नवंबर में IEX ने रिकॉर्ड तोड़ा : नवंबर 2025 में IEX ने बिजली ट्रेडिंग में 177% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की। DAM और RTM मार्केट में कीमतें घटीं, जिससे डिस्कॉम्स को सस्ती बिजली मिली। पूरी रिपोर्ट हिंदी में।
भारतीय ऊर्जा बाजार में एक बार फिर इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) ने धमाका किया है। नवंबर 2025 में IEX पर कुल बिजली ट्रेडिंग वॉल्यूम 177% साल-दर-साल बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। सौर ऊर्जा डॉट कॉम की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यह उछाल मुख्य रूप से रियल-टाइम मार्केट (RTM) और डे-अहेड मार्केट (DAM) में कीमतों के भारी गिरावट के कारण हुआ। नतीजा? राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) को सस्ती बिजली मिली और उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम हुआ। आइए इस 700 शब्दों के SEO-फ्रेंडली ब्लॉग में पूरी डिटेल समझते हैं।
नवंबर 2025: IEX के आंकड़े ने सबको चौंकाया

IEX की आधिकारिक घोषणा के अनुसार:
- कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम: 17,869 मिलियन यूनिट (MU) (नवंबर 2024 के 6,469 MU की तुलना में 177% अधिक)
- रियल-टाइम मार्केट (RTM): 9,684 MU (300% से ज्यादा की ग्रोथ!)
- डे-अहेड मार्केट (DAM): 7,360 MU
- ग्रीन मार्केट (RECs + ग्रीन टर्म-अहेड): 825 MU
- यह आंकड़े बताते हैं कि शॉर्ट-टर्म पावर मार्केट में भारत तेजी से शिफ्ट हो रहा है।
- पहले जहां डिस्कॉम्स लंबे पीपीए (पावर परचेज एग्रीमेंट) पर निर्भर रहती थीं
- अब वे RTM और DAM के जरिए घंटे-दर-घंटे सस्ती बिजली खरीद रही हैं।
बिजली की कीमतें क्यों गिरीं? मुख्य कारण
- नवीकरणीय ऊर्जा (RE) का बंपर उत्पादन नवंबर में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन पीक पर था। दिन के समय सोलर जेनरेशन इतना ज्यादा था कि कई घंटों में कीमतें ₹2 प्रति यूनिट से भी नीचे चली गईं।
- मांग में मौसमी कमी ठंड शुरू होने से कूलिंग लोड (AC, कूलर) कम हुआ। औद्योगिक मांग भी त्योहारों के बाद थोड़ी सुस्त पड़ी।
- हाइडल और थर्मल का बैकअप अच्छी बारिश के कारण हाइड्रोपावर प्लांट्स फुल कैपेसिटी पर चल रहे थे, जिससे थर्मल प्लांट्स को मेरिट ऑर्डर में पीछे धकेला गया।
- डे-अहेड मार्केट (DAM): ₹3.28/यूनिट (पिछले साल ₹5.48 से 40% कम)
- रियल-टाइम मार्केट (RTM): ₹2.89/यूनिट (सबसे सस्ता विकल्प)
- पीक ऑवर्स में भी कीमतें ₹5 से नीचे रहीं
औसत कीमतें (नवंबर 2025):
डिस्कॉम्स के लिए यह क्यों है गेम-चेंजर?
- लागत में भारी बचत: कई राज्य डिस्कॉम्स ने RTM के जरिए 50-60 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती बिजली खरीदी।
- पावर सरप्लस का फायदा: दिन में सोलर सरप्लस को सस्ते में खरीदकर रात में महंगी थर्मल बिजली से बचत।
- बजट में राहत: उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार जैसी डिस्कॉम्स को करोड़ों रुपये की बचत हुई।
सौर ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि रिन्यूएबल एनर्जी का ग्रिड में 40% तक शेयर आने से ऐसे दिन अब आम हो जाएंगे।
रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट्स (REC) मार्केट में भी उछाल
- नवंबर में 7.28 लाख RECs का कारोबार हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 42% ज्यादा है।
- एक REC की औसत कीमत ₹150-200 के बीच रही। इससे सोलर-विंड डेवलपर्स को अतिरिक्त कमाई हुई
- और डिस्कॉम्स अपने RPO (Renewable Purchase Obligation) टारगेट पूरे कर पाईं।
2025-26 के लिए क्या है संकेत?
- RTM की हिस्सेदारी बढ़कर 50% के पार जाने की संभावना।
- बैटरी स्टोरेज (BESS) और पंप्ड हाइड्रो के आने से कीमतों में और स्थिरता आएगी।
- MBED (Market-Based Economic Dispatch) लागू होने पर यह ट्रेंड और तेज होगा।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 GW नवीकरणीय क्षमता का है। IEX जैसे पावर एक्सचेंज उस लक्ष्य की रीढ़ बनने जा रहे हैं।
सस्ती और हरी बिजली का नया युग शुरू
- नवंबर 2025 के आंकड़े साफ बता रहे हैं कि भारत सस्ती, स्वच्छ और स्मार्ट बिजली की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
- IEX का 177% उछाल सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय ऊर्जा क्रांति की नई कहानी है।
- डिस्कॉम्स, उपभोक्ता और रिन्यूएबल डेवलपर्स – सभी को फायदा हो रहा है।












