मनरेगा योजना न्यूज बंगाल मनरेगा अपडेट : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र ने मनरेगा पर नरमी दिखाई है। अब पश्चिम बंगाल में मनरेगा भुगतान और काम फिर से शुरू करने की तैयारी।
पश्चिम बंगाल में दशकों से ग्रामीण और मजदूर वर्ग के लिए जीवनदायिनी साबित हुई मनरेगा योजना (MGNREGA) पर तीन साल से रोक लगी थी। केंद्र सरकार ने इस योजना को 2022 में रोक दिया था, यह आरोप लगाते हुए कि राज्य में योजना के क्रियान्वयन में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताएं हो रही हैं। लेकिन हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने नरमी दिखाते हुए इस योजना को फिर से शुरू करने का फैसला किया है।
मनरेगा योजना पर विवाद का इतिहास

#मनरेगा योजना, जो किसानों और ग्रामीण मजदूरों को 100 दिन की गारंटीड रोजगार देती है, पश्चिम बंगाल में अप्रैल 2022 से ठप पड़ी थी। केंद्र सरकार ने राज्य में अनियमितताओं का हवाला देते हुए फंड रिलीज रोक दिया था और योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र के इस कदम को राजनीति से प्रेरित और अनुचित बताया और इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि मनरेगा योजना को 1 अगस्त 2025 से दोबारा शुरू किया जाए, जबकि भ्रष्टाचार जांच की अनुमति भी दी गई।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: राज्य के हकों की जीत
- हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और केंद्र की अपील को खारिज कर दिया।
- कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मनरेगा जैसी सामाजिक कल्याण योजना को राजनीतिक विवादों का शिकार नहीं बनाया जा सकता।
- सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने केन्द्रीय सरकार के फैसले को झटका दिया और बंगाल
- में योजना की पुनः कार्यान्विति के रास्ते साफ कर दिए। न्यायालय ने कहा कि भले ही जांच जारी रहे
- लेकिन इसे पूरे राज्य के मजदूरों और गरीबों के रोजगार के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
- यह फैसला बंगाल के ग्रामीण मजदूरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण और समयोचित है
- क्योंकि इससे करोड़ों जिन्दगी पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
केंद्र की नरमी और योजना पुनः शुरू
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने नरमी दिखाते हुए मनरेगा योजना को पश्चिम बंगाल में ‘विशेष शर्तों’ के साथ फिर से शुरू करने पर विचार किया है।
मध्य विकास मंत्रालय (MoRD) ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को रिपोर्ट दी है कि वे योजना को सीमित नियमों और कड़ी निगरानी के साथ लागू कर सकते हैं ताकि फिर से किसी तरह के भ्रष्टाचार की संभावना न्यूनतम हो।
इस नरमी के साथ, पश्चिम बंगाल में लगभग 2.58 करोड़ जॉब कार्डधारकों को फिर से रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रतिक्रिया
- पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘लड़ाई का ऐतिहासिक जीत’ बताया है।
- अभिषेक बनर्जी और महुआ मोइत्रा सहित पार्टी के नेताओं ने केंद्र सरकार की आलोचना की कि
- उन्होंने बंगाल के गरीबों का अधिकार छीना और उन्हें बेरोजगारी के गर्त में डाल दिया।
- TMC ने कोर्ट के फैसले को संविधानिक अधिकारों की रक्षा के रूप में माना और कहा कि
- अब केंद्र को राज्य के गरीब ग्रामीणों को न्यायपूर्ण और समयबद्ध रोजगार प्रदान करना चाहिए।
मनरेगा योजना का सामाजिक और आर्थिक महत्व
- मनरेगा योजना ग्रामीण भारत के लिए ‘रोजगार गारंटी’ है, जो किसानों और मजदूरों
- को न केवल रोजगार देती है बल्कि आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान करती है।
- बंगाल में योजना शुरू होने के बाद से लाखों परिवारों की जीवनशैली में सुधार हुआ है, गरीबी और पलायन कम हुआ है।
- इसके बिना किसानों और मजदूरों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाती है, जिससे ग्रामीण अस्थिरता बढ़ती है।
- इसलिए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ग्रामीण पुनरुत्थान के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में मनरेगा योजना को पुनः लागू करने का रास्ता साफ कर दिया है। यह फैसला भारत के सबसे बड़े ग्रामीण रोजगार योजना के लिए एक बड़ी जीत है और करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए राहत की खबर है।
राजनीतिक विवाद और फंड वितरण में बाधा बनने के बावजूद, न्यायालय ने सामाजिक कल्याण की परंपरा को बनाए रखा और यह सुनिश्चित किया कि गरीबों का हक समाप्त न हो।
अब केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह योजना को प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू करे जिससे ग्रामीण रोजगार और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो।












