बेंगलुरु RWA FIR : बेंगलुरु, कर्नाटक में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक अपार्टमेंट की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और उसकी सिक्योरिटी एजेंसी पर किरायेदारों से ड्रग्स इस्तेमाल, चोरी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए जुर्माना वसूलने का आरोप लगा है। पुलिस ने प्रोविडेंट सनवर्थ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन और टाइको सिक्योरिटीज (या टीको सिक्योरिटीज) के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह मामला बेंगलुरु RWA ड्रग्स जुर्माना के रूप में चर्चा में है और अपार्टमेंट एसोसिएशन की मनमानी पर सवाल उठा रहा है।
मामला क्या है?
प्रोविडेंट सनवर्थ सिटी अपार्टमेंट, जो मैसूर रोड पर स्थित है और राजराजेश्वरी मेडिकल कॉलेज, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं के पास है, में ज्यादातर दूसरे राज्यों के स्टूडेंट्स किराए पर रहते हैं। यहां लेट नाइट पार्टीज, ड्रग्स का इस्तेमाल और अन्य समस्याएं आम थीं। लेकिन RWA ने पुलिस में शिकायत करने की बजाय खुद ही जांच की और जुर्माना वसूला।

एक रेजिडेंट की शिकायत पर पता चला कि पिछले दो महीनों में ही RWA ने 3.3 लाख रुपये से ज्यादा जुर्माना इकट्ठा किया। जुर्माने की रसीदों में कारण लिखा होता था जैसे “ड्रग्स इस्तेमाल या अवैध गतिविधियां”। न्यूनतम जुर्माना 10,000 रुपये और अधिकतम 30,000 से 50,000 रुपये तक था। कुछ मामलों में सेक्शुअल हरासमेंट, चोरी और महिलाओं से बदतमीजी जैसे गंभीर आरोप भी थे, लेकिन इन्हें भी पैसे लेकर दबा दिया गया।
सिक्योरिटी गार्ड्स भी इसमें शामिल थे। वे स्टूडेंट्स को पकड़कर RWA को बताते या खुद ही पैसे ऐंठते थे। धमकी दी जाती थी कि पुलिस में रिपोर्ट करेंगे तो करियर खराब हो जाएगा। इससे स्टूडेंट्स मजबूर होकर जुर्माना भरते थे।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
दक्षिण पश्चिम डिवीजन की DCP अनीथा बी हदन्नवर ने बताया कि कुम्बलगोडू पुलिस ने मंगलवार को FIR दर्ज की। आरोप भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 211, 238, 239 (अपराध की जानकारी छिपाना, सबूत मिटाना) और NDPS एक्ट की धारा 25 (प्रॉपर्टी को अपराध के लिए इस्तेमाल करने देना) के तहत लगाए गए हैं।
- DCP ने कहा, “RWA का अपराध छिपाना गैरकानूनी है।
- ड्रग्स के मामलों में पुलिस को तुरंत सूचित करना जरूरी है।
- जांच में पता चला कि 2023 से अब तक कई मामले दबाए गए।
- पुलिस अब उन किरायेदारों की तलाश कर रही है जिन्होंने जुर्माना भरा या अपार्टमेंट छोड़ा।
RWA को ऐसा करने का अधिकार नहीं
बेंगलुरु अपार्टमेंट फेडरेशन (BAF) के प्रेसिडेंट सतीश माल्या ने कहा कि कर्नाटक अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट 1972 के तहत RWA सिर्फ मेंटेनेंस फीस की लेट पेमेंट पर जुर्माना लगा सकती है। क्रिमिनल मामलों में जांच या पेनल्टी लगाने का कोई अधिकार नहीं। कई अन्य अपार्टमेंट्स में भी ऐसी प्रैक्टिस की शिकायतें आई हैं, जैसे पेट्स के लिए जुर्माना, लेकिन अब सख्ती बढ़ रही है।
यह मामला बेंगलुरु अपार्टमेंट ड्रग्स समस्या को उजागर करता है। शहर में स्टूडेंट्स और यंग प्रोफेशनल्स के बीच पार्टी कल्चर और ड्रग्स का इस्तेमाल चिंता का विषय बन गया है। लेकिन RWA का पैरलल जस्टिस सिस्टम चलाना न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि विक्टिम्स को न्याय से वंचित करता है।
क्या सबक मिलता है?
अपार्टमेंट रेजिडेंट्स को पता होना चाहिए कि कोई भी गंभीर घटना जैसे ड्रग्स, चोरी या हरासमेंट में RWA खुद फैसला नहीं कर सकती। पुलिस में रिपोर्ट करना अनिवार्य है। किरायेदारों, खासकर स्टूडेंट्स को ऐसी धमकियों से बचने के लिए जागरूक रहें और जरूरत पड़े तो सीधे पुलिस से संपर्क करें।
- यह घटना बेंगलुरु में बढ़ती ड्रग्स की समस्या और अपार्टमेंट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल उठाती है।
- पुलिस जांच जारी है और उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी।
- यदि आपके अपार्टमेंट में ऐसी कोई घटना है, तो तुरंत अधिकारियों को सूचित करें।
- यह मामला द इंडियन एक्सप्रेस और अन्य न्यूज स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है।
- बेंगलुरु में रहने वाले लोग RWA नियम और कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक रहें।












