कंगना रनौत : बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने एक बार फिर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर जोरदार हमला बोला है। यह बयान बीएमसी चुनाव 2026 में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद आया है, जहां ठाकरे परिवार की लंबे समय से चली आ रही सत्ता का अंत हो गया। कंगना ने ठाकरे गुट को महिलाओं से नफरत करने वाले, गुंडे और भाई-भतीजावाद माफिया करार दिया। उन्होंने कहा कि जनता ने ऐसे लोगों को उनकी सही जगह दिखा दी है, जिन्होंने उन्हें गाली दी, घर तोड़ा और महाराष्ट्र छोड़ने की धमकी दी। यह घटना 2020 की पुरानी कड़वी यादों को ताजा कर रही है, जब बीएमसी ने उनके बंगले का हिस्सा गिराया था।
कंगना रनौत बीएमसी चुनाव में भाजपा की शानदार जीत
महाराष्ट्र में हुए नगर निगम चुनावों में महायुति गठबंधन (भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना) ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में 227 सीटों में से 118 सीटें जीतकर गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। इसमें भाजपा अकेले 89 सीटों पर विजयी रही, जबकि कुल वोटों का 21.58% (11,79,273 वोट) उसके हिस्से आया। पूरे राज्य में महायुति ने 29 में से 25 नगर निगमों पर कब्जा जमाया। यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा मानी जा रही है। विकास, सुशासन और पारदर्शिता के एजेंडे पर आधारित इस जीत ने ठाकरे परिवार की राजनीतिक पकड़ को कमजोर कर दिया है।

#कंगना रनौत ने इस जीत पर खुशी जताते हुए पीएम मोदी, सीएम फडणवीस और कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने इसे महाराष्ट्र की जनता की जीत बताया, जो अब ऐसे नेताओं से मुक्त हो गई है जो महिलाओं का सम्मान नहीं करते।
कंगना रनौत का ठाकरे पर हमला: पृष्ठभूमि और विवाद
- #कंगना का यह बयान उनकी 2020 की घटना से सीधा जुड़ा है। उस समय उद्धव ठाकरे की
- सरकार में बीएमसी ने कंगना के बांद्रा वेस्ट स्थित बंगले के हिस्से को अवैध बताकर तोड़ दिया था।
- कंगना ने इसे बदले की कार्रवाई करार दिया, क्योंकि उन्होंने मुंबई पुलिस पर तीखी टिप्पणियां की थीं।
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस कार्रवाई को दुर्भावना से प्रेरित माना और कंगना के अधिकारों की अनदेखी बताई।
- कंगना ने तब ठाकरे को ‘पेंग्विन’ और अन्य नामों से पुकारा था, जिससे विवाद और बढ़ गया।
एनडीटीवी से बातचीत में कंगना ने कहा, “मैं खुश हूं कि ऐसे लोग महाराष्ट्र से बाहर हो गए हैं। जनता जनार्दन ऐसे महिलाओं से नफरत करने वालों, गुंडों और नेपोटिज्म माफिया को उनकी सही जगह दिखा रही है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन लोगों ने उनका घर तोड़ा, उन्हें अब सत्ता से बेदखल होना पड़ा। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहां कंगना के समर्थक इसे न्याय की जीत बता रहे हैं, जबकि ठाकरे समर्थक इसे राजनीतिक बदला कह रहे हैं।
- कंगना की राजनीतिक यात्रा भी दिलचस्प है। हिमाचल प्रदेश से सांसद चुनी गईं कंगना अक्सर
- विवादास्पद बयानों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने बॉलीवुड में नेपोटिज्म, सुशांत सिंह राजपूत
- मामले और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बोला है। इस बार का बयान ठाकरे
- परिवार पर उनकी पुरानी नाराजगी को फिर से उजागर करता है।
ठाकरे परिवार की हार के निहितार्थ
ठाकरे परिवार दशकों से मुंबई की राजनीति में हावी रहा है। बाल ठाकरे की शिवसेना ने कभी बीएमसी पर मजबूत पकड़ बनाई थी, लेकिन 2022 के राजनीतिक उथल-पुथल के बाद एकनाथ शिंदे गुट के अलग होने से उद्धव ठाकरे कमजोर हो गए। इस चुनाव में ठाकरे गुट की हार ने उनकी साख को बड़ा झटका दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम 2024 के लोकसभा चुनावों की तरह ही भाजपा की मजबूती दिखाता है। महाराष्ट्र में अब विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है, जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छता और सार्वजनिक सेवाएं।
कंगना का बयान: क्या है इसका प्रभाव?
- कंगना का यह हमला न केवल राजनीतिक है, बल्कि महिलाओं के सम्मान और न्याय की बात करता है।
- बॉलीवुड से राजनीति में आईं कंगना अक्सर ऐसे मुद्दों पर बोलती हैं जो महिलाओं के
- खिलाफ अन्याय को उजागर करते हैं। उनके समर्थक इसे साहसी कदम मानते हैं,
- जबकि आलोचक इसे व्यक्तिगत रंजिश कहते हैं। सोशल मीडिया पर #KanganaVsThackeray ट्रेंड कर रहा है
- जहां बहस छिड़ी हुई है।
निष्कर्ष बीएमसी चुनाव में भाजपा की जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति को नया मोड़ दिया है। कंगना रनौत का ठाकरे पर हमला पुराने विवादों को फिर से जिंदा कर रहा है, लेकिन यह जनता की ताकत को भी दिखाता है। ऐसे में, राजनीतिक पार्टियां अब विकास पर फोकस करेंगी या विवादों में उलझेंगी, यह देखना बाकी है। कंगना जैसे सेलिब्रिटी पॉलिटिशियन का बोलना राजनीति को और दिलचस्प बनाता है।












