इंडिया गठबंधन की महाबैठक भारतीय राजनीति में विपक्षी दलों का सबसे चर्चित गठबंधन INDIA Alliance (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) एक बार फिर सुर्खियों में है। 8 जून 2026 को दिल्ली में हो रही इस महाबैठक में 23 राजनीतिक दल शामिल होने वाले हैं, लेकिन AAP और DMK के किनारे करने से गठबंधन की एकता पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं TMC और TVK की संभावित भागीदारी नई उम्मीद जगा रही है। क्या यह बैठक विपक्ष को नई दिशा देगी या आंतरिक कलह चुनौतियां बढ़ा देगी?

इंडिया गठबंधन की महाबैठक का पूरा अपडेट
2024 लोकसभा चुनाव के बाद यह पहली बड़ी बैठक है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेता इसमें शामिल होंगे। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। उन्होंने AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात भी की। बैठक में अखिलेश यादव (सपा), तेजस्वी यादव (आरजेडी) और उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT) जैसे दिग्गज नेता भी मौजूद रहेंगे।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि 23 दल इस बैठक में हिस्सा लेंगे। मुख्य एजेंडा है:
- आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार करना
- बंगाल, असम समेत विभिन्न राज्यों में हार के कारणों पर चर्चा
- गठबंधन को मजबूत करने के लिए नए फॉर्मूले पर मंथन
DMK और AAP क्यों कर रहे किनारा?
- तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK ने कांग्रेस पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए
- बैठक से दूरी बना ली है। DMK का कहना है कि कांग्रेस तमिलनाडु में TVK (तमिल वेल्लार काची)
- के साथ गठबंधन कर क्षेत्रीय दलों को कमजोर कर रही है। DMK नेता मानते हैं कि कांग्रेस BJP को प्रभावी चुनौती नहीं दे पा रही।
- इसी तरह आम आदमी पार्टी भी दिल्ली चुनाव के बाद से गठबंधन से दूरी बनाए हुए है।
- AAP नेता सोमनाथ भारती ने खुलकर कहा कि कांग्रेस क्षेत्रीय दलों को कमजोर करके सिर्फ दो बड़े
- दलों के बीच सत्ता सीमित रखना चाहती है।
- केरल में भी CPM (सीपीएम) ने कांग्रेस पर BJP से सांठगांठ का आरोप लगाते हुए बैठक से किनारा कर लिया है।
TVK और TMC की भूमिका अहम
DMK के ना आने की जगह TVK (विजय की पार्टी) बैठक में शामिल हो सकती है। यह बदलाव तमिलनाडु की राजनीति में नया समीकरण बना सकता है। वहीं TMC पहले गठबंधन से दूरी बनाए रखती थी, लेकिन बंगाल में बड़े झटके के बाद ममता बनर्जी सक्रिय हो गई हैं। हालांकि TMC के अंदर भी कलह है – 80 विधायकों में से 58 बागी हो चुके हैं।
क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?
यह बैठक विपक्ष के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले दो सालों में राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। 2024 चुनाव से पहले 1 जून को हुई बैठक के बाद कोई बड़ी बैठक नहीं हुई थी। अब विपक्ष को:
- अपनी रणनीति को नई ऊर्जा देनी होगी
- क्षेत्रीय दलों के हितों का ध्यान रखना होगा
- कांग्रेस की अगुवाई पर उठ रहे सवालों का समाधान ढूंढना होगा
आपसी फूट गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। अगर DMK, AAP और CPM जैसे बड़े दल बाहर रहते हैं तो INDIA Alliance की ताकत कमजोर पड़ सकती है।
भविष्य की संभावनाएं!
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि:
- क्षेत्रीय दलों को ज्यादा महत्व दिया जाए तो गठबंधन मजबूत हो सकता है।
- TVK जैसी नई पार्टियों को शामिल करने से दक्षिण भारत में आधार बढ़ सकता है।
- TMC की सक्रिय भागीदारी पूर्वी राज्यों में विपक्ष को मजबूती देगी।
लेकिन कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों के असंतोष को दूर करना होगा, वरना बैठक सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
INDIA गठबंधन की यह महाबैठक सिर्फ एक बैठक नहीं बल्कि विपक्षी राजनीति का भविष्य तय करने वाला मंच है। DMK-AAP का किनारा चुनौतियां बढ़ा रहा है, लेकिन TVK-TMC की संभावित एंट्री नई उम्मीद जगाती है। अब देखना यह होगा कि बैठक के बाद क्या ठोस फैसले निकलते हैं और क्या विपक्ष BJP के खिलाफ एकजुट मोर्चा बना पाता है।







