पोस्टर वॉर JDU RJD बिहार चुनाव 2025 की काउंटिंग से पहले पटना में JDU और RJD के बीच पोस्टर वार तेज, जहां नीतीश कुमार के समर्थन में ‘टाइगर अभी जिंदा है’ और तेजस्वी यादव के पक्ष में ‘अलविदा चाचा’ की पोस्टर बजी। पूरी सियासी कहानी पढ़ें।
पोस्टर वॉर JDU RJD: पटना में पोस्टर वार: ‘टाइगर अभी जिंदा है’ से ‘अलविदा चाचा’ तक बिहार की सियासत

बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है, जहां जनसभा और प्रचार सामग्री की जगह अब पोस्टर वार ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। मुख्य मुकाबला JDU और RJD के बीच है, जहां पटना में JDU ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पक्ष में “टाइगर अभी जिंदा है” का बड़ा पोस्टर लगाया है, तो वहीं RJD ने तेजस्वी यादव की तस्वीर के साथ “अलविदा चाचा” पोस्टर के जरिए पलटवार किया है। इस ब्लॉग पोस्ट में इस पोस्टर वार की पृष्ठभूमि, सियासी संदेश और चुनावी माहौल पर इसका प्रभाव विस्तार से समझाया गया है।
सियासत की गरमाहट: पोस्टर वार का ताजा दौर
14 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना से ठीक पहले पटना में पोस्टर वार की शुरुआत हुई है। JDU ने अपने कार्यालय के बाहर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुस्कुराती तस्वीर के साथ “टाइगर अभी जिंदा है” का पोस्टर लगाकर मजबूत और आत्मविश्वास से भरा संदेश दिया है। यह पोस्टर चुनाव में JDU और उसके गठबंधन की जीत की उम्मीद और नीतीश कुमार की सक्रियता को दर्शाता है।
इसके जवाब में RJD ने तेजस्वी यादव की तस्वीर के साथ “अलविदा चाचा” वाला पोस्टर लगाया है, जो मुख्य रूप से नीतीश कुमार के लिए निकाला गया तंज है। इसका मतलब है कि RJD महागठबंधन जीत के साथ सत्ता में आने का दावा कर रहा है और नीतीश कुमार के शासन को खत्म करने की तैयारी में है। समाजवादी पार्टी के पूर्व बिहार प्रदेश यूथ अध्यक्ष धर्मवीर यादव के नेतृत्व में लगाया गया यह पोस्टर राजनीतिक सियासी तनाव को और बढ़ा रहा है।
राजनीतिक दलों के संदेश और दावे
जदयू प्रमुख नीतीश कुमार के “टाइगर अभी जिंदा है” पोस्टर का मतलब साफ है कि पार्टी चुनाव परिणाम चाहे जो भी हों, नीतीश कुमार खुद सक्रिय और मजबूत हैं। यह पोस्टर उनके नेतृत्व और विकास कार्यों को जनता के सामने सकारात्मक रूप में दिखाने की कोशिश है।
वहीं दूसरी तरफ RJD का “अलविदा चाचा” पोस्टर सत्ता परिवर्तन की उम्मीद को दर्शाता है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन यह दिखाना चाहता है कि इस बार बिहार की जनता ने बदलाव का मन बना लिया है और पुराने राजनीतिक चेहरों को विदाई देने का समय आ गया है।
चुनावी परिणामों से पहले एग्जिट पोल और जनता की स्थिति
एग्जिट पोल्स में एनडीए को बढ़त मिलती दिख रही है, जिससे जदयू खेमे में उत्साह और आत्मविश्वास का माहौल बना है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी जनता को स्थिरता और अच्छे शासन के लिए मतदान करने की बात कही है। वहीं, विपक्षी दलों के नेता एग्जिट पोल को नकारते हुए महागठबंधन की जीत का दावा कर रहे हैं।
- मतगणना के दिन राजनीतिक पार्टियों के बीच इस तरह का पोस्टर वार महज प्रचार नहीं,
- बल्कि जनता के मनोबल और वोटर्स को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा है।
- पटना की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक इन पोस्टरों ने सियासी तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है।
पोस्टर वार का प्रभाव और भविष्य
- राजनीतिक पोस्टरों के जरिए एक दूसरे पर तंज कसने और संदेश देने की
- परंपरा भारतीय चुनावों में पुरानी है,
- लेकिन यहां बिहार की इस पोस्टर वार ने चुनावी लड़ाई को नया रंग दिया है।
- यह संघर्ष केवल तस्वीरों और नारे तक सीमित नहीं रहा,
- बल्कि नेताओं के बयानों और सोशल मीडिया बहसों में भी इसका असर देखने को मिला है।
- यह पोस्टर वार दिखाता है कि बिहार की जनता के सामने इस
- चुनाव से पहले कई सवाल हैं—क्या नीतीश कुमार की सरकार फिर बनेगी?
- क्या तेजस्वी यादव की महागठबंधन सत्ता में आएगी?
- और क्या सत्ता परिवर्तन के साथ बिहार में वाकई नयी ऊर्जा और विकास का दौर शुरू होगा?
निष्कर्ष
- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की काउंटिंग से पहले पटना में
- “टाइगर अभी जिंदा है” बनाम “अलविदा चाचा” का पोस्टर वार
- चुनावी राजनीति की ज्वलंत तस्वीर पेश करता है। JDU और RJD के बीच यह
- पोस्टर युद्ध सिर्फ राजनीतिक जंग नहीं, बल्कि बिहार की जनता के बीच भावनाओं,
- उम्मीदों और चुनौतियों की लड़ाई है।
- अब सबकी नजरें 14 नवंबर को मतगणना के नतीजों पर टिकी हैं
- कि कौन जीतता है और किसकी दहाड़ियों के बीच बिहार की राजनीति आगे बढ़ती है।
यह पोस्टर वार बिहार की सियासी भावना की जागरूकता और राजनीतिक रणनीति का साफ़ उदाहरण है, जो आगामी दिनों में भी जनता और नेताओं के बीच चर्चा का विषय बना रहेगा।






