हार्वर्ड वीजा प्रतिबंध 2025 : डेलाराम पौयाबाहर एक कनाडा स्थित कंप्यूटेशनल बायोलॉजिस्ट हैं, जिनकी हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च की योजना अमेरिकी वीजा प्रतिबंधों की वजह से विफल हो गई। उनका यह अनुभव वैश्विक शोध समुदाय में छाई चिंताओं और प्रवासन नीतियों के प्रभाव को उजागर करता है। इस ब्लॉग में डेलाराम के शोध, उनके करियर की मुख्य उपलब्धियां, और उनकी हार्वर्ड यात्रा क्यों अधूरी रह गई, इस पर विस्तार से चर्चा की गई है।
डेलाराम पौयाबाहर का परिचय और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
डेलाराम पौयाबाहर का जन्म ईरान में हुआ और उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा कनाडा में पूरी की। उन्होंने 2019 से 2025 तक टोरंटो विश्वविद्यालय से कंप्यूटेशनल बायोलॉजी में पीएचडी की डिग्री हासिल की। उनके शोध का फोकस मशीन लर्निंग का उपयोग करते हुए सिंगल सेल और स्पैशल ट्रांसक्रिप्टोमिक्स डेटा का विश्लेषण है, जो कैंसर, इम्यूनोलॉजी और लीवर बायोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नयी जानकारियां प्रदान करता है।

उनका डॉक्टरेट शोध प्रोफेसर गैरी बांदर के निर्देशन में हुआ, जहां उन्होंने बड़े पैमाने पर जीन अभिव्यक्ति डेटा के विश्लेषण के लिए कम्प्यूटेशनल फ्रेमवर्क विकसित किए। इसके पहले, वे यूरोपीय मॉलिक्यूलर बायोलॉजी लैबोरेटरी, हाइडलबर्ग में एक विजिटिंग इंटर्नशिप कर चुकी हैं। इसके अलावा, उन्होंने शариф विश्वविद्यालय ऑफ टेक्नोलॉजी, तेहरान में बायोइन्फॉर्मेटिक्स क्षेत्रों में काम किया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और शोध कार्य
डेलाराम का शोध अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित हुआ है, जिनमें नेचर कम्युनिकेशन्स, सेल जीनोमिक्स, आइसाइंस, और एनालिटिकल केमिस्ट्री शामिल हैं। उनकी कुछ शोध सामग्री को 200 से अधिक बार संदर्भित किया गया है, जो उन्हें इस क्षेत्र के युवा रिसर्चर्स में अत्यधिक मान्यता प्राप्त करती है।
उन्होंने ISMB, कीस्टोन सिम्पोजिया जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में अपने शोध प्रस्तुत किए हैं, साथ ही नेचर बायोटेक्नोलॉजी और साइंटिफिक रिपोर्ट्स जैसे जर्नलों के लिए समीक्षा कार्य भी किया है।
हार्वर्ड पोस्टडॉक का अवसर और असफलता
हार्वर्ड विश्वविद्यालय में उनके पोस्टडॉक्टरल शोध की योजना Eric और Wendy Schmidt पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप के तहत थी, जो MIT और हार्वर्ड के ब्रॉड इंस्टीट्यूट द्वारा समर्थित है। डेलाराम ने व्यापक साक्षात्कार, फेलोशिप आवेदन और कांसुलर अपॉइंटमेंट पूरा कर लिया था कि तभी अमेरिकी सरकार ने जून 2025 में कुछ देशों के शोधकर्ताओं के लिए वीजा प्रक्रिया पर नए प्रतिबंध लगाए। इस बदलाव ने ईरान सहित कई देशों के शोधकर्ताओं के लिए प्रवेश को रोक दिया।
- इस प्रतिबंध के कारण डेलाराम की प्रक्रिया अटकी रही और उन्होंने कभी अंतिम उत्तर प्राप्त नहीं किया।
- इस अस्पष्टता ने उनके करियर में भारी बाधा उत्पन्न की। उन्होंने अपने सार्वजनिक बयान
- में इस कठिनाई को “महीनों की अनिश्चित स्थिति” के रूप में वर्णित किया।
वर्तमान स्थिति और कनाडा में जारी शोध
- हालांकि हार्वर्ड का मौका ठप हो गया, डेलाराम ने टोरंटो विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टोरल शोध जारी रखा है
- जहां वे Dr. Aleksandrina Goeva के नेतृत्व में काम कर रही हैं।
- उनका फोकस अब भी स्पैशल ट्रांसक्रिप्टोमिक्स डाटासेट में बीमारी से जुड़े सेल स्टेट्स की पहचान करना है।
- उनका करियर वैश्विक नीतियों के चलते पुनः निर्धारित हुआ, पर उन्होंने कनाडा में अनुसंधान
- के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत रखी है। डेलाराम इस बात का उदाहरण हैं
- कि कैसे वैश्विक राजनीति और यात्रा नीतियां वैज्ञानिक करियर को प्रभावित कर सकती हैं।
वैश्विक शोध समुदाय पर प्रभाव
- डेलाराम की कहानी वैश्विक शोध समुदाय के लिए चिंताजनक संकेत है, जहां राष्ट्रीय नीतियों का
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शोध प्रगति पर प्रभाव पड़ता है। वीजा प्रतिबंधों के कारण वैज्ञानिकों
- की गतिशीलता सीमित हुई है, जिससे प्रतिभा का उचित उपयोग और शोध के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
ऐसे में अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थान सक्रिय प्रयास कर रहे हैं कि वे अन्य देशों में शोधकर्ताओं को आकर्षित कर सकें और वैकल्पिक रास्ते प्रदान करें।












