भीमा कोरेगांव केस : भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में आरोपी मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा (73 वर्ष) को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उन्हें ट्रायल शुरू होने तक अस्थायी रूप से मुंबई से दिल्ली शिफ्ट होने की अनुमति दे दी है। नवलखा 2023 में बेल मिलने के बाद मुंबई में रह रहे थे, लेकिन शहर छोड़ने पर प्रतिबंध था। उनकी उम्र, आर्थिक तंगी और दिल्ली में अपना घर होने का हवाला देते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि नवलखा फ्लाइट रिस्क नहीं हैं और ट्रायल शुरू होते ही उन्हें मुंबई लौटना होगा।
बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला: मुख्य पॉइंट्स
- बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस श्याम चंदक)
- ने 17 दिसंबर 2025 को यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा:

- “हम उनके आवेदन में दिए कारणों से संतुष्ट हैं। कुछ भी नहीं दिखता कि वे भागने का खतरा हैं। हमने अपना मन बना लिया है।”
- नवलखा को अपनी जिंदगी और सोशल सर्कल से उखाड़ दिया गया महसूस हो रहा है। वे बेल पर हैं, कानून से भाग नहीं रहे।
- उनकी उम्र (73 साल) को ध्यान में रखते हुए और मुंबई में किराया देते-देते आर्थिक संकट (बैंकruptसी का खतरा) को देखते हुए राहत दी गई।
नवलखा ने आश्वासन दिया कि ट्रायल शुरू होने पर वे मुंबई लौट आएंगे। ट्रायल के दौरान वे दिल्ली में NIA ऑफिस से वीडियो लिंक के जरिए पेश हो सकते हैं, और जरूरत पड़ी तो फिजिकली भी आएंगे। NIA को अतिरिक्त शर्तें सुझाने को कहा गया है, और मामला बुधवार को फिर सुनवाई के लिए रखा गया है।
भीमा कोरेगांव केस का बैकग्राउंड
- यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में हुए एल्गार परिषद कार्यक्रम से जुड़ा है।
- आरोप है कि कार्यक्रम में दिए भाषणों ने जातीय वैमनस्य फैलाया और अगले दिन कोरेगांव-भीमा
- में हिंसा भड़की। पुलिस का दावा है कि यह CPI (माओवादी) के इशारे पर माओवादी विचारधारा फैलाने की साजिश थी।
- मामला शुरू में पुणे पुलिस ने जांचा, बाद में NIA को सौंपा गया।
- 2018 से 16 लोग गिरफ्तार – लेखक, वकील, प्रोफेसर और एक्टिविस्ट्स।
- ट्रायल अब तक शुरू नहीं हुआ, कई आरोपी बेल पर हैं।
- गौतम नवलखा पर माओवादी लिंक्स के गंभीर आरोप हैं।
- पहले स्पेशल NIA कोर्ट ने नवलखा की दिल्ली शिफ्ट की अर्जी खारिज कर दी थी
- जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की।
दोनों पक्षों के तर्क
- नवलखा की तरफ से (वरिष्ठ वकील युग चौधरी): मुंबई में लगभग दो साल से किराया दे रहे हैं, जबकि ट्रायल रुका हुआ है। दिल्ली में अपना घर है, आर्थिक बोझ नहीं सह सकते। कोर्ट की सभी शर्तें मानेंगे।
- NIA की तरफ: विरोध जताया, लेकिन कोर्ट ने नवलखा के पक्ष में फैसला दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल दिल्ली से अटेंड करने की अनुमति नहीं दी जा रही, सिर्फ शिफ्ट की परमिशन है।
क्या मतलब है इस फैसले का?
- यह फैसला बेल पर रह रहे आरोपियों के मानवीय अधिकारों को ध्यान में रखता है।
- लंबे समय तक ट्रायल न शुरू होने से आरोपी आर्थिक और मानसिक तनाव झेल रहे हैं।
- नवलखा जैसे बुजुर्ग आरोपी के लिए यह राहत महत्वपूर्ण है।
- हालांकि, केस की गंभीरता बरकरार है और ट्रायल शुरू होते ही सख्ती बढ़ सकती है।
भीमा कोरेगांव केस भारत में मानवाधिकार, माओवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस का केंद्र रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन इसे राजनीतिक गिरफ्तारियां मानते हैं।












