Vedic Achievement 2025 : महाराष्ट्र के 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने वाराणसी में 200 साल बाद दंडक्रम पारायण पूरा किया। 50 दिनों में 2000 वैदिक मंत्र कंठस्थ! PM मोदी-Yogi Adityanath ने सराहा। पूरी कहानी हिंदी में।
भारत की प्राचीन वैदिक परंपरा में एक नया अध्याय जुड़ गया है! महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पूर्व अहमदनगर) के 19 वर्षीय युवा वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने वाराणसी में शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिन शाखा के करीब 2000 वैदिक मंत्रों का दंडक्रम पारायण (Dandakrama Parayanam) मात्र 50 दिनों में बिना रुकावट के पूरा कर इतिहास रच दिया।
कौन हैं वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे?

देवव्रत महेश रेखे महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव से आते हैं। उनके पिता वेदब्रह्मश्री महेश चंद्रकांत रेखे श्रृंगेरी पीठम में शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिन शाखा के मुख्य परीक्षक हैं। बचपन से ही वैदिक वातावरण में पले-बढ़े देवव्रत ने मात्र 12 वर्षों की कड़ी साधना से यह असंभव सा प्रतीत होने वाला कार्य कर दिखाया। 2 अक्टूबर से 30 नवंबर 2025 तक वाराणसी के रामघाट स्थित वल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय में उन्होंने रोज सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक लगातार मंत्रोच्चार किया। कोई किताब नहीं देखी, कोई रुकावट नहीं – सिर्फ शुद्ध उच्चारण और अद्भुत स्मरण शक्ति!
दंडक्रम पारायण क्या है? क्यों है इतना कठिन?
- वेदों में पाठ की कई विकृतियां (परायण) हैं, जिनमें दंडक्रम को “वैदिक पाठ का मुकुट” कहा जाता है।
- इसमें हर मंत्र को 11 अलग-अलग क्रमों में दोहराना पड़ता है – जटिल ध्वन्यात्मक परिवर्तन, स्वर पैटर्न और
- अनुशासन की इससे कठिन परीक्षा कोई नहीं। श्रृंगेरी मठ के अनुसार, यह लорд नरसिम्हा को समर्पित शक्तिशाली पूजा है।
- पिछले 200 साल में सिर्फ नासिक के वेदमूर्ति नारायण शास्त्री ने इसे पूरा किया था। देवव्रत ने सबसे कम उम्र
- और सबसे कम समय (50 दिन) में इसे दोषरहित पूरा कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। विद्वानों ने कहा
- “ऐसा बालक पहले कभी नहीं देखा, जो बिना देखे 2000 मंत्र शुद्ध बोल दे!”
PM मोदी और योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा
PM मोदी ने X (ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा: “19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने जो किया, उसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी! यह हमारी गुरु परंपरा का सर्वोत्तम रूप है। काशी के सांसद के रूप में मुझे गर्व है कि यह साधना पवित्र काशी में हुई।” योगी आदित्यनाथ ने काशी तमिल संगमम 4.0 के उद्घाटन में उन्हें सम्मानित कर कहा – “यह आध्यात्मिक जगत के लिए नया प्रेरणा दीप है। काशी की धरती पर यह अनुष्ठान होना विशेष गौरव की बात है।”
- NDTV वीडियो में देवव्रत ने विनम्रता से PM मोदी का धन्यवाद किया: “मैं गुरु परंपरा को नमन और
- वेदों की ओर कदम बढ़ाने के लिए आभारी हूं। मैंने अभी कुछ हासिल नहीं किया, गुरु चरणों में सेवा करनी बाकी है।”
क्यों है यह उपलब्धि पूरे देश के लिए गर्व की बात?
- सनातन धर्म का उत्थान: देवव्रत ने कहा – “यह पारायण विश्व कल्याण, सनातन धर्म की प्रगति
- और भारत को विश्वगुरु बनाने की प्रार्थना है।”
- युवाओं के लिए प्रेरणा: आज के डिजिटल युग में एक 19 साल का युवा 12 साल तपस्या कर वेदों को जीवंत कर रहा है।
- काशी में भव्य शोभायात्रा: 500 से ज्यादा वैदिक छात्रों, संगीतकारों और भक्तों के साथ जुलूस निकला।
- रेयर फीट: विद्वानों ने इसे “अद्भुत स्मरण शक्ति और अद्वितीय साधना” बताया।
यह घटना बताती है कि भारत की वैदिक विरासत अभी भी जीवंत है। देवव्रत जैसे युवा ही भारत को विश्वगुरु बनाएंगे।
वैदिक ज्ञान की नई मशाल
- वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे की यह साधना सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज के
- लिए गर्व का क्षण है। PM मोदी की बधाई और देवव्रत का विनम्र धन्यवाद हमें सिखाता है – सच्ची सफलता गुरु चरणों में है।












