बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण में छोटे दलों ने अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। NDA और महागठबंधन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे अपने छोटे सहयोगी दलों को दमदार बनाएं ताकि सीटों पर मजबूत पकड़ और बढ़त बनाए रख सकें। यह चरण 11 नवंबर को 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान के लिए है।
छोटे दलों की भूमिका और NDA-पक्ष का समीकरण
एनडीए के अंदर चिराग पासवान की लोजपा (RV) 15 सीटों पर चुनाव मैदान में है और जीतनराम मांझी के HAM के उम्मीदवार 6 सीटों पर। चिराग का लोकसभा चुनाव के 100% स्ट्राइक रेट वाला रिकॉर्ड उनकी इन सीटों पर प्रभावी पकड़ को दर्शाता है। उपेंद्र कुशवाहा के RLM ने भी इस चरण में 6 में से 4 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।

महागठबंधन का पकड़ और विकासशील इंसान पार्टी की रणनीति
- महागठबंधन में कांग्रेस 37 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि विकासशील इंसान पार्टी
- (VIP) 7 सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है। VIP प्रमुख मुकेश सहानी विशेष रूप से निषाद
- वोट बैंक पर प्रभाव बनाकर गठबंधन को मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं।
क्षेत्रीय समीकरण और चुनावी गतिरोध
मगध क्षेत्र में महागठबंधन का दबदबा मजबूत है जहां 2020 में उसने 26 में 20 सीटें जीती थीं। सीमांचल क्षेत्र में उच्च मुस्लिम आबादी के कारण AIMIM का प्रभाव बढ़ा है। NDA के लिए चुनौती होगी मुस्लिम वोटों का विभाजन रोकना और हिंदू वोटों को समेटना।
राजनीतिक माहौल और उत्साह
- पहले चरण में रिकॉर्ड 65% से अधिक मतदान हुआ है, जो यह संकेत देता है
- कि इस चुनाव में जनता की भागीदारी उत्साहजनक होगी।
- इस चरण में मतदाताओं की संख्या करीब 3.7 करोड़ से अधिक है।
- अंतिम चरण में छोटे दलों का प्रदर्शन कुल चुनाव परिणामों को बना या बिगाड़ सकता है।
- दलित और निषाद वोटों के प्रभाव के साथ मुस्लिम वोट बैंक का विभाजन भी चुनाव की दिशा तय करेगा।
- बिहार की राजनीति में यह चरण बड़े बदलाव और नए समीकरण लेकर आने वाला है।












