दिल्ली कोर्ट : 22 जनवरी 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बरी कर दिया। स्पेशल जज दिग्विजय सिंह ने मौखिक रूप से संक्षिप्त आदेश जारी किया, जबकि लिखित विस्तृत फैसला अभी जारी होना बाकी है। यह फैसला पिछले दिसंबर में आरक्षित रखे गए थे, और आज सुनाया गया। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को सज्जन कुमार की भूमिका साबित करने में असफल पाया।
मामला क्या था?
यह केस 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ा है, जो इंदिरा गांधी की हत्या (31 अक्टूबर 1984) के बाद दिल्ली में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा के रूप में भड़के थे। दिल्ली के जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हुई हिंसा में दो लोगों की मौत हुई थी:
- जनकपुरी में 1 नवंबर 1984 को सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या।
- विकासपुरी में 2 नवंबर 1984 को गुरबचन सिंह को जिंदा जलाया गया।

- फरवरी 2015 में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इन घटनाओं पर दो FIR दर्ज कीं
- जिसमें सज्जन कुमार पर भीड़ को उकसाने, दंगा भड़काने और हिंसा में शामिल होने का आरोप था।
- सज्जन कुमार ने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
कोर्ट का फैसला और कारण
राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष सज्जन कुमार की किसी भी भूमिका को साबित नहीं कर सका। अगस्त 2023 में ही कोर्ट ने उन्हें हत्या और आपराधिक साजिश के आरोपों से डिस्चार्ज कर दिया था, लेकिन दंगा और दुश्मनी फैलाने के आरोप बाकी थे। आज के फैसले में उन्हें इन आरोपों से भी पूरी तरह बरी कर दिया गया। सज्जन कुमार ने फैसला सुनते ही दोनों हाथ जोड़कर कोर्ट का शुक्रिया अदा किया।
पीड़ित परिवारों की प्रतिक्रिया!
- कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, फैसला सुनकर पीड़ित परिवार के सदस्य रो पड़े। कई लोगों ने कहा
- कि उनके परिवार के 11 सदस्य मारे गए थे, और न्याय की उम्मीद अब भी बाकी है।
- यह फैसला 1984 दंगों के पीड़ितों के लिए निराशाजनक रहा है, क्योंकि दशकों बाद भी कई मामलों में न्याय अधूरा है।
1984 सिख विरोधी दंगों का संक्षिप्त इतिहास
1984 के दंगे भारत के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक हैं। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत कई शहरों में सिखों पर हमले हुए, जिसमें हजारों लोग मारे गए। सज्जन कुमार पर कई अन्य मामलों में भी आरोप लगे हैं, और एक मामले में उन्हें फरवरी 2025 में आजीवन कारावास की सजा भी हुई थी। लेकिन इस विशेष जनकपुरी-विकासपुरी केस में अब वे बरी हो गए हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
- यह फैसला राजनीतिक बहस को फिर से हवा देगा। कांग्रेस के पूर्व नेता होने के कारण यह मुद्दा
- विपक्ष द्वारा उठाया जा सकता है। वहीं, सिख समुदाय और मानवाधिकार संगठन लंबे समय
- से 1984 दंगों में न्याय की मांग करते रहे हैं। कई मामलों में SIT और CBI जांच के
- बाद भी दोषसिद्धि कम हुई है, जो न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।
- सज्जन कुमार का यह acquittal 1984 दंगों के पीड़ितों के लिए एक और झटका है
- लेकिन कानूनी प्रक्रिया में सबूतों की कमी को आधार बनाकर कोर्ट ने फैसला सुनाया।
- लिखित आदेश आने के बाद और स्पष्टता आएगी।












