सोने-चांदी इंपोर्ट ड्यूटी केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर लगाए जाने वाले टैरिफ को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। यह फैसला 13 मई 2026 को लिया गया। सरकार का मकसद विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना, व्यापार घाटा घटाना और रुपए को मजबूत करना है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश होने के कारण भारत पर यह कदम बाजार में काफी असर डालेगा।
भारत में सोने और चांदी का आयात तेजी से बढ़ रहा था। 2025 में सोने के आयात का मूल्य 58.9 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 2022 में यह 36.5 बिलियन डॉलर था। चांदी के आयात में भी 44% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

सोने-चांदी इंपोर्ट ड्यूटी क्यों लिया गया यह फैसला?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले ही नागरिकों से अपील की थी कि राष्ट्रीय हित में एक साल तक अनावश्यक सोना खरीदना टालें। इस अपील के ठीक बाद सरकार ने ड्यूटी बढ़ाने का कदम उठाया। Global Trade Research Initiative (GTRI) ने भी इस कदम का स्वागत किया है।
सरकार ने 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% Agriculture Infrastructure and Development Cess (AIDC) लगाकर कुल 15% प्रभावी ड्यूटी तय की है।
इस फैसले के प्रमुख कारण
- विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर बढ़ता दबाव कम करना
- व्यापार घाटा (Trade Deficit) को नियंत्रित करना
- रुपए की स्थिरता बनाए रखना (रुपया हाल के महीनों में एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल रहा)
- मध्य पूर्व संकट के कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
- UAE के साथ FTA के तहत मिल रही छूट की समीक्षा (जिससे दुबई मार्ग से आयात बढ़ा)
बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
- सोने-चांदी की कीमतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि आयात महंगा हो जाएगा।
- ज्वेलरी मार्केट में मांग प्रभावित होगी।
- शादी-विवाह सीजन और त्योहारों में खरीदारी पर असर संभव।
- घरेलू ज्वेलर्स और निर्यातकों को चुनौती, लेकिन लंबे समय में smuggling कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम मांग को दबाएगा और भारत के बाहरी वित्तीय संतुलन को मजबूत करेगा।
सोने-चांदी पर ड्यूटी का इतिहास
- 2024: ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% किया गया था (स्मगलिंग रोकने के लिए)।
- अब 2026 में फिर 15% कर दिया गया।
यह दिखाता है कि सरकार आयात पर नजर रखते हुए जरूरत अनुसार नीति बदल रही है।
आर्थिक संदर्भ
वर्तमान में मध्य पूर्व में अस्थिरता, ऊर्जा संकट और वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ा है। सोना और चांदी का आयात विदेशी मुद्रा खर्च का बड़ा हिस्सा है। इस फैसले से सरकार विदेशी मुद्रा की बचत कर पाएगी, जो आगे चलकर रुपए को सपोर्ट करेगा।
Union Minister Ashwini Vaishnaw ने भी CII समिट में इस अपील को दोहराया था कि नागरिक import-related खर्च कम करें।
निवेशकों और आम जनता के लिए सलाह
- शॉर्ट टर्म में कीमतें बढ़ सकती हैं, इसलिए निवेश से पहले सोच-समझकर फैसला लें।
- डिजिटल गोल्ड, सोने के ETF, सोवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसी वैकल्पिक विकल्पों पर विचार करें।
- शादी-विवाह जैसी जरूरी खरीदारी अभी टालने या सीमित रखने की सलाह दी जा रही है।
- लंबे समय में सोना हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में सावधानी बरतें।
सरकार का यह फैसला आर्थिक संकट के समय में सक्रिय कदम है। इससे रुपए की रक्षा होगी, विदेशी मुद्रा बचत होगी और व्यापार संतुलन सुधरेगा। हालांकि आम उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
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