दुबई 13 दिसंबर 2025 : ईरान सरकार ने भारी ईंधन उपभोक्ताओं (heavy users) के लिए सब्सिडाइज्ड पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव शनिवार से लागू हो गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती ईंधन खपत को नियंत्रित करना है, बिना जनता में व्यापक असंतोष पैदा किए। ईरान में पेट्रोल की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं, लेकिन भारी सब्सिडी के कारण सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
नई कीमतें और कोटा सिस्टम क्या है?
ईरान में पहले से दो स्तर की कीमतें थीं:
- पहला कोटा: 60 लीटर प्रति माह 15,000 रियाल प्रति लीटर पर।
- दूसरा कोटा: अतिरिक्त 100 लीटर 30,000 रियाल प्रति लीटर पर।
अब नया तीसरा स्तर जोड़ा गया है:

- 160 लीटर से अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 50,000 रियाल प्रति लीटर (फ्री मार्केट रेट पर लगभग 4 अमेरिकी सेंट) की दर लागू होगी।
यह बदलाव मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करेगा जो:
- कई वाहन रखते हैं (केवल एक वाहन के लिए कम कीमत वाला कोटा मिलेगा)।
- सरकारी वाहन, नई उत्पादित कारें या आयातित वाहन चलाते हैं।
- आपातकालीन कार्ड से ईंधन भरवाते हैं।
सरकारी मीडिया के अनुसार, 80% से अधिक सामान्य उपभोक्ताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उनकी मासिक खपत 160 लीटर से कम रहती है।
क्यों बढ़ाई गईं ईरान पेट्रोल कीमतें 2025 में?
ईरान OPEC का सदस्य है और तेल उत्पादक देश होने के बावजूद घरेलू ईंधन खपत तेजी से बढ़ रही है। दैनिक उत्पादन लगभग 110 मिलियन लीटर है, जबकि मांग गर्मियों में 140 मिलियन लीटर तक पहुंच जाती है। मुख्य कारण:
- पुरानी और अकुशल कारें।
- पड़ोसी देशों में तस्करी (सस्ते पेट्रोल के कारण)।
- सब्सिडी से प्रोत्साहित अधिक खपत।
- इससे सरकार को ईंधन आयात करना पड़ रहा है, जो महंगा पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण
- अर्थव्यवस्था पहले से दबाव में है, और सब्सिडी पर अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं।
- तेल मंत्री ने इसे “अनियंत्रित खपत सुधारने की शुरुआत” बताया है।
- कीमतें हर तीन महीने में रिव्यू की जाएंगी, जिससे आगे और बदलाव संभव हैं।
2019 के विरोध प्रदर्शनों का सबक
2019 में अचानक पेट्रोल कीमतें बढ़ाने पर पूरे देश में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें दबाने में सैकड़ों लोग मारे गए। सरकार इस बार सतर्क है और बदलाव सीमित रखा है, ताकि आम जनता प्रभावित न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम तस्करी रोकने और सब्सिडी बोझ कम करने में मदद करेगा, लेकिन अगर खपत नहीं घटी तो आगे बड़े बदलाव आने जरूरी होंगे।
वैश्विक प्रभाव और भारत पर असर?
- ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में है। हालांकि यह बदलाव घरेलू है, लेकिन अगर ईरान की
- आंतरिक स्थिति अस्थिर हुई तो वैश्विक तेल कीमतों पर असर पड़ सकता है।
- भारत जैसे देश, जो मध्य पूर्व से तेल आयात करते हैं, सतर्क हैं।
- फिलहाल क्रूड ऑयल कीमतें स्थिर हैं, लेकिन भविष्य में उतार-चढ़ाव संभव।
यह नीति ईरान की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक कदम है, लेकिन जनता की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं। अधिक जानकारी के लिए रॉयटर्स की मूल रिपोर्ट देखें।












