गेमिंग की लत : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक ऐसी त्रासदी घटी है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। भारत सिटी टाउनशिप में तीन सगी नाबालिग बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर सामूहिक आत्महत्या कर ली। यह घटना 4 फरवरी 2026 की देर रात करीब 2 बजे हुई, जब पूरा शहर नींद में डूबा हुआ था। तीनों बहनों की मौत मौके पर ही हो गई, और यह मामला ऑनलाइन गेमिंग की लत और माता-पिता की डांट से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है।
घटना का पूरा विवरण
घटना टीला मोड़ थाना क्षेत्र के भारत सिटी सोसाइटी के बी-1 टावर, फ्लैट नंबर 907 की है। तीनों बहनें – विशिका (16 वर्ष), प्राची (14 वर्ष) और पाखी (12 वर्ष) – चेतन कुमार की बेटियां थीं। पुलिस जांच के अनुसार, वे मंदिर वाले कमरे की खिड़की से बालकनी में पहुंचीं, कुर्सी पर चढ़कर बाहर निकलीं और एक-एक करके नीचे कूद गईं। ग्राउंड फ्लोर पर गिरने से उनकी मौत हो गई। शवों को लोनी के संयुक्त अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद आगे की जांच जारी है।

तीनों बहनों का आपसी रिश्ता बेहद गहरा था। वे नहाना, खाना, सोना, स्कूल जाना – हर काम साथ करती थीं। कोरोना काल से ही वे स्कूल नियमित नहीं जा रही थीं। सबसे बड़ी विशिका अभी भी कक्षा 4 में पढ़ रही थी।
मुख्य कारण: ऑनलाइन गेमिंग की बुरी लत
- प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें मोबाइल पर ‘कोरियन लवर’ नामक टास्क-बेस्ड
- ऑनलाइन गेम खेलने की आदी थीं। यह गेम कोरियन लव स्टोरी पर आधारित है
- जिसमें टास्क पूरे करने पड़ते हैं। कोरोना महामारी के बाद से यह लत लग गई थी
- और पिछले 5 सालों से जारी थी। माता-पिता अक्सर उन्हें गेम खेलने से रोकते और डांटते थे
- क्योंकि उनकी पढ़ाई और दिनचर्या पूरी तरह बिगड़ गई थी।
- पुलिस को घटनास्थल से एक पेज का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें सिर्फ “मम्मी-पापा सॉरी” लिखा था।
- यह नोट परिवार के प्रति उनके अपराधबोध को दर्शाता है। हालांकि, सुसाइड का सटीक कारण
- अभी जांच के दायरे में है, लेकिन गेमिंग एडिक्शन और पारिवारिक टकराव मुख्य वजह लग रहे हैं।
परिवार और समाज पर गहरा असर
इस घटना ने पूरे सोसाइटी में हड़कंप मचा दिया। पड़ोसी सदमे में हैं कि इतनी छोटी उम्र में तीन बहनों ने ऐसा कदम क्यों उठाया। माता-पिता का क्या हाल होगा, यह सोचकर ही रुलाई आ जाती है। यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन गेमिंग की लत के खतरों को उजागर करता है, खासकर नाबालिग बच्चों में। आजकल बच्चे स्क्रीन पर घंटों बिताते हैं, जिससे मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
क्या सबक मिलता है इस त्रासदी से?
- बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें: माता-पिता को बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर सख्त लेकिन समझदारी से नियंत्रण रखना चाहिए।
- गेमिंग एडिक्शन के संकेत पहचानें: अगर बच्चा पढ़ाई छोड़कर गेम में डूब जाए, तो तुरंत काउंसलिंग लें।
- मानसिक स्वास्थ्य की बात करें: बच्चों से खुलकर बात करें, उनकी भावनाओं को समझें।
- स्कूल और पढ़ाई को प्राथमिकता दें: कोरोना के बाद कई बच्चे स्कूल से दूर हो गए, इसे सुधारना जरूरी है।
- यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज की चिंता है। ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन
- नाबालिग सुसाइड, पैरेंटिंग चैलेंज जैसे मुद्दों पर जागरूकता फैलानी होगी।
- गाजियाबाद पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।












