ग्राम प्रधान कार्यकाल विस्तार बाराबंकी जिले के विकास खंड बनीकोडर में ग्राम प्रधानों ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा को ज्ञापन सौंपा है। प्रधानों का कहना है कि उनका कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में समय पर पंचायत चुनाव कराना मुश्किल दिख रहा है। इसलिए उन्होंने कार्यकाल बढ़ाने की मांग की है ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया बनी रहे और प्रशासकों की नियुक्ति से बचा जा सके!
घटना का पूरा विवरण
शुक्रवार को बनीकोडर प्रधान संघ के अध्यक्ष प्रदीप सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों ग्राम प्रधानों ने राज्यमंत्री को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि निर्वाचित प्रधानों की जगह प्रशासक नियुक्त करना लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है। प्रधानों का तर्क है कि संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने और ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की निरंतरता के लिए कार्यकाल विस्तार जरूरी है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान विक्रमादित्य सिंह, विनोद कुमार साहू, जवाहर लाल तिवारी, राजेश मिश्र, शिवमोहन वर्मा, माधवराज सिंह सोनू समेत कई अन्य प्रधान मौजूद रहे। राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने प्रधानों को आश्वासन दिया कि मामले में न्यायोचित कार्रवाई की जाएगी।
ग्राम प्रधान कार्यकाल विस्तार क्यों बढ़ रही है चुनाव टलने की आशंका?
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की तैयारी चल रही है, लेकिन कई जिलों में मौसम, प्रशासनिक तैयारियों और अन्य मुद्दों के कारण देरी की आशंका जताई जा रही है। बनीकोडर जैसे विकास खंडों में ग्राम प्रधान विकास योजनाओं (मनरेगा, PMAY, जल जीवन मिशन आदि) को प्रभावी ढंग से चला रहे हैं। अगर कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक आ गए तो विकास कार्यों में रुकावट आ सकती है।
- प्रधानों का मानना है कि कार्यकाल विस्तार से न केवल लोकतंत्र की निरंतरता बनी रहेगी
- बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिरता भी बरकरार रहेगी। यह मांग केवल बनीकोडर तक सीमित नहीं है।
- बाराबंकी सहित कई जिलों में इसी तरह की आवाजें उठ रही हैं।
ग्राम प्रधानों की भूमिका और चुनौतियां!
ग्राम प्रधान ग्रामीण भारत की रीढ़ हैं। वे गांव के विकास, विवाद निपटारे, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और सामाजिक सद्भाव के लिए काम करते हैं। उनका कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष का होता है। लेकिन अगर चुनाव समय पर नहीं हुए तो प्रशासक नियुक्ति से कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं:
- विकास कार्यों में देरी
- पारदर्शिता पर सवाल
- ग्रामीणों का असंतोष
- लोकतांत्रिक प्रक्रिया में व्यवधान
बनीकोडर प्रधान संघ ने इन सभी बिंदुओं को ज्ञापन में उठाया है।
सरकार के सामने चुनौती
- उत्तर प्रदेश सरकार के लिए यह मामला संवेदनशील है। एक ओर पंचायती राज व्यवस्था
- को मजबूत करना है, दूसरी ओर चुनाव कराने की तैयारियां पूरी करनी हैं।
- अगर कार्यकाल बढ़ाया जाता है तो यह एक अस्थायी समाधान हो सकता है
- लेकिन लंबे समय में स्वस्थ लोकतंत्र के लिए समय पर चुनाव जरूरी हैं।
- राज्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन से प्रधानों में उम्मीद जगी है।
- अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है।
लोकतंत्र की मजबूती जरूरी!
बनीकोडर की यह घटना सिर्फ एक स्थानीय मुद्दा नहीं है। यह पूरे उत्तर प्रदेश के ग्रामीण लोकतंत्र से जुड़ा है। ग्राम प्रधानों की मांग जायज है क्योंकि विकास की गति बनी रहनी चाहिए। साथ ही, चुनाव आयोग और राज्य सरकार को भी जल्द से जल्द तैयारियां पूरी करनी चाहिए ताकि लोकतंत्र की प्रक्रिया बिना रुके आगे बढ़े।






