भारत ने फिर रचा इतिहास : भारत की विदेश नीति और व्यापार कूटनीति में एक और बड़ा मील का पत्थर जुड़ गया है। 5 फरवरी 2026 को भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की औपचारिक बातचीत शुरू करने के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर हस्ताक्षर कर लिए। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी पुष्टि की और इसे दोनों पक्षों के लिए लाभकारी बताया। यह समझौता वस्तुओं, सेवाओं के आदान-प्रदान और निवेश को नई गति देगा।
GCC में कौन-कौन से देश शामिल हैं!
GCC में कुल 6 खाड़ी देश शामिल हैं:
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- सऊदी अरब
- कतर
- कुवैत
- बहरीन
- ओमान
ये देश दुनिया के सबसे बड़े तेल-गैस उत्पादक हैं और भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के प्रमुख स्रोत हैं।

समझौते की मुख्य शर्तें और प्रक्रिया!
टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर हस्ताक्षर से बातचीत का दायरा, नियम और ढांचा तय हो गया है। अब तीसरा दौर की औपचारिक वार्ता जल्द शुरू होगी। ध्यान दें कि भारत-GCC के बीच 2004 में फ्रेमवर्क एग्रीमेंट हुआ था, लेकिन 2006 और 2008 में दो दौर की बातचीत के बाद GCC ने सभी देशों के साथ वार्ता स्थगित कर दी थी। अब 20 साल बाद यह प्रक्रिया फिर से शुरू हुई है।
भारत को क्या-क्या फायदे मिलेंगे?
यह FTA भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होगा:
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी – भारत GCC से भारी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस आयात करता है।
- निर्यात बढ़ेगा – भारत इन देशों को कीमती पत्थर, धातु, विद्युत मशीनरी, लोहा-इस्पात, रसायन और कृषि उत्पाद निर्यात करता है।
- 2024-25 में भारत का GCC को निर्यात ≈ 57 अरब डॉलर (1% वृद्धि) और आयात ≈ 121.7 अरब डॉलर (15.33% वृद्धि) रहा।
- कुल द्विपक्षीय व्यापार ≈ 179 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
- खाड़ी देशों में करीब 3.2 करोड़ भारतीय प्रवासी काम करते हैं – आधे से ज्यादा GCC में। FTA से उनकी नौकरियां, रेमिटेंस और सुरक्षा बेहतर होगी।
- भारतीय किसानों, पेट्रोकेमिकल, मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र को बड़ा बूस्ट मिलेगा।
पीयूष गोयल का बयान: मजबूत व्यापार संबंधों का नया अध्याय
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “यह मजबूत व्यापार व्यवस्था दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगी। इससे वस्तुओं, सेवाओं और निवेश में तेजी आएगी।” यह कदम हाल ही में EU और अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद आया है, जो भारत की वैश्विक व्यापार शक्ति को दर्शाता है।
पहले से हुए समझौते और भविष्य की राह
भारत पहले ही GCC के दो सदस्यों से अलग-अलग डील कर चुका है:
- UAE के साथ CEPA (मई 2022 से लागू)
- ओमान के साथ CEPA (दिसंबर 2025 में हस्ताक्षर)
अब पूरे GCC के साथ एक बड़ा FTA होने से व्यापार और आसान हो जाएगा। कतर के साथ भी अलग से बातचीत चल रही है।
आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान
भारत-GCC FTA की बातचीत शुरू होना न केवल आर्थिक, बल्कि रणनीतिक महत्व का है। ऊर्जा, निवेश, प्रवासी भारतीयों की भलाई और निर्यात वृद्धि से भारत की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी। यह समझौता पूरा होने पर भारत को वैश्विक व्यापार में और मजबूत स्थिति देगा।










