ट्रंप ग्रीनलैंड : डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की महत्वाकांक्षा फिर से सुर्खियों में है। 7 जनवरी 2026 को प्रकाशित एक Politico रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए एक सुनियोजित रणनीति पर काम कर रहा है, जो रूस की विस्तारवादी नीतियों से प्रेरित लगती है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन इसके रणनीतिक महत्व और खनिज संसाधनों के कारण अमेरिका की नजरें उस पर टिकी हैं। इस ब्लॉग में हम ट्रंप ग्रीनलैंड डील के उन 4 आसान स्टेप्स पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो NATO और यूरोपीय सहयोगियों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं।
ट्रंप ग्रीनलैंड ग्रीनलैंड क्यों महत्वपूर्ण है?
ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित एक विशाल द्वीप है, जो खनिज संसाधनों से भरपूर है और सैन्य दृष्टि से बेहद रणनीतिक। अमेरिका वहां पहले से पिटुफिक स्पेस बेस संचालित करता है। ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि, एक 2025 के ओपिनियन पोल के अनुसार, 56% ग्रीनलैंडवासी डेनमार्क से स्वतंत्रता चाहते हैं, लेकिन 85% अमेरिका का हिस्सा बनने के खिलाफ हैं। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ कहा है कि “अमेरिका को ग्रीनलैंड को anneक्स करने का कोई अधिकार नहीं है।”

#ट्रंप के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा, “कोई भी ग्रीनलैंड के भविष्य पर अमेरिका से सैन्य टक्कर नहीं लेगा।” वहीं वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने जोड़ा, “ग्रीनलैंड के लोग आत्मनिर्णय करेंगे… हमें उम्मीद है कि वे अमेरिका के साथ साझेदारी चुनेंगे।”
ट्रंप के 4 आसान स्टेप्स: ग्रीनलैंड पर कब्जे की रणनीति
- Politico की रिपोर्ट में ट्रंप प्रशासन की संभावित योजना को 4 स्टेप्स में बताया गया है:
- स्वतंत्रता आंदोलन को बढ़ावा देना (Influence Campaign): ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड में
- स्वतंत्रता की मांग को प्रोत्साहित कर रहा है। इसके लिए स्पेशल एन्वॉय नियुक्त किए गए हैं
- और ऑनलाइन-ऑफलाइन प्रभाव अभियान चलाए जा रहे हैं। डेनिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक
- अमेरिका से जुड़े ऑपरेशंस प्रो-इंडिपेंडेंस आवाजों को बढ़ावा दे रहे हैं। डेनमार्क की सिक्योरिटी
- सर्विस PET ने भी ऐसे अभियानों की चेतावनी दी है।
ग्रीनलैंड को आकर्षक डील ऑफर करना (Sweet Deal): स्वतंत्रता मिलने के बाद अमेरिका कॉम्पैक्ट ऑफ फ्री एसोसिएशन (COFA) जैसा समझौता प्रस्तावित कर सकता है, जैसा माइक्रोनेशिया, मार्शल आइलैंड्स और पलाऊ के साथ है। इसमें अमेरिका सैन्य सुरक्षा, सेवाएं और व्यापार सुविधाएं देगा, बदले में सैन्य पहुंच प्राप्त करेगा। ग्रीनलैंड के सांसद कुनो फेंकर ने कहा कि डेनमार्क ग्रीनलैंड को “खर्च” मानता है और स्वतंत्रता पर छोड़ सकता है।
यूरोप को मनाना (Get Europe on Board): यूक्रेन शांति वार्ताओं का फायदा उठाकर “सिक्योरिटी फॉर सिक्योरिटी” स्वैप ऑफर किया जा सकता है। यूरोप को यूक्रेन के लिए मजबूत अमेरिकी गारंटी दी जाएगी, बदले में ग्रीनलैंड पर अमेरिकी प्रभाव को स्वीकार करने के लिए कहा जाएगा। इससे NATO सहयोगियों से सीधा टकराव टाला जा सकता है।
- सैन्य आक्रमण (Military Invasion): अगर कूटनीति फेल हुई तो तेज सैन्य कार्रवाई।
- ग्रीनलैंड में कोई सेना नहीं है, केवल डेनमार्क की सीमित सुविधाएं (चार जहाज, हेलिकॉप्टर आदि) हैं।
- विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका मौजूदा बेस से आधे घंटे से कम में न्यूक शहर पर कब्जा कर सकता है।
- यह रूस की यूक्रेन रणनीति जैसा होगा, लेकिन इससे NATO का अंत हो सकता है।
NATO और यूरोप पर प्रभाव: बड़ा खतरा
यह योजना NATO के लिए घातक साबित हो सकती है। अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करता है, तो सहयोगी देशों का भरोसा टूटेगा, इंटेलिजेंस शेयरिंग रुकेगी और बेस एक्सेस खत्म हो सकता है। डेनिश प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि “अगर ट्रंप ग्रीनलैंड पर आक्रमण करते हैं, तो NATO खत्म हो जाएगा।” यूरोपीय नेता ग्रीनलैंड की सुरक्षा NATO के माध्यम से सुनिश्चित करने पर जोर दे रहे हैं। विशेषज्ञ थॉमस क्रॉस्बी कहते हैं कि ट्रंप की डील-मेकिंग शैली में विश्वासघात होता है, और ग्रीनलैंडवासियों को कोई फायदा नहीं मिलेगा।
- व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि ग्रीनलैंड हासिल करने के विकल्पों पर चर्चा हो रही है
- जिसमें सैन्य उपयोग भी शामिल है। यूरोप में चिंता बढ़ रही है, और पोलैंड के नेता डोनाल्ड टस्क
- ने कहा कि यूरोप को एकजुट होना होगा वरना “खत्म हो जाएगा।”
क्या ट्रंप सफल होंगे?
ट्रंप की ग्रीनलैंड महत्वाकांक्षा पुरानी है, लेकिन 2026 में यह गंभीर मोड़ ले रही है। सैन्य कार्रवाई आसान लगती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बैकलैश और NATO का पतन अमेरिका को अलग-थलग कर सकता है। ग्रीनलैंडवासी अमेरिकी anneक्सेशन के खिलाफ हैं, और डेनमार्क-यूरोप इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। यह मामला अमेरिकी विदेश नीति और वैश्विक सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठाता है।










