यूपी निर्यात नीति : उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के निर्यातकों को राहत देने के लिए एक नई और महत्वाकांक्षी नीति लागू की है। इस नीति के तहत अब निर्यातकों को बंदरगाह (Port) तक माल भेजने पर वित्तीय सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया, जिसका उद्देश्य राज्य के निर्यात को बढ़ावा देना और ग्लोबल मार्केट में यूपी के उत्पादों की पहचान को मजबूत करना है।
नीति का मुख्य उद्देश्य
इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में लघु, कुटीर, सूक्ष्म और मध्यम उद्यमों (MSME) को प्रोत्साहित करना है, ताकि वे अपने उत्पादों को विदेशों तक आसानी और कम लागत में पहुंचा सकें। अब निर्यातक बंदरगाह तक माल भेजने में होने वाले परिवहन खर्च का एक हिस्सा सरकार से वित्तीय सहायता के रूप में प्राप्त कर सकेंगे।

इस नीति से बनारसी साड़ी, फिरोजाबाद का ग्लासवर्क, मुरादाबाद की ब्रास इंडस्ट्री, अलीगढ़ का हार्डवेयर, आगरा का फुटवियर, कानपुर का लेदर उद्योग और नोएडा की इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट्स को बड़ा लाभ मिलेगा।
बंदरगाह तक परिवहन पर सब्सिडी
- सरकार की नई निर्यात संवर्धन नीति के अनुसार, यूपी के निर्यातकों को माल बंदरगाह तक भेजने
- में लगने वाले खर्च पर वित्तीय सहायता (Transport Subsidy) दी जाएगी। इस मदद का उद्देश्य
- घरेलू उत्पादों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ाना है।
- परिवहन सहायता दरें कुछ शर्तों के साथ लागू होंगी, जैसे:
- सड़क या रेलमार्ग से बंदरगाह तक माल भेजने पर खर्च का निर्धारित प्रतिशत सरकार वहन करेगी।
- सहायता प्राप्त करने वाले निर्यातक को यूपी में उत्पादन इकाई और निर्यात पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराना होगा।
- निर्यात प्रमाण पत्र और शिपिंग दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
इस नीति से लघु उद्योगों को काफी मदद मिलेगी क्योंकि अब वे कम लागत पर विदेशों में अपना व्यवसाय बढ़ा सकेंगे।
यूपी सरकार का ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) कार्यक्रम से जुड़ाव
- नई निर्यात नीति को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना से जोड़ा गया है।
- इसके तहत हर जिले के प्रमुख उत्पाद को ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
- ODOP से जुड़े उत्पादों को सरकार प्राथमिकता के आधार पर निर्यात प्रोत्साहन सहायता देगी।
उदाहरण के लिए, भदोही के कालीन, कन्नौज के इत्र और हाथरस के ताले विश्व बाजार में पहले से प्रसिद्ध हैं। अब सरकार की यह वित्तीय सहायता इन उत्पादों की पहुंच को और विस्तृत करेगी।
राज्य में बनने वाले नए लॉजिस्टिक हब
- नीति के अनुसार यूपी में कई स्थानों पर Integrated Logistics Hubs और Export Facilitation Centres
- स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर, वाराणसी और लखनऊ को प्रमुख केंद्र बनाया गया है।
- इन लॉजिस्टिक हबों में वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कंटेनर स्टेशन और परिवहन सुविधाएँ
- शामिल होंगी ताकि निर्यातकों को बंदरगाह तक माल पहुंचाने में समस्या न हो।
- इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे क्योंकि परिवहन, पैकेजिंग और वेयरहाउसिंग सेक्टर में मांग बढ़ेगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और सिंगल-विंडो सिस्टम
सरकार ने निर्यातकों की सुविधा के लिए डिजिटल तकनीक को भी शामिल किया है। एक सिंगल-विंडो ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है जहाँ निर्यातक अपने आवेदन, दस्तावेज़ और भुगतान पूरी तरह से ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
यह पोर्टल बैंक, कस्टम और ट्रांसपोर्ट विभाग से एकीकृत (Integrated) रहेगा जिससे हर जरूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर पूरी हो जाएगी।
प्रदेश के निर्यात में संभावित वृद्धि
- उत्तर प्रदेश पिछले कुछ वर्षों में निर्यात के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। वर्तमान में राज्य
- का निर्यात 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है। सरकार को उम्मीद है कि नई नीति लागू होने के
- बाद आने वाले दो वर्षों में राज्य का निर्यात 3.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश को ‘Export Hub of North India’ बनाना सरकार का लक्ष्य है। इस दिशा में नीति, निवेश और अवसंरचना तीनों स्तरों पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
- यूपी सरकार की नई निर्यात परिवहन सहायता नीति निर्यातकों के लिए एक बड़ा तोहफा है।
- इससे न केवल उत्पादन इकाइयों को राहत मिलेगी बल्कि राज्य के उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
- परिवहन लागत में कटौती, आसान प्रोसेस और ODOP से डायरेक्ट लिंक इस नीति को सफल बनाएंगे।








