आज का पंचांग : 14 जनवरी 2026 (बुधवार) एक अत्यंत विशेष और दुर्लभ दिन है, क्योंकि इस दिन मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का संयोग बन रहा है। यह संयोग लगभग 23 वर्षों बाद आया है। सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण की शुरुआत कर रहे हैं, जो प्रकाश, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है। आइए जानते हैं आज का पूरा पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, स्नान-दान का समय, पूजा विधि और महत्वपूर्ण नियम।
आज का पंचांग 14 जनवरी 2026 का पंचांग विवरण
- तिथि: माघ मास कृष्ण पक्ष एकादशी (षटतिला एकादशी) – शाम लगभग 5:52 बजे तक, उसके बाद द्वादशी शुरू।
- नक्षत्र: अनुराधा (अर्धरात्रि तक), फिर ज्येष्ठा।
- योग: गण्ड योग (सायं 7:50 तक), फिर वृद्धि योग।
- करण: बालव (सायं 5:53 तक), फिर तैतिल।
- सूर्योदय: सुबह 7:14 बजे (वाराणसी/उत्तर भारत आधारित)
- सूर्यास्त: शाम 5:45 बजे
- चंद्र राशि: वृश्चिक में संचार।
- त्योहार: मकर संक्रांति, षटतिला एकादशी व्रत, पोंगल (दक्षिण भारत), लोहड़ी (पंजाब)।

मकर संक्रांति 2026: सटीक समय और पुण्य काल
मकर संक्रांति दोपहर 3:13 बजे (IST) पर शुरू होगी, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
- पुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक (सूर्यास्त तक) – स्नान, दान, सूर्य अर्घ्य और पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ समय।
- महापुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से 4:58 बजे तक – सबसे शक्तिशाली अवधि, जिसमें किया गया दान अक्षय फल देता है।
नोट: अधिकांश दृक पंचांग और प्रमुख ज्योतिष स्रोतों के अनुसार मुख्य उत्सव 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा। कुछ प्राचीन पंचांगों में रात 9:19 बजे का उल्लेख है, लेकिन व्यापक रूप से 14 जनवरी ही मान्य है।
षटतिला एकादशी का महत्व और नियम
षटतिला एकादशी विष्णु पूजा का विशेष व्रत है। इस दिन तिल के छह प्रकार से उपयोग (स्नान, उबटन, तर्पण, दान, भोजन, हवन) करने से पाप नाश और मोक्ष प्राप्ति होती है।
- व्रत में चावल/अन्न का सेवन वर्जित है (एकादशी नियम)।
- इसलिए खिचड़ी या चावल आधारित भोजन 14 जनवरी को न करें।
- पारण: अगले दिन (15 जनवरी) द्वादशी पर सुबह पारण करें।
- संयोग दुर्लभ होने से इस दिन तिल-गुड़ का दान विशेष फलदायी।
शुभ मुहूर्त और अशुभ समय (वाराणसी/उत्तर भारत)
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:27 से 6:21 बजे
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:15 से 2:57 बजे
- अमृत काल: दोपहर 3:23 से शाम 5:10 बजे
- राहुकाल: दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक (शुभ कार्य टालें)
- यमगंड: सुबह 7:30 से 9:00 बजे
- गुलिक काल: दोपहर 10:30 से 12:00 बजे
मकर संक्रांति और एकादशी की पूजा विधि
- सूर्योदय स्नान: प्रातः गंगा या घर पर स्नान करें।
- सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे से जल, लाल फूल, चंदन, अक्षत चढ़ाएं। मंत्र: ॐ घृणिः सूर्याय नमः।
- तिल दान: तिल, गुड़, कंबल, अनाज, खिचड़ी (बिना चावल के), वस्त्र दान करें।
- विष्णु पूजा: एकादशी व्रत के लिए भगवान विष्णु की पूजा, तिल के लड्डू प्रसाद।
- तिल-गुड़ व्यंजन: तिलकुट, रेवड़ी, गजक बनाकर बांटें।
क्षेत्रीय उत्सव और विशेष बातें
- उत्तर प्रदेश/बिहार: खिचड़ी पर्व (लेकिन एकादशी पर चावल वर्जित)।
- गुजरात: उत्तरायण – पतंग उड़ाना।
- पंजाब: लोहड़ी – आग जलाकर उत्सव।
- दक्षिण भारत: पोंगल – 4 दिन का फसल उत्सव।
14 जनवरी 2026 स्वास्थ्य, धन, सुख और मोक्ष प्राप्ति का सुनहरा अवसर है। सूर्य देव की कृपा से उत्तरायण की नई शुरुआत करें, तिल-गुड़ बांटें, दान-पुण्य करें और परिवार के साथ खुशियां मनाएं। इस दुर्लभ संयोग में किया गया कोई भी शुभ कार्य जीवनभर फल देगा।











