छठ महापर्व 2025 : छठ पूजा 2025 के अवसर पर घाटों और कृत्रिम पोखरों पर चला भव्य सफाई अभियान, श्रद्धालुओं और प्रशासन की मेहनत से स्वच्छता का अनूठा संदेश समाज को मिला। जानिए अभियान की विस्तार से सारी जानकारी, तैयारी व स्वच्छता की प्रेरणा!
छठ महापर्व 2025: स्वच्छता की नई परंपरा
#छठ महापर्व 2025 का आयोजन देशभर में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। पारंपरिक घाटों से लेकर शहरी क्षेत्रों के कृत्रिम पोखरों तक, इस वर्ष छठ पूजा के आयोजन में स्वच्छता अभियान ने विशिष्ट स्थान बनाया। नगर निगमों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सफाई की व्यापक व्यवस्था की। गोरखपुर, दिल्ली, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में विशेष टीमें गठित की गईं जिन्होंने घाटों, तालाबों और पोखरों की सफाई की जिम्मेदारी संभाली

सफाई अभियान की विस्तार से रूपरेखा
अभियान दो चरणों में चला: पहले चरण में छठ की संध्या और सुबह के अर्घ्य के लिए घाटों को तैयार किया गया, ताकि श्रद्धालुओं को पवित्र और स्वच्छ स्थान मिले। दूसरे चरण में छठ पूजा संपन्न होने के बाद पूजन सामग्री, फूल-पत्ते, केले के पत्ते और अन्य कचरे का वैज्ञानिक विधि से निस्तारण कराया गया
- लगभग 1800 स्वच्छता कर्मी अभियान में शामिल हुए.
- पूजन सामग्री का संग्रह और गारबेज ट्रांसफर स्टेशन पहुँचाया गया.
- दिल्ली व अन्य महानगरों में मेयर, मुख्यमंत्री, मंत्रीगण भी सफाई अभियान में शामिल हुए.
कृत्रिम पोखरों और घाटों की सजावट
प्राकृतिक घाटों के साथ-साथ इस बार कई नगर निगमों ने कृत्रिम तालाब और पोखरों की व्यवस्था की ताकि शहरी आबादी को छठ पूजा के लिए स्वच्छ जगह मिले। इन तत्वों को रंगोली, पुष्प सजावट और रोशनी से आकर्षक बनाया गया
- प्रयागराज में 7 प्रमुख घाटों का सौंदर्यीकरण हुआ
- वाराणसी, लखनऊ समेत बड़े शहरों में नगर निगम द्वारा विशेष सजावट व स्वच्छता की व्यवस्था की गई
समाज की जागरूकता और सहभागिता
- इस वर्ष स्वच्छता के प्रति समाज की जागरूकता ने नया इतिहास रचा। केवल प्रशासन ही नहीं
- श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों व समाजसेवी संस्थाओं ने मिलकर घाटों को स्वच्छ रखने का प्रयास किया।
- मुख्यमंत्री और जनप्रतिनिधियों ने भी सफाई की आवश्यक भूमिका बताई और जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा का महत्व समझाया
- “जल ही जीवन है” का संकल्प लिया गया
- व्रती परिवारों ने पूजन के बाद ही घाटों की सफाई अपना दायित्व समझा.
छठ महापर्व से मिला स्वच्छता का संदेश
#छठ पूजा 2025 ने समाज को स्वच्छता, प्रकृति संरक्षण और लोककल्याण का संदेश दिया। इस महापर्व ने दिखाया कि धार्मिक आयोजन सिर्फ आस्था का नहीं, सफाई और व्यवस्था का भी पर्व है।
सभी बड़े शहरों में घाटों पर श्रद्धालुओं को साफ, सुरक्षित और सुंदर वातावरण मिला। स्वच्छता अभियान की सफलता से नागरिकों ने संदेश दिया कि “हर पर्व और त्योहार के बाद स्वच्छता हमारी जिम्मेदारी है”
- छठ महापर्व 2025 एक आदर्श उदाहरण रहा, जिसमें घाटों, कृत्रिम तालाबों, पोखरों से लेकर पूरे
- शहर में स्वच्छता की अलख जगाई गई। शासन और समाज की सहभागिता ने पर्व को सौंदर्य
- स्वच्छता और पर्यावरण प्रेम का त्यौहार बना दिया। आने वाले वर्षों के लिए इस पहल से प्रेरित होकर
- अन्य सामाजिक आयोजनों में भी स्वच्छता को प्राथमिकता दी जाएगी, तभी “आस्था” सच्चे अर्थों में स्वच्छता” से जुड़ सकेगी।












