दिल्ली रेड फोर्ट बम धमाका : दिल्ली ब्लास्ट के खुलासे ने एक बड़ी सच्चाई सामने ला दी है कि धमाके से पहले ‘मौत की कार’ यानी हुंडई i20 कार दिल्ली के सीपी (कनॉट प्लेस) और मयूर विहार की सड़कों पर कई घंटे तक घूमती रही। यह कार आतंकियों का बड़ा हथियार साबित हुई, जिसका इस्तेमाल लाल किला के पास हुए भयावह कार बम धमाके में किया गया। इस हमले में कई लोग घायल और करीब नौ लोगों की मौत हुई, जिससे दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों की सतर्कता को गंभीर सवालों के घेरे में ला दिया गया है।
मौत की कार का खौफनाक सफर
जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह सफेद रंग की हुंडई i20 कार धमाके से कुछ घंटे पहले दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाकों कनॉट प्लेस और मयूर विहार में देखी गई। इस दौरान कार में बैठे आतंकी उमर नबी लगातार इलाके में घूमता रहा और समय गुजारता रहा। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कार 29 अक्टूबर से 10 नवंबर तक हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कैंपस में खड़ी रही। वहां से यह कार 10 नवंबर को दिल्ली में दाखिल हुई और बाद में धमाके से पहले चांदनी चौक के सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में खड़ी थी।

- इस कार की पहचान उस समय हुई जब पुलिस को अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में खड़ी एक और स्विफ्ट
- डिजायर कार मिली, जो आतंकियों के लिंक में थी। हुंडई कार का रजिस्ट्रेशन डॉ. शाहीन सईद के नाम था
- जिनके ठिकाने से असॉल्ट राइफल्स और विस्फोटक भी बरामद हुए। इस धमाके में हाई ग्रेड मिलिट्री
- एक्सप्लोसिव और अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया गया था, जिससे इस हमले की गंभीरता और भी बढ़ जाती है।
धमाके के पीछे की साजिश
आतंकी नेटवर्क की यह कार एक सुनियोजित बड़े हमले का हिस्सा थी, लेकिन घबराहट में उमर नबी ने बम को समय से पहले डिटोनेट कर दिया, जिस वजह से धमाका आंशिक हुआ और बड़े नुकसान से बचा गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि धमाके की ताकत पूरी नहीं थी, क्योंकि विस्फोटक को सही तरीके से असेंबल नहीं किया गया था। पुलिस को शक है कि यह आतंकी मॉड्यूल विदेशों से भी जुड़ा था, और इसका संचालन बाहर से हो रहा था।
- जांच के मुताबिक, ब्लास्ट से कुछ घंटे पहले कार 7:30 बजे फरीदाबाद के एशियन अस्पताल के बाहर देखी गई थी
- फिर 8:13 बजे बदरपुर टोल पार कर दिल्ली में दाखिल हुई, और 3:19 बजे सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में पहुंची।
- शाम 6:48 बजे कार पार्किंग से निकली और 6:52 बजे जोरदार धमाका हुआ। इस दौरान उमर करीब
- तीन घंटे तक कार में बैठा रहा और इस समय के दौरान उसके इरादे, प्लानिंग या आदेशों का इंतजार करते रहने की संभावना है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
- इस धमाके ने दिल्ली की हाई-सिक्योरिटी जोन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।
- यह बात चिंता बढ़ाती है कि ऐसी महत्वपूर्ण जगहों पर छिपा कर कैसे इतनी खतरनाक कार घूमा सकती थी
- और आखिर क्यों इसे पहले पकड़ा नहीं जा सका। इसके साथ ही खुफिया एजेंसियों द्वारा इस
- नेटवर्क के विदेशी कनेक्शन की जांच जारी है, जिससे इंतजार है कि आगे कौन-कौन से तथ्य सामने आएंगे।












