जनगणना 2027 : देश में लंबे समय से जाति जनगणना (Caste Census) की मांग हो रही है। विपक्षी दल इसे सामाजिक न्याय और आरक्षण के लिए जरूरी बता रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने अब स्पष्ट कर दिया है कि आगामी जनगणना 2027 के पहले चरण में जाति से जुड़ा कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा। जाति आधारित गणना दूसरे चरण में होगी, जिसके लिए लोगों को इंतजार करना पड़ेगा। यह जानकारी गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि जनगणना दो हिस्सों में होगी, और जाति संबंधित सवाल दूसरे चरण की शुरुआत से पहले अधिसूचित किए जाएंगे।
जनगणना की प्रक्रिया और टाइमलाइन क्या है?
भारत की 16वीं जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और यह पहली बार है जब जाति गणना को मुख्य जनगणना का हिस्सा बनाया गया है (1931 के बाद पहली बार)। लेकिन प्रक्रिया दो चरणों में बंटी है:

पहला चरण (हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना): अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 30 दिनों की अवधि में होगा। इसमें 33 सवाल पूछे जाएंगे, जैसे – घर की सामग्री, परिवार का मुखिया, विवाहित जोड़ों की संख्या, अनाज का प्रकार, बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच, वाहनों की संख्या आदि। SC/ST की कैटेगरी का जिक्र है, लेकिन OBC या अन्य जातियों का स्पष्ट नहीं। पहाड़ी और बर्फीले इलाकों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख) में सितंबर 2026 से शुरू हो सकती है।
- दूसरा चरण (जनसंख्या गणना): फरवरी 2027 से मुख्य रूप से शुरू होगा।
- इसी चरण में जाति जनगणना होगी। गृह मंत्रालय ने कहा कि जाति से जुड़े
- सवाल दूसरे चरण से पहले अधिसूचित होंगे। पूरे देश में जनगणना फरवरी 2027 में शुरू होगी
- लेकिन कुछ दुर्गम इलाकों में पहले।
सरकार ने 12 दिसंबर 2025 को प्रेस नोट जारी कर पूरी जानकारी दे दी थी, लेकिन कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं। मंत्रालय ने इसे “जानबूझकर गलत जानकारी” बताया।
राजनीतिक विवाद और विपक्ष का रुख
यह मुद्दा राजनीतिक तौर पर गरमाया हुआ है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि जनगणना नोटिफिकेशन में जाति का कोई कॉलम नहीं है, और भाजपा का इरादा जाति जनगणना नहीं कराने का है। कांग्रेस के जयराम रमेश ने भी सवाल उठाए कि पहले चरण में SC/ST का जिक्र है, लेकिन OBC और सामान्य का नहीं – इससे सरकार की मंशा पर संदेह है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को धोखा दे रही है।
- सरकार का जवाब साफ है – जाति गणना दूसरे चरण में होगी, और यह पहले की तरह ही प्रक्रिया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल में एक PIL खारिज कर दी, जिसमें जाति गणना पर दखल मांगा गया था।
- कोर्ट ने कहा कि यह विशेषज्ञ निकाय का काम है, और सटीक डेटा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत तंत्र बनाना चाहिए।
जाति जनगणना क्यों महत्वपूर्ण?
- 1931 के बाद पहली बार सभी जातियों (SC, ST, OBC, सामान्य) की गिनती होगी।
- इससे आरक्षण, कल्याणकारी योजनाएं, परिसीमन और सामाजिक न्याय की नीतियां प्रभावित होंगी।
- बजट में जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं
- जिसमें 6000 करोड़ से ज्यादा Census 2027 के लिए। यह डेटा विकास योजनाओं को नई दिशा देगा।
क्या होगा आगे?
- जाति जनगणना की सटीक तारीख अभी अधिसूचित नहीं हुई, लेकिन दूसरे चरण (2027 फरवरी) में होगी।
- सरकार ने भ्रम दूर करने के लिए दोबारा बयान जारी किया। क्या यह सामाजिक न्याय
- की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा या राजनीतिक बहस बनी रहेगी? समय बताएगा।












