ममता बनर्जी कोर्ट विवाद ममता बनर्जी वकील ड्रेस विवाद 2026 15 मई 2026 को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी कलकत्ता हाईकोर्ट में वकीलों वाली काली कोट और सफेद बैंड वाली ड्रेस पहनकर पहुंचीं। इससे सियासी और कानूनी गलियारों में तूफान खड़ा हो गया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने तुरंत उनके वकालत लाइसेंस की जांच के आदेश दे दिए। क्या ममता बनर्जी के पास वैध प्रैक्टिस लाइसेंस है? पढ़िए पूरा मामला विस्तार से।

ममता बनर्जी कोर्ट विवाद क्या है पूरा विवाद?
14 मई 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट में 2026 विधानसभा चुनाव के बाद कथित हिंसा पर दायर PIL की सुनवाई थी। इस याचिका को TMC नेता कल्याण बनर्जी के बेटे वकील सिरसन्या बनर्जी ने दायर किया था। ममता बनर्जी चीफ जस्टिस एचसी सुजॉय पॉल की बेंच के सामने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की मांग करते हुए पेश हुईं।
उन्होंने पूरी वकीली ड्रेस (ब्लैक कोट + व्हाइट बैंड) पहनी थी और कोर्ट में दलीलें दीं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में RG Kar मामले में वे सामान्य साड़ी में गई थीं। इसी अंतर ने विवाद को हवा दी।
BCI चेयरमैन का तीखा बयान
#BCI चेयरमैन और BJP सांसद मनन कुमार मिश्रा ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा: “मुझे नहीं पता कि उनके पास लाइसेंस है भी या नहीं। ऐसे बहुत से फर्जी लोग घूमते रहते हैं। हम इसकी पुष्टि कर रहे हैं।”
BCI ने 14 मई को पश्चिम बंगाल स्टेट बार काउंसिल को पत्र लिखकर 2 दिन (16 मई तक) में ममता बनर्जी की पूरी जानकारी मांगी है।
#BCI ने क्या-क्या जानकारी मांगी?
- उनका एनरोलमेंट नंबर और पंजीकरण की तारीख
- क्या उनका नाम अभी भी सक्रिय वकीलों की लिस्ट में है?
- 2011 से 2026 तक मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रैक्टिस सस्पेंड या छोड़ी थी या नहीं?
#BCI के नियमों के मुताबिक वकीलों की ड्रेस कोड सख्त है। लंबे समय तक संवैधानिक पद पर रहने वाले व्यक्ति की प्रैक्टिस स्थिति जांचना जरूरी माना गया है।
ममता बनर्जी की कानूनी पृष्ठभूमि
- ममता बनर्जी ने जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज, कोलकाता से LLB की डिग्री ली है।
- उन्होंने जोगमाया देवी कॉलेज से BA (इतिहास), कलकत्ता यूनिवर्सिटी से MA
- (इस्लामिक इतिहास) और B.Ed भी किया है। 2018 में उन्हें मानद D.Litt की उपाधि भी मिली।
- वे पहले भी कई महत्वपूर्ण मामलों में कोर्ट पहुंच चुकी हैं, लेकिन वकील की ड्रेस में पेश होना इस बार चर्चा का विषय बना।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और असर
- TMC का कहना है कि यह ममता का कानूनी अधिकार है। वे पार्टी कार्यकर्ताओं की रक्षा के लिए कोर्ट गईं।
- BJP और विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया। कुछ ने पूछा- “चुनाव हारने के बाद अदालत में शरण?”
- कलकत्ता हाईकोर्ट से निकलते समय ममता पर “चोर-चोर” के नारे लगे, जिससे वे भावुक भी हो गईं।
यह घटना 2026 बंगाल चुनाव के बाद TMC की मुश्किलों को और बढ़ा रही है।
वकीलों के ड्रेस कोड और नियम क्या कहते हैं?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम स्पष्ट हैं:
- हाईकोर्ट में काला कोट, सफेद बैंड, सफेद शर्ट जरूरी।
- ड्रेस का उल्लंघन प्रोफेशनल मिसकंडक्ट माना जा सकता है।
- लंबे समय तक प्रैक्टिस न करने वाले वकीलों को रिन्यूअल या नोटिस देना पड़ता है।
BCI की इस कार्रवाई को कई कानून विशेषज्ञ “सही कदम” बता रहे हैं, क्योंकि फर्जी वकीलों की समस्या देशभर में बढ़ रही है।
आगे क्या हो सकता है?
- अगर लाइसेंस सही पाया गया तो मामला शांत हो जाएगा।
- अगर कोई गड़बड़ी निकली तो BCI कार्रवाई कर सकता है।
- यह घटना वकील पेशे की गरिमा और राजनीतिज्ञों के कोर्ट में रोल पर नई बहस छेड़ सकती है।
- ममता बनर्जी की इस उपस्थिति ने सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी।
- कुछ यूजर्स इसे “कानूनी जागरूकता” बता रहे हैं तो कुछ “ड्रामा” कह रहे हैं।
ममता बनर्जी का वकील ड्रेस पहनकर कोर्ट जाना एक आम घटना नहीं है। यह राजनीति, कानून और व्यक्तिगत अधिकारों का अनोखा मिश्रण है। BCI की जांच का नतीजा आने तक यह विवाद गर्म रहने वाला है। क्या आपको लगता है कि पूर्व मुख्यमंत्री को वकील की ड्रेस पहनने का अधिकार है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।








