हरियाणा सरकार : ने अरावली पर्वतमाला में खनन को लेकर उठे विवाद पर बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले किसी भी भू-आकृति में खनन की अनुमति नहीं दी गई है और न ही कोई छूट दी गई है। पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने कहा कि अरावली में खनन पर सख्त नियम लागू हैं। आइए जानते हैं इस बयान की पूरी डिटेल्स, सरकार का दावा और पर्यावरणीय प्रभाव।
हरियाणा सरकार का आधिकारिक बयान क्या है?
#हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने स्पष्ट किया कि अरावली क्षेत्र में खनन की अनुमति केवल 100 मीटर से ऊंचे पहाड़ों में ही दी जाती है, जहां पर्यावरणीय प्रभाव न्यूनतम हो। उन्होंने कहा:

“यह गलत है कि अरावली के सभी इलाकों में खनन की अनुमति दी गई है। हमने कोई नई छूट नहीं दी है। खनन केवल उन क्षेत्रों में हो सकता है जहां पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (EIA) पास हो और नियमों का पालन हो।”
सरकार ने यह भी कहा कि अरावली को राष्ट्रीय महत्व का क्षेत्र माना जाता है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।
अरावली खनन विवाद की पृष्ठभूमि
- अरावली पर्वतमाला दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा-राजस्थान के बीच फैली हुई है।
- यह क्षेत्र प्राकृतिक बैरियर के रूप में काम करता है और जल संरक्षण
- वायु शुद्धिकरण और जैव विविधता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पिछले कुछ सालों में अरावली में अवैध खनन के कई मामले सामने आए हैं, जिससे पहाड़ी इलाके क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। पर्यावरण कार्यकर्ता विवेक चौधरी और अन्य ने आरोप लगाया था कि सरकार ने 100 मीटर नीचे के क्षेत्रों में खनन की छूट दी है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और नियम
सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में अरावली में खनन पर कई प्रतिबंध लगाए थे। मुख्य नियम:
- 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले पहाड़ों में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित।
- पर्यावरण मंजूरी (EC) अनिवार्य।
- अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई।
- हरियाणा में अरावली के कुछ हिस्सों को अरावली नोटिफाइड क्षेत्र घोषित किया गया है।
सरकार का दावा है कि वे इन सभी नियमों का पालन कर रहे हैं।
पर्यावरणविदों और विपक्ष की प्रतिक्रिया!
- कांग्रेस ने कहा कि सरकार का बयान सिर्फ डैमेज कंट्रोल है। विपक्ष ने मांग की
- कि अरावली में खनन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
- पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा कि अरावली का क्षरण दिल्ली-NCR में धूल प्रदूषण और जल संकट बढ़ा रहा है।
अरावली के पर्यावरणीय महत्व
- जल स्रोत: अरावली दिल्ली के लिए भूजल रिचार्ज का मुख्य स्रोत है।
- जैव विविधता: हजारों प्रजातियों का घर।
- धूल और प्रदूषण: यह दिल्ली-NCR के लिए नेचुरल वॉल है, जो हवा को साफ रखता है।
हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि अरावली में खनन पर कोई छूट नहीं दी गई है। लेकिन पर्यावरणविदों का कहना है कि निगरानी और सख्ती बढ़ानी होगी। अरावली का संरक्षण न सिर्फ हरियाणा, बल्कि पूरे दिल्ली-NCR के लिए जरूरी है।









