गया, तो अन्य कंपनियां जैसे कोका-कोला, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट भी प्रभावित हो सकती हैं। एक एक्सपर्ट ने अनुमान लगाया कि ऐसी कंपनियां कुल 1 ट्रिलियन डॉलर तक टैक्स दे सकती हैं।
मेटा ने दिसंबर 2025 में यूएस टैक्स कोर्ट में आईआरएस के खिलाफ मुकदमा दायर किया। कंपनी ने क्लेम को “अर्बिट्ररी, कैप्रिशियस या अनरीजनेबल” बताया है। मेटा का कहना है कि पिछली टैक्स कोर्ट केस (मई 2025 में स्प्लिट डिसीजन) से यह मुद्दा पहले ही सुलझ चुका है।
पिछली लड़ाई और स्प्लिट डिसीजन
- यह मेटा का तीसरा टैक्स कोर्ट केस है। 2016 से चले पहले केस में मई 2025 में स्प्लिट डिसीजन आया
- आईआरएस कुछ पॉइंट्स जीता, मेटा कुछ। दूसरा केस पेंडिंग है।
- आईआरएस ने ट्रंप प्रशासन से पहले एक लीगल मेमो जारी किया था, जिसमें पीरियोडिक एडजस्टमेंट्स का इशारा था।
एक्सपर्ट माइकल मैकडॉनल्ड (पूर्व ट्रेजरी ऑफिशियल) ने कहा, “यह प्रावधान कभी लागू नहीं हुआ क्योंकि यह बहुत अजीब है… अनिश्चितता बहुत थी।” वहीं स्टीफन कर्टिस ने कहा, “यह एक स्नोबॉल है जो नीचे लुढ़क रही है और बढ़ती जा रही है।”
ग्लोबल इम्पैक्ट और भविष्य
- 2017 के टैक्स कट्स के बाद यूएस रेट 21% हो गया, जिससे रेट आर्बिट्रेज कम हुआ।
- लेकिन यह विवाद दिखाता है कि मल्टीनेशनल कंपनियां कैसे प्रॉफिट शिफ्ट करती हैं।
- अगर आईआरएस जीता, तो कई कंपनियों पर बड़ा असर पड़ेगा।
- मेटा के लिए यह लंबी कानूनी लड़ाई है, जो सालों चल सकती है। कंपनी का कहना है
- कि वह सभी टैक्स नियमों का पालन करती है। अगर आप टेक इंडस्ट्री या टैक्स
- न्यूज फॉलो करते हैं, तो यह केस गेम-चेंजर हो सकता है।












